जिला आदिवासी समाज के वरिष्ठ नेता एवं भारतीय जनता पार्टी के जिला उपाध्यक्ष रमेश हिड़ामे ने अनुसूचित क्षेत्र में ग्राम सभा के विरोध को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी पूर्णतः अधिसूचित अनुसूचित क्षेत्र (शेड्यूल एरिया) है, जहां पेसा अधिनियम पूरी तरह प्रभावी है। ऐसे क्षेत्र में ग्राम सभा का विरोध करना पेसा कानून की मूल भावना और उसकी संवैधानिक संप्रभुता पर सीधा आघात है।
रमेश हिड़ामे ने कहा कि पेसा अधिनियम के तहत सरपंच सहित कई महत्वपूर्ण पंचायत पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं। इस कानून की आत्मा ग्राम सभा है, जिसके माध्यम से स्थानीय समुदाय को विकास कार्यों, प्राकृतिक संसाधनों और प्रशासनिक निर्णयों में भागीदारी का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि यदि पेसा अधिनियम लागू नहीं होता तो जनजातीय समाज को यह विशेष प्रतिनिधित्व और अधिकार नहीं मिल पाते।
उन्होंने क्षेत्र के बदलते हालात का उल्लेख करते हुए कहा कि मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहा, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तथा प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा के नेतृत्व और प्रयासों से क्षेत्र अब नक्सलवाद से मुक्त होकर विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अब क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास की अत्यधिक आवश्यकता है और केंद्र व राज्य सरकार की अधिकांश विकास योजनाएं ग्राम सभा की स्वीकृति के बाद ही आगे बढ़ती हैं। यही लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की वास्तविक ताकत है।
भाजपा जिला उपाध्यक्ष ने मीडिया में प्रकाशित खबरों का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान में सरपंच संघ अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत है तथा इस दौरान ग्राम सभा के बहिष्कार अथवा विरोध की बात सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का कदम पेसा कानून की संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने वाला है। ग्राम सभा का विरोध लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विरुद्ध है और इससे आम जनता के मन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि आंदोलन वास्तव में जनहित के लिए है या इसके पीछे कोई राजनीतिक उद्देश्य कार्य कर रहा है।
रमेश हिड़ामे ने सरपंचों को संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रखने की सलाह देते हुए कहा कि यदि उनकी कोई समस्या है तो वे विशेष ग्राम सभा का आयोजन करें। ग्राम सभा में ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों के समक्ष अपनी समस्याएं रखें तथा उनकी सहमति से प्रस्ताव पारित कर उसे ग्राम सभा के कार्यवाही रजिस्टर में दर्ज कराएं। इसके बाद ग्राम सभा के प्रस्ताव के साथ उच्चाधिकारियों के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों से जुड़े मामलों में राज्यपाल सर्वोच्च संवैधानिक प्राधिकारी होते हैं और यही सबसे उचित एवं वैधानिक प्रक्रिया है।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक गरिमा को दरकिनार कर ग्राम सभा का विरोध करना यह संदेश देता है कि आंदोलन व्यापक जनहित के बजाय व्यक्तिगत या राजनीतिक स्वार्थों से प्रेरित हो सकता है, जो अनुसूचित क्षेत्र की स्वायत्त व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
अंत में रमेश हिड़ामे ने जिले के सभी सरपंचों से अपील करते हुए कहा कि वे किसी के बहकावे या राजनीतिक स्वार्थ का हिस्सा न बनें। उन्होंने आग्रह किया कि सभी जनप्रतिनिधि पेसा कानून की मर्यादा और संवैधानिक प्रावधानों का पालन करते हुए जनता का विश्वास कायम रखें तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा को मजबूत बनाकर ही अनुसूचित क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और जनजातीय समाज के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
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