NBPNEWS/मोहला, 25 दिसंबर 2025 विशेष रिपोर्ट
ग्राम पंचायत मुकादाह के अंतर्गत ग्रामसभा मोचर ने पेसा कानून के तहत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए वन प्रबंधन, संरक्षण और सामाजिक सुधार की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। ग्रामसभा ने अपनी पारंपरिक वन सीमाओं को चिन्हित कर सुरक्षित करने के उद्देश्य से पूरे गांव के सामूहिक श्रम से फायर लाइन तैयार की और जंगल की रक्षा का बीड़ा उठाया।
ग्रामसभा द्वारा यह कार्य सामुदायिक वन अधिकार (CFR) प्रक्रिया के अंतर्गत किया गया है। पेसा कानून की धारा 4(ख) और 4(घ) के अनुसार ग्रामसभा को जल, जंगल और जमीन जैसे सामुदायिक संसाधनों के प्रबंधन, संरक्षण और संवर्धन का अधिकार प्राप्त है। इसी अधिकार के तहत ग्रामसभा मोचर ने जंगलों को आग से बचाने और भविष्य के लिए सुरक्षित करने का निर्णय लिया।
उजड़े जंगलों में फलदार पौधरोपण का निर्णय
ग्रामसभा ने यह भी तय किया कि भविष्य में उजड़े हुए वन क्षेत्रों में फलदार पौधों का रोपण किया जाएगा, ताकि जंगलों का पुनर्जीवन हो सके और ग्रामीणों की आजीविका के साधन भी मजबूत हों। यह निर्णय न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देगा।
नशा मुक्ति की दिशा में ऐतिहासिक फैसला
ग्रामसभा मोचर ने सामाजिक सुधार के तहत एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए गांव में शराब और अन्य नशीले पदार्थों के निर्माण, बिक्री और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का संकल्प लिया। ग्रामसभा ने स्पष्ट किया कि शराब पीकर हुड़दंग करने वालों पर पेसा कानून की धारा 4(ड)(i) के तहत कार्रवाई की जाएगी और गांव में पूर्ण शराबबंदी लागू रहेगी।
यह निर्णय ग्रामसभा अध्यक्ष ज्ञानसिंह वर्चो, एफआरसी अध्यक्ष ओमकार सिंह, कुन्ती बाई और ग्राम पटेल मंगत राम कोरेटी के नेतृत्व में लिया गया, जिसमें संपूर्ण ग्रामसभा ने एकमत होकर भाग लिया।
पेसा कानून का जमीनी उदाहरण
इस संबंध में जानकारी देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता सुखदास मंडावी ने बताया कि ग्रामसभा मोचर द्वारा लिया गया यह निर्णय पेसा कानून के जमीनी क्रियान्वयन का सशक्त उदाहरण है। ग्रामसभा ने यह सिद्ध किया है कि यदि कानून में मिले अधिकारों को सही तरीके से समझा और अपनाया जाए, तो गांव स्वयं अपने संसाधनों और सामाजिक व्यवस्था का बेहतर संचालन कर सकता है।
ग्रामसभा मोचर का यह कदम न केवल वन संरक्षण और नशा मुक्ति की दिशा में प्रेरणादायक है, बल्कि अन्य ग्रामसभाओं के लिए भी एक मॉडल के रूप में सामने आया है।
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