प्रवेश कुमार: जिले की पंचायत राजनीति में पिछले कई दिनों से चल रहे विवाद के बीच बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) भारती चंद्राकर का तबादला कर दिया गया है। इस निर्णय के बाद जिला सरपंच संघ ने इसे अपने लंबे संघर्ष, एकजुटता और लोकतांत्रिक आंदोलन की बड़ी सफलता बताया है।
जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले 23 जून को जिला सरपंच संघ जिला पंचायत सीईओ के पास चार सूत्रीय ज्ञापन लेकर पहुंचे थे। ठीक इसके विपरीत सीईओ ने अनसुना कर खरी खोटी सुना दी। गुस्साए सरपंच वहां से निकलकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। कलेक्टर कार्यालय के सामने बैठकर कलेक्टर तूलिका प्रजापति से मिलने की कोशिश करते रहे। कलेक्टर से मुलाकात नहीं होने पर ग्राम सभा और प्रशासनिक कार्यों का विरोध किए।
कुछ दिनों तक हाई वोल्टेज संघ का विरोध लगातार चलता रहा आखिरकार कलेक्टर के साथ उनकी मीटिंग हुई । जिसमें जिला सीईओ को हटाने की मांग उठाई थी। जिसके बाद मांग पूरा न होने पर संघ राजधानी रायपुर जाकर मंत्रियों से सीईओ को हटाने की बात रखी साथ ही आंदोलन के दौरान सरपंचों ने शासन के नाम ज्ञापन भी सौंपा था, जिसमें पंचायतों के विकास कार्यों में अनावश्यक विलंब और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे।
दूसरी ओर कलेक्टर तूलिका प्रजापति ने 12 सदस्यीय अधिकारियों की तीन जांच टीम गठित की जिसमें जिला पंचायत के साथ साथ तीन जनपदों के 13 बिंदुओं पर जांच के निर्देश दिए थे।
इन बिंदुओं पर हुआ जांच का निर्देश-जिलाधीश तूलिका प्रजापति ने विलंब फाइलों एवं प्रकरणों का परीक्षण तथा विलंब का कारण, स्वीकृत कार्यों की भौतिक एवं विकृत प्रगति का सत्यापन, ठेकेदारों वेंडरो की भुगतान की स्थिति एवं विलंब के कारण, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं समय सीमा का पालन कार्यों के मूल्यांकन एवं सत्यापन हेतु समय सीमा का निर्धारण कैलेंडर, कार्यों के मापन पुस्तिका एमबी अभिलेख एवं अन्य दस्तावेजों का परीक्षण,
डिजिटल हस्ताक्षर, ई ऑफिस एवं रिकॉर्ड संधारण की स्थिति, वित्तीय नियमों शासन के निर्देशों अथवा विभागीय प्रक्रियाओं के समय बंदृ पालन की स्थिति, विभागीय बजट उपलब्धता उपरांत भुगतान लंबित किए जाने वाले प्रकरणों की स्थिति, निरीक्षण रजिस्टर एवं अनुपालन की सीमा समीक्षा, लंबित शिकायतों एवं प्रकरणों का परीक्षण, विभागीय समन्वय एवं कार्य निष्पादन की समीक्षा, अधिकारियों कर्मचारियों की उत्तरदायित्व निर्धारण संबंधित तथ्य , सुधार आत्मक उपाय एवं आवश्यक अनुसंधानों सहित प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश किया गया है।
सरपंच संघ का आरोप था कि पंचायतों के विकास कार्यों से संबंधित फाइलें बिना किसी ठोस कारण के लंबित रखी जा रही थीं। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि कमीशन नहीं देने पर प्रस्तावों और भुगतान संबंधी फाइलों के निपटारे में देरी की जाती थी। इन मुद्दों को लेकर जिलेभर के सरपंचों में लंबे समय से नाराजगी बनी हुई थी।
जिला सरपंच संघ के युवा अध्यक्ष पुष्पेंद्र कुमार भूआर्य के नेतृत्व में जिलेभर के सरपंच एक मंच पर आए और पंचायतों के अधिकारों तथा विकास कार्यों में आ रही कथित बाधाओं के खिलाफ लगातार आवाज बुलंद की। आंदोलन के दौरान संघ ने चेतावनी दी थी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
अब CEO भारती चंद्राकर के तबादले के आदेश के बाद सरपंच संघ ने इसे अपने आंदोलन की जीत बताया है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करना नहीं था, बल्कि पंचायतों में पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचारमुक्त व्यवस्था सुनिश्चित करना था। उनका दावा है कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन का ही परिणाम है कि शासन ने यह निर्णय लिया।
जिला पंचायत CEO के तबादले के साथ जिले की पंचायत राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। अब सभी की निगाहें नए CEO की नियुक्ति और उनकी कार्यशैली पर टिकी हैं। जनप्रतिनिधियों को उम्मीद है कि नए नेतृत्व में पंचायतों के विकास कार्यों को गति मिलेगी तथा प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।
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