जिले की पुलिस पर पत्रकार और उसके परिवार के खिलाफ लगातार षड्यंत्र रचने का गंभीर आरोप लगा है, त्रिनेत्र में कैद हुआ पुलिस की हरकते। मामला पत्रकार केजन साहू, उनकी बीमार पत्नी और 70 वर्षीय वृद्ध पिता से जुड़ा है। आरोप है कि जिले की पुलिस ने एक ही प्रकरण में दो-दो एफआईआर दर्ज कर, उन्हें और उनके परिवार को दोहरी सजा दिलाने की कोशिश की है।
एक ही मामले में दो एफआईआर
जानकारी के अनुसार, चिल्हाटी थाना क्षेत्र में जमीन विवाद और पानी निकासी का पुराना मामला राजनीतिक दबाव में जातिगत प्रताड़ना के गंभीर प्रकरण में बदल गया। 20 जून 2025 को जांच अधिकारी डीएसपी नेहा पवार ने मामले की जांच उपरांत रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि आवेदिका ने आवेदन बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया है। इसके बाद प्रकरण को 107/16 की प्रतिबंधात्मक करते हुए तहसील न्यायलय में विचाराधीन है।
लेकिन, 9 सितंबर 2025 को तीन माह बाद, अचानक पुलिस ने उसी प्रकरण में जातिगत गाली-गलौज और प्रताड़ना का मामला दर्ज कर लिया। इसे लेकर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
गवाहों के साथ केजन के घर में प्रवेश
आरोप है कि 13 सितंबर को डीएसपी नेहा पवार पुलिस बल के साथ कहाडकसा गांव पहुंचीं। पत्रकार और उनके परिवार की अनुपस्थिति में, वे आवेदिका के पति और गवाहों को लेकर पत्रकार के घर में घुस गईं।
शौचालय के पास झाड़ियां कटवाकर सबूत जुटाने का आरोप
मामले ने तब नया मोड़ लिया जब जांच अधिकारी पर यह आरोप लगा कि उन्होंने कथित रूप से सीसीटीवी कैमरे के एंगल को शौचालय की ओर दिखाने के लिए आवेदिका के पति से झाड़ियां और पेड़-पौधे कटवाए। आरोप है कि पुलिस यह साबित करना चाह रही थी कि पत्रकार ने परिवार और घर की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि शौचालय की रिकॉर्डिंग के लिए कैमरे लगाए थे।
इस घटनाक्रम का वीडियो फुटेज भी कथित तौर पर त्रिनेत्र में दर्ज हो गया है।
“भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ हमारी लड़ाई”
इस मामले पर जिला प्रेस क्लब अध्यक्ष एनिश पुरी गोस्वामी ने कहा—
“हमारी लड़ाई पुलिस प्रशासन, सरकार या भाजपा नेताओं से नहीं है। हमारी लड़ाई मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले की भ्रष्ट पुलिस व्यवस्था और षड्यंत्रकारी खाकी के खिलाफ है, जो ईमानदार सरकार की छवि को खराब कर रही है। पत्रकार केजन साहू और उनका परिवार राजनीतिक दबाव में रचे गए इस षड्यंत्र का शिकार हो रहा है।”
उन्होंने आगे कहा कि अगर उनके इस बयान को लेकर भी उन पर कोई मामला दर्ज किया जाता है, तब भी वे अपने साथी पत्रकार केजन साहू और उनके परिवार के साथ आखिरी दम तक खड़े रहेंगे।
सवालों के घेरे में पुलिस
जिस मामले में 107/16 की धारा लगे लगभग तीन माह बीते, उसी मामले में फिर से एफ.आई. आर. ?
क्या आयोग ने एस्ट्रोसिटी के तहत एफ.आई. आर. दर्ज करने को कहा था या फिर पंद्रह दिवस के अंदर सक्षम अधिकारी से जांच प्रतिवेदन की मांग की थी?
सांसद प्रतिनिधि राजू टंडिया ने कहा कि वीडियो के माध्यम से जानकारी मिली कि केजन साहू के घर पुलिस पहुंची थी और पत्रकारों का आरोप है कि सबूतों के साथ छेड़ छाड़ हो रहा है व उसके परिवार के खिलाफ भी एफ आई आर का मामला आ रहा है। भाजपा किसी भी अन्याय द्वेषपूर्ण कार्यवाही के विरोध में है जिले के किसी भी पत्रकार या नागरिक के खिलाफ द्वेषपूर्ण कार्यवाही होने नहीं देंगे।
क्या पूर्व में डीएसपी ने कैमरे की डीवीआर जब्त कर जांच की थी?
वर्तमान में डीएसपी के द्वारा झाड़ियां और पेड़-पौधे कटवाकर फोटो वीडियो बनाना उचित था?
पूर्व में डीएसपी नेहा पवार को जांच का जिम्मा मिला था उन्होंने कहा था आवेदिका रीना साकरे ने जाति के मामले में बढ़ा चढ़ा कर आवेदन देना और जो कि शौचालय का पानी निकासी और सीसीटीवी लगाने के मामले में आए दिन वाद विवाद होना पाया गया है।
वर्तमान में भी उक्त डीएसपी नेहा पवार को ही जांच का जिम्मा मिला है क्या एक ही मामले दो अलग अलग रिपोर्ट तैयार करेगी?
यह पूरा मामला अब जिलेभर में चर्चा का विषय बन गया है। सवाल यह है कि क्या सचमुच पुलिस राजनैतिक दबाव में काम कर रही है या निष्पक्ष काम कर रही है ?
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