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आर्थिक तंगी के बीच NEET की तैयारी, 362 अंक लाकर सरकारी मेडिकल कॉलेज में बनाई जगह

NBP NEWS/ मोहला, 30 अगस्त 
कहते हैं कि मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके हौसले मजबूत होते हैं। सीमित संसाधन, आर्थिक तंगी और ग्रामीण परिवेश के बावजूद एक होनहार छात्र ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर NEET जैसी कठिन परीक्षा में 362 अंक हासिल कर सरकारी मेडिकल कॉलेज में चयन प्राप्त किया है। इस सफलता ने न केवल उसके परिवार, बल्कि पूरे गांव में खुशी और गर्व का माहौल बना दिया है।

छात्रा निक्की पुरामें, पिता सुरेश कुमार पुरामें व माता चन्द्ररेखा पूरामे गांव लमती (देवरसुर) मोहला निवासी है। बताया गया कि छात्र ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव की प्राथमिक शिक्षा से शुरू की। इसके बाद माध्यमिक स्तर की पढ़ाई कन्या शिक्षा परिसर, अंबागढ़ चौकी से की। आगे की पढ़ाई के लिए उसे गांव से बाहर जाकर संघर्ष करना पड़ा। सीमित आर्थिक साधनों के बावजूद उसने पढ़ाई को अपनी प्राथमिकता बनाए रखा।

गरीबी बनी चुनौती, लेकिन हौसला नहीं टूटा

छात्र का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर बताया जा रहा है। पढ़ाई के लिए जरूरी संसाधन सीमित होने के बावजूद उसने परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। कठिन परिस्थितियों में लगातार पढ़ाई करते हुए उसने मेडिकल क्षेत्र में जाने का सपना देखा और NEET परीक्षा की तैयारी की।

NEET देश की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। ऐसे में ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधनों से आने वाले छात्र का इस परीक्षा में 362 अंक हासिल करना उसके संघर्ष और मेहनत को दर्शाता है।

सरकारी मेडिकल कॉलेज दंतेवाड़ा में चयन

छात्र की मेहनत का परिणाम तब सामने आया, जब उसका चयन शासकीय मेडिकल कॉलेज, दंतेवाड़ा में हुआ। मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का यह अवसर उसके और उसके परिवार के लिए बड़ी उपलब्धि है।

परिवार के लिए यह सफलता इसलिए भी खास है, क्योंकि आर्थिक परेशानियों के बीच बेटी की पढ़ाई जारी रखना आसान नहीं था। अब मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिलने के बाद परिवार और गांव के लोगों को उसके उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद है। गांव से अब एक डॉक्टर बनने जो जा रहा है।

गांव के बच्चों के लिए बनेगा प्रेरणा

इस छात्र की कहानी केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक तंगी या संसाधनों की कमी के कारण बड़े सपने देखने से भी हिचकते हैं।

गांव के लोगों का मानना है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और मेहनत लगातार जारी रखी जाए तो संसाधनों की कमी सफलता की राह में अंतिम बाधा नहीं बन सकती।

आज जिस छात्र ने कठिन परिस्थितियों के बीच NEET में अपना स्थान बनाया है, कल वही डॉक्टर बनकर अपने परिवार, गांव और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर सकता है।

यह कहानी बताती है—हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, मेहनत और हौसले के सामने मंजिल ज्यादा दूर नहीं होती।

इस मुकाम के लिए चंद्रशेखर मंडावी, सुरक्षा मंडावी, विनोद मांझी, शकुंतला नेताम, बसंत मांझी, हरिराम टेकाम, कन्हैया उइके, सुनीता जूरेशिया, रूपेंद्र और सर्व आदिवासी समाज की ओर से उनके उज्जवल भविष्य की कामना की गई है।

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