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कोरकोट्टी से नई कहानी! अब बंदूक नहीं, वर्दी का सपना देख रहे हैं युवा | Mohla News


NBP NEWS | मोहला /12 जुलाई 2026
प्रवेश कुमार: 12 जुलाई 2009... यह तारीख मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी के इतिहास में कभी न भरने वाला जख्म बनकर दर्ज है। कोरकोट्टी के जंगलों में हुए नक्सली हमले में तत्कालीन एसपी विनोद चौबे समेत 29 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। उस दौर में इस पूरे इलाके की पहचान गोलियों की आवाज, बारूदी सुरंगों और खौफ से होती थी।
लेकिन 17 साल बाद तस्वीर बदल चुकी है।

आज उसी इलाके में बंदूक उठाने की नहीं, वर्दी पहनने की होड़ दिखाई दे रही है। जिन गांवों में कभी सुरक्षाबलों के साथ खड़े होने से लोग डरते थे, वहां अब युवा सुबह-शाम मैदान में दौड़ लगाते नजर आते हैं। लक्ष्य सिर्फ एक—देश की वर्दी पहनकर सेवा करना।

ढाई साल...150 युवा...और बदलती सोच

पिछले करीब ढाई वर्षों में पुलिस और आईटीबीपी की संयुक्त पहल ने इलाके की दिशा बदलने का काम किया है। स्थानीय युवाओं को केंद्रीय सुरक्षा बलों, पुलिस और अन्य वर्दीधारी सेवाओं की भर्ती के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
करीब 150 युवाओं ने इस प्रशिक्षण का लाभ लिया, जिनमें से कई पैरामिलिट्री फोर्स, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और पुलिस में चयनित भी हुए हैं। यह सिर्फ रोजगार की कहानी नहीं, बल्कि उस मानसिक बदलाव की मिसाल है जिसने हिंसा की जमीन पर उम्मीद के बीज बो दिए।

कोरकोट्टी की बरसी...अब सिर्फ शहादत नहीं, बदलाव का प्रतीक

कोरकोट्टी बलिदान दिवस अब केवल शहीदों को श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं रह गया है। यह उस परिवर्तन की भी गवाही देता है, जहां कभी भय का राज था, वहां अब विश्वास का माहौल है। जहां संघर्ष की पहचान थी, वहां अब विकास की चर्चा है। और जहां बंदूकों की गूंज थी, वहां आज भर्ती मैदानों में युवाओं के कदमों की आवाज सुनाई देती है।
सिर्फ सुरक्षा नहीं...विकास भी बना बदलाव की वजह

बदलाव केवल सुरक्षा मोर्चे पर नहीं हुआ, बल्कि विकास की रफ्तार ने भी वनांचल की तस्वीर बदल दी।

नया जिला बनने के बाद प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 49.47 करोड़ रुपये की लागत से 310 किलोमीटर से अधिक लंबी 31 सड़क और पुल परियोजनाओं पर काम हुआ। इससे दूरस्थ आदिवासी गांव पहली बार सालभर सड़क संपर्क से जुड़े।

जल संसाधन विभाग ने 36.88 करोड़ रुपये की 14 सिंचाई परियोजनाएं शुरू कीं, जिनसे करीब 2,600 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा।

वहीं लोक निर्माण विभाग 321.92 करोड़ रुपये की 29 सड़क और भवन परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जबकि सेतु विभाग ने 53.85 करोड़ रुपये की लागत से 15 बड़े पुलों को स्वीकृति दी, जिनमें अधिकांश पूरे हो चुके हैं।

स्वास्थ्य, बिजली और बैंकिंग भी पहुंची जंगलों तक

सुरक्षा के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं का विस्तार भी तेजी से हुआ है।

सीजीएमएससी ने 56.82 करोड़ रुपये की लागत से 57 स्वास्थ्य अधोसंरचना परियोजनाएं शुरू कीं, जिनमें 53 पूरी हो चुकी हैं, जबकि 200 बिस्तरों वाला जिला अस्पताल निर्माणाधीन है।

बिजली व्यवस्था मजबूत करने के लिए 23 करोड़ रुपये की लागत से नए उपकेंद्र, ट्रांसफार्मर और विद्युत लाइन विस्तार किए गए।

बैंकिंग सेवाओं में भी बड़ा बदलाव आया। जिले का क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात 26 प्रतिशत से बढ़कर 35 प्रतिशत हो गया। बैंक शाखाओं की संख्या 30 से बढ़कर 35 हुई और 153 बैंक मित्रों के माध्यम से दूर-दराज के गांवों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचीं।

बदलाव की असली तस्वीर

कोरकोट्टी की शहादत ने इस क्षेत्र को दर्द दिया था, लेकिन उसी दर्द ने बदलाव की नींव भी रखी। आज मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की नई पहचान यह है कि यहां के युवा बंदूक की नली नहीं, बल्कि तिरंगे वाली वर्दी में अपना भविष्य देख रहे हैं।

यह सिर्फ विकास की कहानी नहीं, बल्कि उस विश्वास की वापसी है जिसने कभी भय के साये में जी रहे वनांचल को नई दिशा दी है।

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