जिला मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी के सर्व आदिवासी समाज, सांस्कृतिक, धार्मिक, कर्मचारी, युवा एवं जनसंगठनों ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री एवं संस्कृति मंत्री के नाम संयुक्त ज्ञापन कलेक्टर मोहला के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर शासकीय विद्यालयों में धार्मिक गतिविधियों को अनिवार्य किए जाने संबंधी आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 12 जून 2026 को जारी आदेश के तहत शासकीय विद्यालयों में प्रतिदिन प्रार्थना के दौरान "सरस्वती वंदना", "गुरु मंत्र", "गायत्री मंत्र" एवं "शांति मंत्र" जैसे धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन के निर्देश दिए गए हैं। संगठनों का आरोप है कि यह आदेश संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना, सांस्कृतिक विविधता तथा आदिवासी समुदायों के संवैधानिक अधिकारों के विपरीत है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि छत्तीसगढ़ एक बहुधार्मिक एवं बहुसांस्कृतिक राज्य है, जहां आदिवासी समाज की अपनी विशिष्ट धार्मिक मान्यताएं, परंपराएं एवं सांस्कृतिक पहचान है। ऐसे में किसी एक धार्मिक परंपरा से जुड़े मंत्रों एवं प्रार्थनाओं को शासकीय विद्यालयों में अनिवार्य करना संविधान के मूल सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
संगठनों ने अपने ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 25, 28, 29, 46 तथा पांचवीं अनुसूची सहित संयुक्त राष्ट्र के United Nations Declaration on the Rights of Indigenous Peoples (UNDRIP-2007) का हवाला देते हुए कहा है कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान को संरक्षण प्रदान किया जाना चाहिए।
प्रमुख मांगें
ज्ञापन में सरकार से निम्न मांगें की गई हैं—
12 जून 2026 के आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
शासकीय विद्यालयों में किसी भी धर्म, संप्रदाय अथवा पंथ विशेष की प्रार्थना, मंत्र या धार्मिक अनुष्ठान अनिवार्य न किए जाएं।
विद्यालयों में संचालित नैतिक शिक्षा एवं व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम संविधान, लोकतंत्र, समानता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं मानवीय मूल्यों पर आधारित हों।
आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्थानीय भाषाओं, संस्कृति, इतिहास एवं पारंपरिक ज्ञान को सम्मानजनक स्थान दिया जाए।
शिक्षा संबंधी नीतियों के निर्माण से पहले सभी समुदायों, शिक्षाविदों एवं आदिवासी प्रतिनिधियों से व्यापक परामर्श किया जाए।
कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि शासन द्वारा उक्त आदेश वापस नहीं लिया जाता है तो आदिवासी समाज एवं संबंधित संगठन संविधान के अनुच्छेद 32 एवं 226 के तहत उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर कर न्यायिक समीक्षा की मांग करेंगे। साथ बड़े स्तर पर आंदोलन और प्रदर्शन करेंगे।
संगठनों ने राज्य सरकार से संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना, सामाजिक समरसता तथा अनुसूचित जनजातियों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करते हुए विवादित आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
ज्ञापन पर विभिन्न आदिवासी सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर भी दर्ज हैं।
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