Ticker

6/recent/ticker-posts

Ad Code

मोहला में राजवाली माता - ‘हाथी गुड़ी’ मंदिर: परंपरा, आस्था और समृद्धि का अनोखा संगम

NBP NEWS/ मोहला,24 मार्च 2026 

मोहला मानपुर अं चौकी क्षेत्र की समृद्धि और खुशहाली की कामना से जुड़ी ऐतिहासिक आस्था का केंद्र ‘हाथी गुड़ी’ मंदिर आज भी लोगों के लिए विशेष श्रद्धा का स्थल बना हुआ है। वर्ष 2015 में स्थापित इस मंदिर का संबंध पानाबरस राज की प्राचीन परंपराओं से जुड़ा हुआ है, जहां हाथियों को समृद्धि और शक्ति का प्रतीक माना जाता था।

हाथी थान से मंदिर तक का सफर

युवराज लाल लक्ष्मेंद्र शाह पानाबरस राज ने बताया जाता है कि पानाबरस राज में 14 गढ़ और 360 परगना के अंतर्गत हाथी रखने की परंपरा प्रचलित थी। हाथी को मां दंतेश्वरी की सवारी के रूप में विशेष सम्मान दिया जाता था। जिस स्थान पर आज मंदिर स्थापित है, वहां पहले ‘हाथी थान’ हुआ करता था, जहां चार हाथियों को दफनाया गया था। यही कारण है कि इस स्थल को समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।

सपना बना आस्था का आधार

राज समिति के सदस्य केजू राम बोगा के अनुसार, चौदह गढ़ राजवाली माता मंदिर, जिसे ‘हाथी गुड़ी’ के नाम से जाना जाता है, उसकी स्थापना एक दिव्य संकेत के बाद हुई। पानाबरस राज के ठाकुर बिसनाथ ठाकुर को सपने में देवताओं के साथ विजयपुर स्थित दंतेश्वरी मंदिर जाते समय मोहला में हाथी द्वारा रास्ता रोके जाने का संकेत मिला।

जब इस विषय पर राज में बैठक बुलाई गई, तो मांझी, भूमिक और अन्य प्रमुखों से विचार-विमर्श किया गया। देव परामर्श में यह सामने आया कि मोहला में राजमाता का गुड़ी स्थल होने के बावजूद वहां विधिवत देव स्थापना नहीं की गई थी, जिससे देवता अप्रसन्न थे और प्रतीकात्मक रूप से हाथी रास्ता रोक रहा था।

सामूहिक निर्णय से बना मंदिर

इस संकेत को गंभीरता से लेते हुए भूमिक, ठाकुर और मांझी समाज ने मिलकर मंदिर निर्माण का निर्णय लिया। इसके बाद वर्ष 2015 में विधिवत देव स्थापना कर ‘हाथी गुड़ी’ मंदिर का निर्माण किया गया। तब से यहां नियमित पूजा-अर्चना की जा रही है।

नवरात्र में विशेष आस्था

मंदिर में हर वर्ष नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा और ज्योत प्रज्वलन किया जाता है। क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में यहां पहुंचकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मान्यता है कि यहां हाथियों की पूजा करने से क्षेत्र में खुशहाली और शांति बनी रहती है।

परंपरा और विश्वास का प्रतीक

‘हाथी गुड़ी’ मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का जीवंत उदाहरण भी है। पानाबरस राज की यह अनूठी परंपरा आज भी लोगों के विश्वास और एकजुटता को दर्शाती है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ