Ticker

6/recent/ticker-posts

Ad Code

गढ़चिरौली में माओवाद को बड़ा झटका: 11 वरिष्ठ कैडरों ने किया आत्मसमर्पण, 68 लाख का था इनाम

NBP NEWS/ गढ़चिरौली / मोहला 19 मार्च 2026
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में माओवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को एक बड़ी सफलता मिली है। गढ़चिरौली पुलिस और सीआरपीएफ के समक्ष 11 वरिष्ठ माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें डीवीसीएम, क्षेत्रीय समिति सचिव, पीपीसीएम, कमांडर और एसीएम रैंक के अनुभवी माओवादी शामिल हैं। इन पर सरकार द्वारा कुल 68 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में कई ऐसे कैडर हैं जो वर्षों से संगठन में सक्रिय रहकर विभिन्न गतिविधियों में शामिल रहे। इनके साथ अन्य सहयोगियों ने भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के नाम

आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों की पहचान इस प्रकार है: सोनी @ बाली वट्टे मट्टामी (डीवीसीएम – कुटुल एलओएस), उम्र 45 वर्ष, जिला नारायणपुर (छत्तीसगढ़)
बुदारी @ रामबट्टी अयातु मट्टामी (क्षेत्रीय समिति सचिव – इंद्रावती क्षेत्र समिति), उम्र 40 वर्ष, जिला बीजापुर (छत्तीसगढ़)
सुखलाल बोल्गा कोक्सा (कमांडर – वेस्ट ब्यूरो सप्लाई टीम), उम्र 31 वर्ष, जिला नारायणपुर (छत्तीसगढ़)
शांति @ सोमारी गंगा तेलमी (पीपीसीएम – वेस्ट ब्यूरो सप्लाई टीम), उम्र 28 वर्ष, जिला सुकमा (छत्तीसगढ़)
यामुनाक्का @ रुखमक्का पोट्टी पेंडम (एसीएम – भामरागढ़ एलओएस), उम्र 60 वर्ष, जिला गढ़चिरौली
गणेश उलेज कोवासी (सदस्य – कंपनी नंबर 10), उम्र 21 वर्ष, जिला गढ़चिरौली
मिनाको @ जमानी कार्या मट्टामी (सदस्य – कंपनी नंबर 10), उम्र 22 वर्ष, जिला कांकेर (छत्तीसगढ़)
धनु दसरू वेलंजे (सदस्य – कंपनी नंबर 10), उम्र 38 वर्ष, जिला गढ़चिरौली
सुनीता @ वंगे वट्टे होयम (सदस्य – सैंड्रा एलओएस), उम्र 25 वर्ष, जिला बीजापुर (छत्तीसगढ़)
रमेश पांडु मदवी (सदस्य – मोबाइल पॉलिटिकल स्कूल), उम्र 28 वर्ष, जिला सुकमा (छत्तीसगढ़)
किशोर सुकरिया वासम (मिलिशिया कमांडर – सैंड्रा एलओएस), उम्र 33 वर्ष, जिला बीजापुर (छत्तीसगढ़)

मोहला मानपुर जंक्शन में थी आमद
बस्तर और महाराष्ट्र गढ़चिरौली जिले के बीच में जंकशन का काम कर रही मोहला मानपुर जिले में भी था इन नक्सलियों का आना जाना। बरहाल अब मोहला मानपुर में भी छः नक्सली शेष बच गए है। हाल ही में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह ने प्रेस के माध्यम से मुख्य धारा में लौटने का अंतिम आह्वान किया है साथ ही उनकी सुरक्षा की गारंटी भी दी है।

माओवाद अब अंतिम चरण में

गढ़चिरौली में कभी माओवाद का व्यापक प्रभाव था और यह जिले के सभी 10 उप-विभागों में फैला हुआ था। लेकिन अब यह गतिविधियां सिमटकर केवल भामरागढ़ उप-विभाग के सीमावर्ती क्षेत्रों तक ही रह गई हैं। लगातार हो रही सख्त कार्रवाई और पुनर्वास नीति के चलते माओवादी संगठन कमजोर पड़ता जा रहा है।

आत्मसमर्पण नीति का असर

साल 2005 से महाराष्ट्र सरकार द्वारा लागू आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। इसी नीति के तहत अब तक 794 सक्रिय माओवादी गढ़चिरौली पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर चुके हैं। केवल वर्ष 2025 से अब तक 123 सशस्त्र माओवादी हथियार छोड़ चुके हैं।

बड़े नेताओं के सरेंडर से बढ़ा असर

पिछले वर्ष 15 अक्टूबर 2025 को माओवादी संगठन के शीर्ष नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति उर्फ सोनू सहित 61 वरिष्ठ कैडरों ने 54 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया था। इस घटना ने माओवादी नेटवर्क को गहरा झटका दिया। इसके बाद देशभर में 897 माओवादी कैडरों ने 545 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया है।

वर्षों से सक्रिय थे सरेंडर करने वाले

आत्मसमर्पण करने वाले कई माओवादी 2000 के दशक से संगठन में सक्रिय थे और समय-समय पर पदोन्नति पाकर उच्च जिम्मेदारियों तक पहुंचे। हालांकि इनके खिलाफ दर्ज अपराधों और हिंसक घटनाओं में संलिप्तता की पुष्टि अभी की जा रही है।

मुख्यधारा में लौटने की बढ़ती इच्छा

पुलिस का कहना है कि माओवादी संगठन के खोखले विचार और निर्दोष नागरिकों के खिलाफ हिंसा से कई कैडर निराश हो चुके हैं। यही कारण है कि अब बड़ी संख्या में माओवादी आत्मसमर्पण कर सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ ले रहे हैं।

निर्णायक मोड़ पर गढ़चिरौली

लगातार आत्मसमर्पण, सर्च ऑपरेशन और जनसहयोग के चलते गढ़चिरौली में माओवाद अब समाप्ति के कगार पर पहुंच गया है। सुरक्षा बलों का मानना है कि आने वाले समय में यह क्षेत्र पूरी तरह माओवादी मुक्त हो सकता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ