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आदिवासी बच्चों के नाम पर मिली राशि का लेखा जोखा अधूरा - अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष ने दिए जांच के संकेत

NBPNEWS/मोहला, 19 दिसंबर 2025
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के आदिवासी छात्रावासों और आश्रम-शालाओं की वित्तीय कार्यप्रणाली में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। मीडिया के अवलोकन में जिले के प्री-मैट्रिक आदिवासी कन्या-बालक छात्रावास एवं कन्या-बालक आश्रम-शालाओं से जुड़े कई वर्षों के वित्तीय दस्तावेज अधूरे, असंगत और अप्रमाणिक पाए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि 80 में से केवल 4 छात्रावास वार्डन ही दस्तावेजों के अवलोकन के दौरान उपस्थित हुए, जबकि शेष 76 वार्डन अनुपस्थित रहे।
मीडिया को मिली जानकारी के अनुसार, छात्रावासों को प्राप्त शिष्यवृत्ति राशि, त्योहारी अवकाशों (दशहरा, दीपावली, शीतकालीन अवकाश) के दौरान बची राशि और मासिक 15 प्रतिशत निधि से किए गए खर्चों के बिल-व्हाउचर कई सत्रों (2022-23, 2023-24 एवं 2024-25) के उपलब्ध नहीं कराए गए। कई मामलों में मूल वित्तीय अभिलेख प्रस्तुत ही नहीं किए गए, जिससे शासकीय राशि के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अवलोकन के दौरान यह भी सामने आया कि भोजन, आवश्यक सामग्री और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े खर्चों का स्पष्ट लेखा-जोखा नहीं है। आदिवासी छात्र-छात्राओं के नाम पर आवंटित शासकीय धनराशि के दुरुपयोग और बंदरबांट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
आयोग अध्यक्ष की प्रतिक्रिया

मीडिया में सामने आई खबरों को देखते हुए अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी ने मामले की जांच कराए जाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि विभागीय जानकारी लेकर कलेक्टर मोहला को आवश्यक जांच के आदेश देने पर विचार किया जाएगा। आयोग अध्यक्ष के इस बयान के बाद मामले में उच्च स्तरीय कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है।
जवाबदेही पर सवाल

सूत्रों का कहना है कि यदि दस्तावेज मौजूद हैं तो उन्हें समय पर प्रस्तुत क्यों नहीं किया गया और यदि उपलब्ध नहीं हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों व संस्था प्रभारियों की जवाबदेही अब तक तय क्यों नहीं हुई। इन अनियमितताओं को लेकर स्वतंत्र जिला स्तरीय जांच और विशेष ऑडिट की मांग उठने लगी है।
पहले भी उठ चुका है विवाद

सूत्र बताते हैं कि इससे पहले खैरागढ़ निवासी एक महिला सूचना कार्यकर्ता को कथित तौर पर शिकायत न करने के एवज में लगभग चार लाख रुपये का भुगतान किया गया था। मामला उजागर होने के बाद मोहला थाने में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसने पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है।

हॉस्टल-आश्रमों की वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सहायक आयुक्त संजय कुर्रे से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष सामने नहीं आ सका।

उठी प्रमुख जांच मांगें

🔴शिष्यवृत्ति राशि से किए गए खर्चों की जांच

🔴त्योहारी अवकाशों में बची राशि के उपयोग की पड़ताल

🔴15 प्रतिशत निधि से की गई खरीदी का सत्यापन
सरकारी छात्रावास केवल आवास की व्यवस्था नहीं, बल्कि आदिवासी बच्चों के भविष्य की आधारशिला होते हैं। ऐसे में मीडिया रिपोर्ट के बाद आयोग अध्यक्ष द्वारा जांच के संकेत से यह उम्मीद जगी है कि लापरवाही और गड़बड़ियों पर सख्त कार्रवाई होगी तथा बच्चों के हक की शासकीय राशि सुरक्षित की जा सकेगी।

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