छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और आदिवासी जननायक शहीद वीर नारायण सिंह की शहादत दिवस पर आज जिले में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। सर्व आदिवासी समाज जिला मोहला–मानपुर–अंबागढ़ चौकी के नेतृत्व में यह आयोजन गोंडवाना भवन मैदान, मोहला (थाना के पीछे) में संपन्न होगा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वीर नारायण सिंह के बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करना तथा आदिवासी समाज की ज्वलंत समस्याओं पर सामूहिक स्वर बुलंद करना है।
आयोजन के तहत क्षेत्रीय मुद्दों और अधिकारों को लेकर एक ज्ञापन रैली भी निकाली जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएँ, युवा और विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि यह रैली आदिवासी समुदाय की वर्तमान समस्याओं—वनाधिकार, जल–जंगल–जमीन, शिक्षा, रोजगार, संस्कृति संरक्षण और संवैधानिक अधिकारों—को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपेगी।
सर्व आदिवासी समाज द्वारा जारी आमंत्रण में कहा गया है कि—
“आप सभी सगा जनों से निवेदन है कि आज गांवों में पोलो मनाते हुए स्वयं साधन कर, प्रत्येक आदिवासी घर से महिला, युवा और पुरुष बड़ी संख्या में पहुँचकर शहादत दिवस कार्यक्रम को सफल बनाएं।”
समाज के प्रवक्ता रमेश हिडा़मे ने बताया कि यह आयोजन केवल एक स्मरण दिवस नहीं बल्कि आदिवासी समुदाय के एकजुट होने का अवसर है। उन्होंने कहा कि वीर नारायण सिंह की विरासत समाज को अन्याय और दमन के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देती है।
गौरतलब है कि वीर नारायण सिंह ने 1856–57 में अंग्रेजों और व्यापारी वर्ग द्वारा अन्न के कृत्रिम संकट के चलते भूख से जूझ रहे गरीबों की मदद के लिए अनाज वितरित किया था। उनके इस जनहितकारी कदम ने उन्हें छत्तीसगढ़ का पहला जनविद्रोही और आदिवासी समाज का गौरवशाली नायक बना दिया। 1857 में रायपुर में दी गई उनकी फाँसी आज भी छत्तीसगढ़ की स्वतंत्रता चेतना का प्रमुख अध्याय है।
वीर नारायण सिंह का जीवन हमें यह सीख देता है कि—
अन्याय के खिलाफ संगठित होकर खड़ा होना ही असली वीरता है।
समुदाय की भलाई के लिए संघर्ष करना ही जननायक होने का सार है।
अस्मिता, संस्कृति और अधिकार—इनकी रक्षा सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
कार्यक्रम को लेकर मोहला और आसपास के क्षेत्रों में उत्साह देखा जा रहा है। समाजजनों ने उम्मीद जताई है कि आज का आयोजन आदिवासी अस्मिता, अधिकार और एकता को नए आयाम देगा।
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