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मोहला–मानपुर में 12 दिसंबर को निकलेगा ‘माड़िया मार्च’ — संरक्षण–संवर्धन की मांग तेज

NBPNEWS/09 दिसंबर 2025 मोहला मानपुर 
जिले के 5वीं अनुसूचित आदिवासी बहुल क्षेत्रों में आदिवासी जननायकों, पुरखा देवी–देवताओं और सांस्कृतिक प्रतीकों की लगातार उपेक्षा ने समाज में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि आदिवासी नायकों व उनकी सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण पर गंभीर नहीं हैं।
आदिवासी विचारों पर आधारित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की धरती आबा ग्रामीण उत्कर्ष योजना तथा आदिकर्म योगी योजना का उद्देश्य आदिवासी संस्कृति, उद्यान, परंपराओं और पहचान को बढ़ावा देना है, लेकिन क्षेत्रीय प्रशासन की उदासीनता से यह योजनाएं जमीनी स्तर पर कमजोर पड़ती दिख रही हैं।

लालश्याम शाह महाराज — आदिवासी अस्मिता के जननायक, पर उपेक्षा जारी

मोहला–मानपुर क्षेत्र के महान जननायक, लालश्याम शाह न केवल आदिवासी नेतृत्व के प्रतीक थे, बल्कि जल–जंगल–जमीन के हक के लिए उन्होंने ऐतिहासिक संघर्ष किया। वे चिपको आंदोलन और आदिवासी अधिकार आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से रहे।
इतिहास में दर्ज है कि सांसद बनने के बाद मात्र 10 दिनों में उन्होंने आदिवासियों के हितों के लिए इस्तीफा दे दिया था।

प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समय, रायपुर आगमन के दौरान लगभग 40 हजार लोगों की विशाल पैदल यात्रा लालश्याम शाह के नेतृत्व में हुई थी, जिसके दबाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री को मंच पर आकर आदिवासियों से सीधे संवाद करना पड़ा।

आज भी क्षेत्र के लोग लालश्याम शाह महाराज को श्रद्धा से पूजते हैं। हाल ही में अंबागढ़ चौकी में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी अपने उद्बोधन की शुरुआत उन्हें नमन कर की थी।

किन्तु विडंबना यह है कि मानपुर में-दल्ली रोड स्थित उनकी मूर्ति कई महीनों से खंडित पड़ी है। न तो उनके नाम से वोट मांगने वाले जनप्रतिनिधियों ने और न ही जिला प्रशासन ने इसकी मरम्मत या सुरक्षा को लेकर कोई पहल की है। इससे क्षेत्रीय युवाओं और आदिवासी समुदाय में गहरा रोष है।

माड़िया मार्च का आह्वान — 12 दिसंबर को उठेगी आदिवासी अस्मिता की आवाज

आदिवासी संस्कृति में साढ़े 12 जातियों द्वारा पूजे जाने वाले माड़िया देव न्याय, अनुशासन और दुष्ट शक्तियों के दमन के प्रतीक माने जाते हैं। इसी परंपरा से प्रेरणा लेते हुए युवाओं ने प्रशासन को जागृत करने हेतु माड़िया मार्च निकालने का निर्णय लिया है।

यह मार्च 12 दिसंबर, शुक्रवार को मोहला में आयोजित होगा। आयोजन का उद्देश्य—

आदिवासी संस्कृति और देवी–देवताओं के संरक्षण की मांग

लालश्याम शाह महाराज की खंडित मूर्ति की तत्काल मरम्मत

सांस्कृतिक स्थलों को संरक्षित करने के लिए जिला प्रशासन को कार्रवाई हेतु बाध्य करना

अनुसूचित क्षेत्र में आदिवासी सम्मान और सुशासन सुनिश्चित करना


इस आंदोलन को लालश्याम शाह महाराज के पोते लाल लक्ष्मेंद्र शाह ने भी पूर्ण समर्थन दिया है और क्षेत्रवासियों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है।

समुदाय का संदेश — “सम्मान और संरक्षण जरूरी, अनदेखी नहीं”

आदिवासी समाज का कहना है कि यदि प्रशासन और जनप्रतिनिधि उनके नायकों, परंपराओं और सामाजिक पहचान की रक्षा नहीं करेंगे, तो यह उपेक्षा उनकी संस्कृति पर सीधा प्रहार है।

माड़िया मार्च के जरिए युवाओं का स्पष्ट संदेश है कि जननायकों और देवी–देवताओं का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और उनकी धरोहरों का संरक्षण करना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

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