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पत्रकार पर दोहरी एफआईआर – लोकतंत्र की आवाज दबाने की कोशिश?

NBPNEWS/मोहला/12 सितंबर 2025। चिल्हाटी थाना पुलिस पर मनमानी और राजनीतिक दबाव में कार्रवाई करने का आरोप लग रहा है। पत्रकार, उनकी बीमार पत्नी और वृद्ध पिता के खिलाफ तीन माह के भीतर एक ही प्रकरण में दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। इस कार्रवाई से जिलेभर के पत्रकारों में आक्रोश फैल गया है। प्रेस क्लब ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताया है, वहीं अब अधिवक्ता कादिर सिद्दकी ने भी मामले में पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
पहला मामला: जमीन विवाद से जुड़ा

कहाडकसा निवासी आंचलिक पत्रकार केजन साहू, उनकी पत्नी और 70 वर्षीय पिता के खिलाफ 20 जून 2025 को जमीन विवाद एवं पानी निकासी को लेकर एफआईआर दर्ज हुई थी। यह मामला डीएसपी की जांच रिपोर्ट के बाद प्रतिबंधात्मक धारा 107/16 के तहत दर्ज किया गया और न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था।
दूसरी एफआईआर: राजनीतिक दबाव का असर?

9 सितंबर 2025 की रात पत्रकार परिवार के खिलाफ उसी प्रकरण को आधार बनाकर दूसरी एफआईआर दर्ज की गई। इसमें जातिगत प्रताड़ना और गाली-गलौज के गंभीर आरोप लगाए गए। पत्रकारों का आरोप है कि यह पूरी तरह राजनीतिक दबाव में दर्ज किया गया मामला है।
अधिवक्ता कादिर सिद्दकी का बयान

अधिवक्ता कादिर सिद्दकी ने कहा कि यह पूरा मामला विरोधाभासी जांच और दबाव की देन है। उन्होंने बताया –
2023 में भी शिकायत और जांच:
केजन साहू के द्वारा 2023 में दो बार शिकायतें हुई थीं, जिनकी जांच भी हुई। पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई थी। जिसमें से एक बार पुलिस ने ‘फाइना काटी’ थी।
डीएसपी की पहली रिपोर्ट:
जांच में डीएसपी ने कहा था कि गांव में पार्टीबंदी है और लोग एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत करने पर उतारू रहते हैं। शांति भंग की आशंका को देखते हुए पुलिस ने प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की, जो फिलहाल तहसील न्यायालय में लंबित है।
दूसरी रिपोर्ट का विरोधाभास:
बाद में आयोग के माध्यम से फिर से जांच कराई गई, जिसमें समकक्ष डीएसपी ने अपराध घटित होना बताया। अधिवक्ता सिद्दकी ने कहा 

 "अगर अपराध घटित हुआ था तो पहले जांच करने वाले डीएसपी के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए कि उन्होंने केजन साहू को क्लीन चिट क्यों दी।"
कानूनी पहलू (BNS 257):
अधिवक्ता ने कहा कि BNS की धारा 257 के अनुसार अगर कोई लोकसेवक न्यायिक प्रकरण में जानते-बूझते विधि के विपरीत, भ्रष्ट या विद्वेषपूर्ण रिपोर्ट देता है, तो उसे सात साल तक की सजा हो सकती है।

 "इस केस में साफ तौर पर केजन साहू को फंसाया गया है। हम इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।"

आयोग की भूमिका:
उन्होंने कहा कि आयोग ने 15 दिन में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था, कहीं भी एफआईआर दर्ज करने का निर्देश नहीं था।

पत्रकारों के मामलों पर निर्देश:
अधिवक्ता सिद्दकी ने याद दिलाया कि पुलिस मुख्यालय से पहले ही निर्देश जारी है कि पत्रकारों के खिलाफ कोई भी शिकायत आती है तो विस्तृत जांच जरूरी है।
"जिस घटना में पहले से प्रतिबंधात्मक कार्यवाही हुई है, उसी मामले में दूसरे डीएसपी से जांच कर अपराध घटित होना बताया गया। आखिर सही कौन है?"

प्रेस क्लब का विरोध और आंदोलन की चेतावनी

जिला प्रेस क्लब अध्यक्ष एनिश पूरी गोस्वामी की अध्यक्षता में पत्रकारों ने आपात बैठक कर इस पूरे घटनाक्रम को षड्यंत्र करार दिया और कहा कि यदि शासन-प्रशासन निष्पक्ष जांच कर आरोप वापस नहीं लेता तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा।

थाना प्रभारी का बयान

चिल्हाटी थाना प्रभारी सजय मरावी ने स्वीकार किया कि दूसरी एफआईआर दर्ज करने के पीछे वरिष्ठ अधिकारियों का दबाव था।

 "वरिष्ठ अधिकारी थाने में बैठे थे। उनके कहने पर ही एफआईआर दर्ज करनी पड़ी।"


निष्कर्ष

पत्रकार परिवार के खिलाफ एक ही प्रकरण में दो एफआईआर दर्ज होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अधिवक्ता कादिर सिद्दकी के कानूनी तर्कों और प्रेस क्लब की चेतावनी के बाद अब यह मामला केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोकतांत्रिक स्वतंत्रता और निष्पक्ष न्याय व्यवस्था की कसौटी पर आ गया है।

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