मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला पंचायत में अध्यक्ष नम्रता सिंह के खिलाफ शुरू हुई सियासी उठापटक में अब नया मोड़ आ गया है। मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के समझाइश और चेतावनी से जिला पंचायत अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले सदस्यों ने अपना प्रस्ताव वापस लेने का निर्णय लिया है।
इस संबंध में जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन एवं रचनात्मक सलाह पर जिला पंचायत के सदस्यों ने एकजुट होकर क्षेत्र के विकास के लिए काम करने का संकल्प लिया है। इस घटनाक्रम के बाद जिले की राजनीति में पिछले कई दिनों से जारी खींचतान पर फिलहाल विराम लगता दिखाई दे रहा है।
अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव से गरमाई थी राजनीति
गौरतलब है कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला पंचायत में अध्यक्ष नम्रता सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की पहल के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई थी। पूर्व में सदस्यों ने कलेक्टर को अविश्वास प्रस्ताव लाने हेतु ज्ञापन सौंपा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव से मुलाकात के साथ साथ गृह मंत्री विजय शर्मा से मुलाकात कर अपनी अपनी बाते रखे थे। जिसके सूबे के मुख्यमंत्री से मुलाकात करने का इंतजार किया जा रहा था।
जिला पंचायत के भीतर अध्यक्ष के नेतृत्व को लेकर उठे सवालों ने स्थानीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी थी। खास बात यह थी कि अध्यक्ष के खिलाफ लामबंद सदस्यों के राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर भी चर्चाएं हो रही थीं।
इस घटनाक्रम ने जिला पंचायत के कामकाज और संगठन के भीतर आपसी तालमेल को लेकर सवाल खड़े किए थे। अध्यक्ष के खिलाफ सदस्यों की गोलबंदी के बाद इस बात पर सबकी नजरें थीं कि नम्रता सिंह का इस्तीफा नहीं होने पर सदस्य अपनी अपनी इस्तीफा देने कि बात किए थे।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के मार्गदर्शन के बाद बदला घटनाक्रम
आखिरकार 10 अक्टूबर 2026 को सदस्यों ने सूबे के मुख्य से मुलाकात की और अपनी बाते रखी जहां मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के कुशल मार्गदर्शन एवं रचनात्मक सलाह पर जिला पंचायत मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी के सभी सदस्यों ने एकजुट होकर क्षेत्र के विकास में काम करने का निर्णय लिया है।
सदस्यों ने उकताशय की पुष्टि कर बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव से और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के समझाइश के बाद सदस्यों ने प्रस्ताव को वापिस लेने में हामी भरी। सदस्यों के अनुसार मुख्यमंत्री ने अध्यक्ष नम्रता सिंह को व्यवहार सुधारने की हिदायत दी अन्यथा छः माह में अध्यक्ष पद से हटाने की चेतावनी भी दी।
इस मुलाकात और चर्चा को जिला पंचायत के भीतर चल रहे विवाद को सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक में भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी भी रहे मौजूद
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के साथ हुई महत्वपूर्ण मुलाकात एवं चर्चा में भाजपा के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
इनमें जिला भाजपा अध्यक्ष दिलीप वर्मा, जिला भाजपा प्रभारी देवदत्त ठाकुर, संभाग प्रभारी जगनाथ पाणिग्रही, जिला भाजपा उपाध्यक्ष विजय जैन एवं रेणु टांडिया, वरिष्ठ भाजपा नेता मदन साहू और खोराबाहरा यादव ,मंडल भाजपा अध्यक्ष प्रकाश मिश्रा, कमल टांडिया, संदीप साहू, अमित श्रीवास्तव, आशीष देवी, चंदन उपाध्याय तथा जिला भाजपा कोषाध्यक्ष राजू जैन (गुजराती) के नाम शामिल हैं।
भाजपा पदाधिकारियों की मौजूदगी को इस पूरे घटनाक्रम में संगठनात्मक स्तर पर हस्तक्षेप और आपसी सहमति बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
सहमत आठ जिला पंचायत सदस्यों के नाम
प्रेस विज्ञप्ति में सहमति जताने वाले अध्यक्ष एवं सदस्यों की सूची भी जारी की गई है। इसमें जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह के साथ सदस्य नरसिंह भंडारी, रेखा कोठारी, भोजेश शाह, लखन कलामे, सविता शोरी, शांति त्रिपुरी और नेहरू रजक के नाम दर्ज हैं।
अब अध्यक्ष के सामने संगठन और विकास की चुनौती
अविश्वास प्रस्ताव वापस लेने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह को फिलहाल राहत मिलती दिखाई दे रही है। लेकिन इस घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला पंचायत के भीतर पहले जैसी राजनीतिक खींचतान समाप्त हो जाएगी और सभी सदस्य वास्तव में एकजुट होकर काम कर पाएंगे?
अविश्वास प्रस्ताव वापस लेना एक राजनीतिक घटनाक्रम है, जबकि जिला पंचायत के कामकाज में आपसी समन्वय बनाए रखना एक अलग चुनौती होगी। अब अध्यक्ष और सदस्यों के सामने क्षेत्र के विकास कार्यों, ग्रामीण समस्याओं के समाधान और पंचायत से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित करने की जिम्मेदारी होगी।
फिलहाल, अध्यक्ष नम्रता सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव वापस लेने की घोषणा ने जिले की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। अब देखना होगा कि यह सहमति जिला पंचायत में स्थायी एकजुटता का आधार बनती है या आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरण फिर बदलते हैं।
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