पांचवीं अनुसूची क्षेत्र मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह के खिलाफ चल रही अविश्वास प्रस्ताव की कवायद अब जिला स्तर से निकलकर प्रदेश की राजनीति तक पहुंच गई है। अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले आठ जिला पंचायत सदस्य अपने फैसले पर अडिग हैं। सदस्यों ने अब अध्यक्ष के इस्तीफे अथवा जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए पुनः मतदान कराने की मांग प्रदेश संगठन और सरकार के वरिष्ठ नेताओं के सामने रखी है।
विरोधी सदस्यों ने अपनी लड़ाई को पानाबरस राज के जमींदार एवं आदिवासी नेता लाल श्याम शाह की विचारधारा और संघर्ष से जोड़ते हुए कहा है कि जिस तरह लाल श्याम शाह ने आदिवासी समाज के अधिकार और अस्मिता के मुद्दे पर सांसद पद से इस्तीफा दिया था, उसी तरह वे भी अपने हक और क्षेत्र की जनता के अधिकारों की लड़ाई के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। सदस्यों ने यहां तक कहा है कि यदि उनकी मांगों पर निर्णय नहीं हुआ तो वे अपने जिला पंचायत सदस्य पदों से इस्तीफा देने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
इस बीच सर्व आदिवासी समाज की ओर से भी नम्रता सिंह के विरोध में खड़े जिला पंचायत सदस्यों को समर्थन दिए जाने की बात सामने आई है, जिससे यह पूरा विवाद और अधिक राजनीतिक एवं सामाजिक रूप लेता दिखाई दे रहा है।
कलेक्टर को सौंपा था हस्ताक्षरित आवेदन
जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले सभी प्रायः सदस्य भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं। बीते गुरुवार को इन सदस्यों ने जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट पहुंचकर अध्यक्ष को पद से हटाने की मांग को लेकर हस्ताक्षरित आवेदन कलेक्टर तनुजा सलाम को सौंपा था।
इसके बाद मामला पार्टी के प्रदेश संगठन तक पहुंचा। शनिवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने जिला पंचायत सदस्यों से मुलाकात की और अलग-अलग उनकी बातें सुनीं।
सदस्यों का दावा है कि उन्होंने पिछले करीब छह माह से जिला पंचायत में चल रहे विवाद और अपनी समस्याओं की जानकारी प्रदेश संगठन को लगातार दी थी। उनका कहना है कि जिला भाजपा अध्यक्ष से लेकर प्रभारी संगठन मंत्री तक कई बार शिकायत और जानकारी दी गई, लेकिन जब उन्हें लगा कि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है और स्थिति नियंत्रण से बाहर जा रही है, तब उन्होंने अध्यक्ष के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलने का फैसला लिया।
प्रदेश अध्यक्ष के सामने रखी अपनी बात
सदस्यों के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष के सामने उन्होंने जिला पंचायत में कथित तौर पर उपेक्षा, निर्णय प्रक्रिया में पर्याप्त भागीदारी नहीं मिलने और अपने निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े मामलों में जानकारी नहीं दिए जाने की शिकायतें रखीं।
सदस्यों का दावा है कि प्रदेश अध्यक्ष ने उनकी बात गंभीरता से सुनी और अध्यक्ष नम्रता सिंह से भी जवाब लिया। सदस्यों के अनुसार, इस दौरान अध्यक्ष को यह भी कहा गया कि यदि वह आठ जिला पंचायत सदस्यों के साथ समन्वय नहीं बना पा रही हैं तो पूरे जिला पंचायत का संचालन कैसे करेंगी।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अध्यक्ष नम्रता सिंह का विस्तृत पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
गृह मंत्री विजय शर्मा के सामने भी पहुंचा विवाद
शनिवार के बाद रविवार को जिला पंचायत सदस्य प्रदेश के गृह मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री विजय शर्मा से मुलाकात करने पहुंचे। सदस्यों के मुताबिक गृह मंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी आठ सदस्यों से अलग-अलग, एक-एक करके बंद कमरे में मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं।
सदस्यों ने प्रभारी मंत्री के सामने कई गंभीर आरोप और शिकायतें रखीं।
उनका आरोप है कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों में होने वाले प्रशासनिक कार्यक्रम, शिलान्यास और उद्घाटन जैसे कार्यक्रमों की जानकारी कई बार उन्हें नहीं दी जाती। कुछ अवसरों पर मंच पर भी उन्हें उचित स्थान नहीं मिलने की शिकायत सदस्यों ने की।
ठेकेदारों के काम की जानकारी नहीं देने का आरोप
सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों में दूसरे क्षेत्रों के ठेकेदारों द्वारा कराए जा रहे कार्यों की जानकारी उन्हें नहीं मिलती।
सदस्यों के अनुसार बालोद और गुंडरदेही क्षेत्र से जुड़े ठेकेदारों द्वारा उनके निर्वाचन क्षेत्रों में काम किए जाने की जानकारी भी उन्हें कई बार नहीं होती। जब इस संबंध में अध्यक्ष से जानकारी मांगी जाती है तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिलने का आरोप सदस्यों ने लगाया।
सदस्यों का कहना है कि जिला पंचायत अध्यक्ष होने के नाते मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, अन्य मंत्रियों, कलेक्टर और जिला पंचायत CEO जैसे अधिकारियों से होने वाली महत्वपूर्ण बैठकों और मुलाकातों में भी उन्हें साथ नहीं ले जाया जाता।
'आपका वोट नहीं मिलता' कहने का लगाया आरोप
खुज्जी विधानसभा क्षेत्र से जुड़े जिला पंचायत सदस्यों ने प्रभारी मंत्री के सामने कथित तौर पर यह शिकायत भी रखी कि अध्यक्ष द्वारा उनके विधानसभा क्षेत्र को लेकर भेदभावपूर्ण टिप्पणी की जाती है।
सदस्यों का दावा है कि उन्हें कथित तौर पर यह कहा गया कि उनका क्षेत्र अध्यक्ष के विधानसभा क्षेत्र में नहीं आता और वहां से वोट भी नहीं मिलता, इसलिए वहां काम क्यों दिया जाए।
यह आरोप फिलहाल सदस्यों के दावे के रूप में सामने आया है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
धमकी देने के आरोप, भावुक हुए सदस्य
गृह मंत्री के सामने अपनी बात रखते हुए कुछ जिला पंचायत सदस्य भावुक भी हुए। सदस्यों ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष द्वारा जानकारी लेने या काम से संबंधित मांग करने पर कथित तौर पर उन्हें परिवार से संबंधित धमकियां दी जाती हैं।
इन गंभीर आरोपों को लेकर भी अध्यक्ष नम्रता सिंह का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
नम्रता सिंह के इस्तीफे या पुनः मतदान की मांग
जिला पंचायत सदस्यों ने प्रभारी मंत्री विजय शर्मा के सामने अपनी मांग स्पष्ट करते हुए कहा कि या तो नम्रता सिंह अध्यक्ष पद से इस्तीफा दें या फिर अध्यक्ष पद के लिए दोबारा मतदान कराया जाए।
सदस्यों ने कथित तौर पर यह भी कहा कि यदि पुनः मतदान की प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता या हेरफेर की कोशिश होती है तो सभी आठ सदस्य अपने जिला पंचायत सदस्य पदों से इस्तीफा देने पर विचार करेंगे।
आमने-सामने बैठाए गए दोनों पक्ष
सदस्यों के अनुसार, उनकी अलग-अलग बातें सुनने के बाद गृह मंत्री विजय शर्मा ने नम्रता सिंह और सभी जिला पंचायत सदस्यों को एक साथ बैठाकर बातचीत की। इस दौरान जिला भाजपा अध्यक्ष दिलीप वर्मा और राजू टंडिया की मौजूदगी की बात भी सामने आई है।
सदस्यों के मुताबिक गृह मंत्री ने अध्यक्ष से अपनी गलती स्वीकार करने और सभी सदस्यों से माफी मांगने को कहा। सदस्यों का दावा है कि नम्रता सिंह ने माफी भी मांगी, लेकिन लंबे समय से नाराज चल रहे सदस्यों ने उनकी माफी स्वीकार नहीं की और अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग पर कायम रहे।
अब मुख्यमंत्री के फैसले पर टिकी निगाहें
मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्री एवं प्रभारी मंत्री विजय शर्मा ने सभी सदस्यों की मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात कराने की बात कही है। सदस्यों के अनुसार अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री के स्तर पर होने की उम्मीद है।
फिलहाल मुख्यमंत्री के सिंगापुर प्रवास पर होने के कारण सदस्यों की मुख्यमंत्री से मुलाकात मंगलवार या बुधकर को प्रस्तावित बताई जा रही है। इस मुलाकात में सदस्य पूरे घटनाक्रम और अपनी शिकायतों को मुख्यमंत्री के सामने रखेंगे।
जिला अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर भी उठाए सवाल
विवाद के बीच पूर्व में जिला भाजपा अध्यक्ष के पद पर रहे नम्रता सिंह को लेकर भी सदस्यों ने पार्टी नेतृत्व के सामने सवाल उठाए हैं। सदस्यों का दावा है कि भाजपा में जिला अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी को लेकर उम्र 45 से 60 वर्ष और संगठनात्मक अनुभव से संबंधित पार्टी की स्थापित प्रक्रिया रही है, लेकिन तत्कालीन 42 वर्षीय नम्रता सिंह को जिला अध्यक्ष पद का दायित्व दिए जाने को भी संगठन के नीति के विपरीत जाकर एक व्यक्ति को पूर्व में लाभ दिलाने का कार्य किए जाने का हवाला दिए।
हालांकि, उम्र सीमा और पार्टी की आधिकारिक नीति को लेकर सदस्यों द्वारा किए गए इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। पार्टी की ओर से इस संबंध में आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।
लाल श्याम शाह की विरासत का हवाला, अब आर-पार की लड़ाई
पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश यह है कि आठों सदस्य अब इसे केवल जिला पंचायत के भीतर का विवाद नहीं मान रहे हैं। वे इसे अपने निर्वाचन क्षेत्रों के अधिकार, आदिवासी समाज की अस्मिता और जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं।
सदस्यों ने लाल श्याम शाह के संघर्ष का हवाला देते हुए संकेत दिया है कि वे अपने राजनीतिक पदों की चिंता किए बिना अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ेंगे।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद इस राजनीतिक विवाद का पटाक्षेप किस रूप में होता है?
क्या नम्रता सिंह अध्यक्ष पद से इस्तीफा देंगी?
क्या जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए दोबारा मतदान होगा?
या फिर आठों जिला पंचायत सदस्य अपने इस्तीफे के ऐलान पर आगे बढ़ेंगे?
इन सभी सवालों का जवाब अब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ होने वाली मुलाकात और उसके बाद पार्टी संगठन के फैसले पर टिका हुआ है। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की जिला पंचायत का यह विवाद अब स्थानीय राजनीति से निकलकर प्रदेश स्तर के राजनीतिक फैसले की ओर बढ़ चुका है।
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