भारत सरकार की RAMP (Raising and Accelerating MSME Performance) योजना के अंतर्गत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए वैकल्पिक वित्तपोषण के विभिन्न माध्यमों को लेकर भावसार फाउंडेशन द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन 7 सितंबर 2026 को चैंबर ऑफ कॉमर्स, दुर्ग में किया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य छोटे एवं मध्यम उद्योगों, स्टार्टअप्स तथा अन्य MSMEs को पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली के अलावा उपलब्ध वित्तीय विकल्पों की जानकारी देना और उन्हें आधुनिक वित्तीय व्यवस्थाओं से जोड़ने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करना रहा।
पारंपरिक बैंक ऋण के अलावा वित्तीय विकल्पों पर जोर
कार्यशाला में बताया गया कि कई बार छोटे उद्योगों और व्यवसायों को पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से अपेक्षित वित्तीय सहायता प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में वैकल्पिक वित्तपोषण के विभिन्न माध्यम व्यवसायों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
RAMP योजना के तहत MSMEs के लिए पारंपरिक बैंक ऋणों के अलावा वित्त के अन्य आधुनिक स्रोतों तक पहुंच को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य उद्यमों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ उनके विकास और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ावा देना है।
कार्यशाला में इन प्रमुख विषयों पर हुई चर्चा
कार्यशाला के दौरान वैकल्पिक वित्तपोषण से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रतिभागियों को जानकारी दी गई। इनमें प्रमुख रूप से—
- प्राप्य वित्तपोषण बाजार (Receivables Financing Market) को मजबूत करना
- भुगतान में होने वाली देरी को कम करना
- नए वित्तीय स्रोतों तक MSMEs की पहुंच बढ़ाना
- क्रेडिट गारंटी एवं जोखिम सहभाजन (Credit Guarantee & Risk Sharing)
- हरित परिवर्तन (Greening of MSMEs) के लिए वित्तीय सहायता
जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
वित्तीय विशेषज्ञ अरिहंत बोथरा ने किया उन्मुखीकरण
कार्यशाला में वित्तीय विशेषज्ञ अरिहंत बोथरा ने प्रतिभागियों को वैकल्पिक वित्तपोषण और वित्तीय व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों को उपलब्ध वित्तीय विकल्पों, आवश्यक प्रक्रियाओं तथा वित्तीय व्यवस्था से जुड़ने के लिए जरूरी दस्तावेजों की तैयारी के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने वैकल्पिक वित्तपोषण से संबंधित विभिन्न सवाल भी रखे। विशेषज्ञ ने उनके सवालों का जवाब देते हुए वित्तीय व्यवस्था को समझने तथा उपलब्ध विकल्पों का उचित तरीके से उपयोग करने के लिए आवश्यक जानकारी साझा की।
उद्योगपतियों, अधिकारियों और वित्तीय संस्थाओं की रही सहभागिता
कार्यशाला में छोटे एवं मध्यम उद्योगों से जुड़े उद्योगपति, संबंधित अधिकारी तथा वित्तीय संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को वित्तीय क्षेत्र में उपलब्ध विभिन्न विकल्पों की जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें आवश्यक दस्तावेज तैयार कर वित्तीय व्यवस्थाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यशाला के अंत में आयोजकों द्वारा कार्यक्रम में शामिल सभी प्रतिभागियों, अधिकारियों, वित्तीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों एवं विशेषज्ञों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। महत्वपूर्ण सहभागिता और सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए एक दिवसीय कार्यशाला का सुचारु रूप से समापन किया गया।
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