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जिला मुख्यालय में ‘दिया तले अंधेरा’! ग्रामीणों ने बनाई दूरी, स्कूली बच्चों के सहारे हुआ ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम

NBP NEWS/ मोहला | 18 सितंबर 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर को देशभर में आयोजित किए गए ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम के तहत जिला मुख्यालय मोहला में भी कलेक्टर तनुजा सलाम के नेतृत्व में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की कई दिनों से तैयारियां चल रही थीं और इसे लेकर प्रशासन एवं संबंधित विभागों की ओर से व्यापक स्तर पर आयोजन की तैयारी की गई थी। हालांकि, कार्यक्रम के दौरान आम ग्रामीणों और नागरिकों की अपेक्षित मौजूदगी नजर नहीं आई। जिले में 1 लाख 25 हजार दीपक और जिला मुख्यालय में 21 हजार दीपक जलाए गए थे।

कार्यक्रम में लोकसभा क्षेत्र के सांसद संतोष पांडे पहुंचे और एक दीप जलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए आशीर्वाद व्यक्त किया। इसी अवसर पर ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शुरुआत भी की गई। अभियान के माध्यम से सरकार की विभिन्न योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने और लोगों को योजनाओं से जोड़ने का संदेश दिया गया।

लेकिन जिस आम जनता तक योजनाओं को पहुंचाने की बात कही जा रही थी, वही कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में नजर नहीं आई। कार्यक्रम में मौजूद लोगों की संख्या को लेकर सवाल उठे। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी रही कि यदि स्कूली बच्चों की मौजूदगी नहीं होती तो कार्यक्रम में उपस्थित लोगों की संख्या काफी कम रह जाती।

दोपहर से पहुंचे बच्चे, घंटों किया इंतजार

कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे दोपहर करीब 3-4 बजे से ही स्कूल ग्राउंड पहुंचने लगे थे। बच्चों ने कार्यक्रम की तैयारियों में भी सहभागिता की और शाम करीब 7 बजे दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

बताया गया कि सांसद संतोष पांडे के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने में समय लगने के कारण बच्चों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान बच्चों को कथित तौर पर नाश्ता, चाय-बिस्किट अथवा स्वल्पाहार नहीं मिला। कुछ विद्यार्थियों ने बताया कि पानी और खाने-पीने की चीजें उन्हें अपने पैसे से खरीदनी पड़ीं।

कार्यक्रम समाप्त होने के बाद बच्चे धीरे-धीरे वापस लौटने लगे। कुछ विद्यार्थियों के अनुसार, उन्हें करीब साढ़े आठ बजे के बाद घर जाने का अवसर मिला।

जिला मुख्यालय के प्राइमरी इंग्लिश मीडियम स्कूल मोहला में भी आशीर्वाद का दिया जला लेकिन जिस विद्यालय में दिया जला लेकिन शिक्षा के नाम पर अंधेरा छाया हुआ है। चुकी बोर्ड कक्षा पांचवीं और अन्य कक्षाओं के बच्चो को अब तक पुस्तके नहीं मिल पाई है। ऐसे में बच्चे अपने भविष्य का दीपक कैसे जलाएंगे।

बाहर गांव से पढ़ने आए विद्यार्थियों को बस छूटने के बाद करना पड़ा इंतजार

कार्यक्रम में शामिल विद्यार्थियों में ऐसे छात्र-छात्राएं भी थे, जो आसपास के गांवों से जिला मुख्यालय में पढ़ने आते हैं। देर होने के कारण कुछ विद्यार्थियों की नियमित बस छूट गई। इसके बाद उन्हें घर लौटने के लिए वैकल्पिक साधनों का इंतजार करना पड़ा।

बताया गया कि कुछ विद्यार्थियों ने बाइक आदि की व्यवस्था कर घर वापसी की। इनमें छात्राएं भी शामिल थीं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि कार्यक्रम देर रात तक चलता है और बाहर गांव से आए विद्यार्थियों की वापसी की व्यवस्था नहीं हो पाती है, तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी?

विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें कार्यक्रम के दौरान स्वल्पाहार और पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं कराया गया तथा उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ा।

शिक्षकों को लेकर भी उठे सुरक्षा के सवाल

जिला स्तर के कार्यक्रम के साथ ही जिले के स्कूलों और गांवों में भी शाम करीब 7 बजे ‘आशीर्वाद का दिया’ जलाने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है।

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के कई इलाके भौगोलिक रूप से दुर्गम हैं। ऐसे क्षेत्रों में कई शिक्षक पगडंडी, जंगल और नदी-नालों के रास्ते कई किलोमीटर की दूरी तय कर स्कूलों तक पहुंचते हैं। ऐसे में शाम के समय दीप प्रज्वलन के बाद वापस लौटने के दौरान शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई दुर्गम गांवों में स्कूलों के स्थानीय कर्मचारी, चपरासी या शाला समिति के सदस्यों के माध्यम से भी कार्यक्रम कराया जा सकता था। ऐसे में शिक्षकों को रात में लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता क्यों पड़ी, यह सवाल भी उठाया जा रहा है।

औंधी क्षेत्र में वन्यजीवों के खतरे के बीच रात में आवाजाही पर सवाल

विशेष रूप से औंधी क्षेत्र में वन्यजीवों की मौजूदगी और बाघ देखे जाने की घटनाओं के बीच रात के समय शिक्षकों की आवाजाही को लेकर चिंता जताई जा रही है। ग्रामीण इलाकों में लोग पहले से ही वन्यजीवों को लेकर सतर्क रहते हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि यदि किसी दुर्गम क्षेत्र में दीप प्रज्वलन के बाद वापस लौटते समय किसी शिक्षक या कर्मचारी के साथ कोई अप्रिय घटना घटती, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती?

सांसद ने गिनाईं सरकार की योजनाएं, लेकिन आम जनता की मौजूदगी रही सवालों के घेरे में

कार्यक्रम में सांसद संतोष पांडे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के कार्यों और विभिन्न योजनाओं का उल्लेख किया तथा सरकार की उपलब्धियों को जनता के सामने रखा।

वहीं दूसरी ओर, कार्यक्रम का उद्देश्य आम लोगों को सरकार की योजनाओं से जोड़ना बताया गया, लेकिन जिला मुख्यालय के कार्यक्रम में आम नागरिकों की सीमित मौजूदगी ने आयोजन की व्यवस्थाओं और जनभागीदारी पर सवाल खड़े कर दिए।

एक ओर सरकार ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से जनता तक पहुंचने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिला स्तरीय आयोजन में आम ग्रामीणों की कम भागीदारी चर्चा का विषय बन गई।

प्रशासन से उठे ये सवाल

- क्या कार्यक्रम में शामिल होने वाले स्कूली बच्चों के लिए भोजन, पानी और स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई थी?
- यदि व्यवस्था की गई थी तो बच्चों तक वह क्यों नहीं पहुंची?
- बाहर गांव से आए विद्यार्थियों की देर रात वापसी की जिम्मेदारी किसकी थी?
- क्या कार्यक्रम के समय और विद्यार्थियों की वापसी को ध्यान में रखते हुए परिवहन की व्यवस्था की गई थी?
- दुर्गम एवं वन क्षेत्र के गांवों में रात के समय शिक्षकों की सुरक्षा के लिए क्या कोई विशेष व्यवस्था की गई थी?
- क्या स्थानीय शाला समिति या अन्य स्थानीय प्रतिनिधियों के माध्यम से दीप प्रज्वलन कराया जा सकता था?
- यदि किसी शिक्षक, छात्र या छात्रा के साथ देर रात लौटते समय कोई अप्रिय घटना होती, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती?

‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम का उद्देश्य प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर जनभागीदारी और सेवा भावना का संदेश देना था। लेकिन मोहला में ग्रामीणों की सीमित मौजूदगी, स्कूली बच्चों के लंबे इंतजार, स्वल्पाहार-पानी की कथित अनुपलब्धता और देर रात विद्यार्थियों की घर वापसी तथा दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल अब आयोजन की व्यवस्थाओं पर चर्चा का विषय बन गए हैं।

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