परमाह मुदिया पेन कड़ा में 7 कुण्डा, 7 मंडा और 14 भाई भूमकाल पुनंग तिदना का आयोजन; पुरखा देव, पेन शक्ति और प्रकृति के प्रति आस्था के साथ निभाई गईं पारंपरिक सेवा-अर्जि की रस्में
NBP NEWS / मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी | 16 सितंबर 2026
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी। जिले के मानपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम हलांजुर स्थित परमाह मुदिया पेन कड़ा में पारंपरिक आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकजुटता का भव्य संगम देखने को मिला। यहां 7 कुण्डा, 7 मंडा, 14 भाई भूमकाल पुनंग तिदना एवं पुनंग पंडुम (नवा खाई) पर्व धूमधाम और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से पहुंचे सगा समाज के करीब 5 हजार से अधिक लोगों की मौजूदगी ने पूरे आयोजन को भव्य स्वरूप प्रदान किया।
पारंपरिक सेवा-अर्जि के साथ पुरखा देव और प्रकृति शक्ति की आराधना
पुनंग पंडुम पर्व के दौरान सगा समाज की पारंपरिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों का विधिवत निर्वहन किया गया। समाजजनों ने पुरखा देव, पेन शक्ति और प्रकृति के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए सेवा-अर्जि, बाल नेंग एवं जीव सेवा की परंपराएं निभाईं। फसल की पहली बाली को पुरखा देव को अर्पित कर परिवार, गांव और पूरे सगा समाज की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की गई।पर्व के माध्यम से जल, जंगल, जमीन और प्रकृति के प्रति समाज के गहरे जुड़ाव का संदेश भी सामने आया। आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक संरक्षण की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
पारंपरिक रीति से मेहमानों और पेन-देव प्रतिनिधियों का हुआ सम्मान
आयोजन में शामिल मेहमानों और पेन-देव प्रतिनिधियों का सगा समाज की पारंपरिक रीति के अनुसार आत्मीय स्वागत किया गया। काल नोरना एवं पैर धोने जैसी सम्मानजनक परंपराओं के साथ अतिथियों का सत्कार किया गया।गद्दी गायता तिरु चैनुराम कुमोटी एवं अक्को मामल भाई भूमकाल रायताड़ पेन देव कोण्डे का विशेष सम्मान किया गया। वहीं परमाल पेन की बेटा का भी पारंपरिक रूप से सत्कार किया गया। कार्यक्रम में कटहार बाबू येरकोड गेरवाल पेन मिचेवाड़ा सहित उपस्थित हजोर भाई भूमकाल का भी सम्मान किया गया।
इस दौरान समाज की पुरखा परंपराओं, पेन व्यवस्था और सामाजिक रीति-रिवाजों को संरक्षित रखने तथा इन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता दिखाई दी।
महाराष्ट्र के तीन जिलों समेत छत्तीसगढ़ के कई क्षेत्रों से पहुंचे समाजजन
परमाह मुदिया पेन कड़ा में आयोजित इस महत्वपूर्ण पर्व में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली, गोंदिया और चंद्रपुर से बड़ी संख्या में समाजजन पहुंचे। वहीं छत्तीसगढ़ के नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर, बालोद, राजनांदगांव और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी सहित विभिन्न क्षेत्रों से भी हजारों की संख्या में सगा समाज के लोग आयोजन में शामिल हुए।दूर-दराज से पहुंचे समाजजनों ने सामूहिक रूप से पुरखों और पेन-देव का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। समाजजनों के अनुसार ऐसे पारंपरिक पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज की संस्कृति, परंपरा, सामाजिक व्यवस्था और प्रकृति के साथ उसके संबंध को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
गद्दी गायता, मांझी-पेनवो और सामाजिक प्रतिनिधियों की रही विशेष मौजूदगी
आयोजन में क्षेत्र के गद्दी गायता, सिद्धा नेंग, भंडार गायता, मोहण्डा मांझी, पेनवो, पेन पटाड़ी एवं देव प्रमुखों की विशेष उपस्थिति रही।
इस अवसर पर गद्दी गायता तिरु चैनुराम कुमोटी, गद्दी गायता मेहरू राम कुमोटी, गांव पटेल हलांजुर जनीया कोवा, मोरचुल रानु जांगी, बालेर हजोर भाई सिदुराम गावड़े, आमपयली मोहण्डा मांझी मंगु पेनवो तथा मुन्देली सहित विभिन्न गांवों से पहुंचे सगा समाज के प्रतिनिधि और समाजजन बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
परंपरा और संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ने का बना माध्यम
हलांजुर का पुनंग पंडुम पर्व सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा। फसल की पहली बाली पुरखा देव को अर्पित करने की परंपरा के माध्यम से प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। वहीं सामूहिक आयोजन ने नई पीढ़ी को अपनी मूल संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान, सामाजिक व्यवस्था और पुरखों की विरासत से परिचित कराने का अवसर दिया।
पूरे आयोजन के दौरान सेवा, श्रद्धा, प्रकृति सम्मान, पारंपरिक आस्था और सामाजिक भाईचारे का वातावरण बना रहा। महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग क्षेत्रों से आए हजारों सगा समाजजनों की सामूहिक सहभागिता ने पुनंग पंडुम पर्व को सांस्कृतिक एकता और परंपरा संरक्षण का एक महत्वपूर्ण अवसर बना दिया।

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