NBP NEWS/ मोहला, 09 अगस्त 2026
छत्तीसगढ़ में सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार के लिए जगह-जगह बड़े-बड़े पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के फोटो वाले पोस्टरों से प्रदेश के अनेक शहर और कस्बे सजे हुए दिखाई दे रहे हैं। सरकार अपने काम और उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के लिए प्रचार कर रही है।
लेकिन इसी बीच मोहला के एक सरकारी स्कूल से शिक्षा व्यवस्था को लेकर ऐसा सवाल सामने आया है, जो सरकार और शिक्षा विभाग दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए।
मोहला के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला के कक्षा 6वीं से 8वीं तक के विद्यार्थियों को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार इस शैक्षणिक सत्र में अभी तक नई पाठ्य-पुस्तकों की व्यवस्था पूरी तरह नहीं हो पाई है।
स्कूल के WhatsApp ग्रुप में हुई बातचीत के दौरान जब इस विषय पर सवाल उठाया गया तो जानकारी सामने आई कि कक्षा 6वीं, 7वीं और 8वीं के विद्यार्थियों की पुस्तकों को लेकर समस्या बनी हुई है।
कक्षा 6वीं और 8वीं में पुरानी किताबों से काम चलाने की मजबूरी
बताया गया कि कक्षा 6वीं और 8वीं की पाठ्य-पुस्तकों में इस सत्र में बदलाव नहीं हुआ है। इसलिए इन कक्षाओं के विद्यार्थियों को उपलब्ध पुरानी पाठ्य-पुस्तकों से पढ़ाई कराई जा रही है।
लेकिन कक्षा 7वीं की पाठ्य-पुस्तक में बदलाव हुआ है। नई पुस्तक आने के कारण पुराने संस्करण की पुस्तक से काम नहीं चल सकता। परिणाम यह है कि कक्षा 7वीं के विद्यार्थियों के सामने सबसे बड़ी समस्या खड़ी हो गई है—नई किताब उपलब्ध नहीं और पुरानी किताब भी उपयोगी नहीं।
यानी कक्षा 7वीं के बच्चे पुस्तक के इंतजार में हैं।
सवाल यह है कि नई किताबें समय पर क्यों नहीं पहुंचीं?
शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद भी यदि विद्यार्थियों को उनकी निर्धारित पाठ्य-पुस्तक उपलब्ध नहीं हो पा रही है, तो इसका जिम्मेदार कौन है?
क्या नई पाठ्य-पुस्तकों की आवश्यकता की जानकारी विभाग को पहले से नहीं थी?
क्या पुस्तकों की छपाई में देरी हुई?
क्या किताबें छप चुकी हैं लेकिन स्कूल तक नहीं पहुंची हैं?
क्या वितरण व्यवस्था में समस्या है?
इन सवालों का जवाब शिक्षा विभाग को देना चाहिए।
करोड़ों के प्रचार पर सवाल, बच्चों की किताबों पर इंतजार क्यों?
आज पूरे छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और सरकार की योजनाओं एवं उपलब्धियों से जुड़े बड़े-बड़े प्रचार पोस्टर दिखाई दे रहे हैं।
सरकार के प्रचार-प्रसार पर होने वाले खर्च को लेकर विपक्ष और जनता के बीच समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में मोहला के सरकारी स्कूल के बच्चों की किताबों का मामला एक सीधा और बेहद महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है—
अगर सरकार के पास अपने प्रचार-प्रसार के लिए बड़े-बड़े पोस्टर लगाने का बजट है, तो बच्चों की पाठ्य-पुस्तकें समय पर उपलब्ध कराने में परेशानी क्यों?
पोस्टर कुछ समय के लिए होते हैं।
लेकिन बच्चे और उनकी शिक्षा पूरे भविष्य के लिए होते हैं।
एक पोस्टर सरकार की उपलब्धि का प्रचार कर सकता है, लेकिन एक किताब किसी बच्चे का भविष्य बदल सकती है।
यह राजनीति नहीं, बच्चों के भविष्य का सवाल है
इस मुद्दे को किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में देखने के बजाय बच्चों के भविष्य के नजरिए से देखना चाहिए।
सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला प्रत्येक बच्चा समय पर किताब, शिक्षक और आवश्यक शैक्षणिक सुविधाओं का हकदार है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए सरकारी स्कूल की व्यवस्था ही शिक्षा का सबसे बड़ा सहारा होती है।
ऐसे में पाठ्य-पुस्तक जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए बच्चों को इंतजार करना पड़े, यह निश्चित रूप से चिंता का विषय है।
जिला शिक्षा विभाग तत्काल संज्ञान लेवे
मोहला के अभिभावकों और विद्यार्थियों की ओर से मांग है कि जिला शिक्षा विभाग तत्काल मामले की जांच करे और यह स्पष्ट करे कि कक्षा 6वीं से 8वीं तक की पाठ्य-पुस्तकों की स्थिति क्या है।
विशेष रूप से कक्षा 7वीं की नई पाठ्य-पुस्तकें कब तक विद्यालय में पहुंचेंगी, इसका स्पष्ट जवाब विद्यार्थियों और अभिभावकों को दिया जाना चाहिए।
जब तक पुस्तकें उपलब्ध नहीं होतीं, तब तक विभाग को वैकल्पिक अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी करनी चाहिए, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
आधिकारिक पक्ष लेने की कोशिश की जा रही है, आते ही उसे भी प्रमुखता से प्रसारित किया जाएगा।
NBP News का सवाल
पूरे प्रदेश को पोस्टरों से सजाने से पहले क्या सरकार यह सुनिश्चित नहीं कर सकती कि हर सरकारी स्कूल के हर बच्चे के हाथ में उसकी पाठ्य-पुस्तक हो?
सरकार के पोस्टर कुछ महीनों में बदल जाएंगे, लेकिन बच्चों का यह शैक्षणिक वर्ष वापस नहीं आएगा।
जनता का सवाल सीधा है—
पोस्टर बाद में भी लगाए जा सकते हैं,
पहले बच्चों को किताबें दीजिए।
— नरेश बोगाजी
संस्थापक, NBP News — सत्य की आवाज
मोहला

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