पांचवीं अनुसूची क्षेत्र मोहला मानपुर अं चौकी में फिर से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नम्रता सिंह पर फर्जी तरीके से जाति प्रमाण (ST) पत्र बनवाने का आरोप के बाद जांच समिति ने प्रक्रिया तेज की है।
भाजपा की जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह जैन के जाति प्रमाण पत्र एवं सामाजिक प्रास्थिति की जांच को लेकर उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने प्रक्रिया तेज कर दी है। इस संबंध में आदिमजाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग, नया रायपुर द्वारा दो महत्वपूर्ण आदेश जारी किए गए हैं।
जारी आदेश के अनुसार, छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक प्रास्थिति के प्रमाणीकरण का विनियमन) अधिनियम, 2013 एवं नियम, 2013 के तहत जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह जैन की सामाजिक प्रास्थिति एवं जाति प्रमाण पत्र की जांच की जा रही है।
समिति ने तहसीलदार मोहला को निर्देशित किया है कि नम्रता सिंह जैन के वर्तमान, पूर्व एवं स्थायी निवास क्षेत्र में सार्वजनिक सूचना (मुनादी) कराई जाए। यदि किसी व्यक्ति या संस्था के पास उनके जाति संबंधी दावे के समर्थन या विरोध में कोई तथ्य, दस्तावेज अथवा जानकारी हो, तो वह समिति के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है।
आदेश के अनुसार 7 अगस्त 2026 को दोपहर 12 बजे संचालनालय, आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, सेक्टर-24, नया रायपुर अटल नगर में उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति की बैठक आयोजित होगी। इस दौरान संबंधित पक्ष अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज, शपथपत्र अथवा अन्य साक्ष्य प्रस्तुत कर सकेंगे। समिति ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी अपनी बात रखने की सुविधा उपलब्ध कराई है।
एक अन्य पत्र में जिला स्तरीय जाति सत्यापन छानबीन समिति के सदस्य सचिव को निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित पक्ष को बैठक की सूचना विधिवत तामील कराई जाए तथा सूचना प्राप्ति की पावती सुनिश्चित की जाए।
आपको बता दे कि पूर्व में जिला पंचायत चुनाव के समय जाति प्रमाण पत्र को लेकर आरोप लगे थे। सुशासन तिहार 2025 में भी नम्रता सिंह के विरुद्ध में आवेदन लगे थे कि गलत तरीके से जाति प्रमाण पत्र बनवाकर चुनाव लड़ कर जीते हैं।
सूत्रों के अनुसार अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र तभी वैध माना जाता है, जब वह 1950 से पूर्व के स्थानीय राजस्व अभिलेखों के आधार पर जारी हो। सूत्रो की माने तो नम्रता सिंह और न ही उनके पिता नारायण सिंह का नाम मोहला क्षेत्र के 1950 से पूर्व के किसी भी दस्तावेज में दर्ज है। चूंकि नारायण सिंह उड़ीसा निवासी जो कि मध्यप्रदेश 1977 कैडर के IAS अधिकारी इससे यह संदेह प्रबल हो गया है कि उनका इस क्षेत्र की अनुसूचित जनजाति से कोई परंपरागत संबंध नहीं है।
नम्रता सिंह जैन के पिता नारायण सिंह ओडिशा निवासी व मध्यप्रदेश कैडर के पूर्व IAS अधिकारी हैं। जिनका जन्म 28/02/1954 को उड़ीसा में हुआ था। मिली जानकारी के अनुसार, परिवार को जो निवास प्रमाण पत्र मिला है वह ओडिशा राज्य से जारी किया गया था। इसके उलट, नम्रता सिंह ने मोहला क्षेत्र के सक्षम अधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र का उपयोग कर चुनाव लड़ा, जिससे अब इसकी वैधता पर सवाल उठ रहे हैं।
कानूनन एक राज्य की अनुसूचित जनजाति को दूसरे राज्य में अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं दिया जा सकता है। जाति प्रमाण पत्र बनने में निवास की भूमिका मुख्यता है। सूत्रो की माने तो नारायण सिंह झाड़ा वेल्ली उड़ीसा के निवासी थे। दूसरी ओर नम्रता सिंह की नानी पानाबरस (मोहला) निवासी थीं। तो क्या ऐसे में उनके नानी के निवास के अनुसार दस्तावेज बनाए गए होंगे ?
जाति प्रमाण पत्र बनवाने में ग्राम सभा के अनुमोदन का भी प्रयोग किया जाता है। ऐसे में क्या ग्राम सभा की शक्तियों का प्रयोग करते हुए जाति प्रमाण पत्र बनवाया गया होगा। ऐसे में क्या जांच समिति इसे सही ठहराएगी।
फिलहाल यह प्रक्रिया केवल जाति प्रमाण पत्र एवं सामाजिक प्रास्थिति के सत्यापन की जांच का हिस्सा है। समिति की जांच और सुनवाई के बाद ही इस मामले में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
कही ये राजनीतिक खुन्नस या बदनाम करने की साजिश के तहत नम्रता सिंह की छवि को धूमिल करने की कोशिश की जा रही होगी या ये सामान्य प्रक्रिया है?
#NBPNEWS #MohlaNews #ChhattisgarhNews #NamrataSinghJain #CasteCertificate #JatiJanch #DistrictPanchayat #BreakingNews #MohlaManpur #CGNews #LatestNews #TribalNews #Politics #ViralNews #HindiNews #bjp #tribal #आदिवासी
0 टिप्पणियाँ