Ticker

6/recent/ticker-posts

Ad Code

मोहला में शासकीय पट्टे की जमीन पर अवैध प्लॉटिंग का बड़ा खेल! जांच के आदेश

NBP NEWS/ मोहला, 30 जुलाई 2026
पांचवीं अनुसूची क्षेत्र मोहला मानपुर के जिला मुख्यालय मोहला में शासकीय पट्टे से मिली कृषि भूमि पर कथित अवैध प्लॉटिंग का मामला सामने आने के बाद राजस्व व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तहसील कार्यालय के पीछे स्थित कृषि भूमि को छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित कर खुलेआम बिक्री किए जाने के आरोप लगे हैं। मामले में जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार पटवारी हल्का नंबर 10 के अंतर्गत खसरा क्रमांक 61/16, लगभग 3 एकड़ भूमि, जो वर्तमान में दुष्यंत एवं नरेंद्र कुमार के नाम दर्ज बताई जा रही है, पर बिना सक्षम अनुमति प्लॉटिंग किए जाने का आरोप है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कृषि भूमि को कॉलोनी की तरह विकसित कर लाखों रुपये में भूखंड बेचे जा रहे हैं, जबकि मौके पर सड़क, नाली, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

शासकीय पट्टे से मिली थी जमीन, अब प्लॉटिंग पर सवाल

राजस्व अभिलेखों के अनुसार संबंधित खसरा मूल रूप से वर्ष 1955 में "बड़े झाड़" मद में दर्ज था। बाद में 1972-73 में बंटन के तहत किसानों को आवंटित किया गया और 1987-88 में भूस्वामी अधिकार दर्ज किए गए। अब इसी भूमि के एक हिस्से पर प्लॉटिंग और रजिस्ट्री किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जबकि अन्य खसरा का रजिस्ट्री बैन है।

कलेक्टर अनुमति जरूरी

उक्त खसरा शासकीय पट्टे की भूमि होने की वजह से इसकी खरीद फरोख्त के लिए जिला कलेक्टर का अनुमति लेना जरूरी है। लेकिन धड़ल्ले से हो रहे रजिस्ट्री उप पंजीयक कार्यालय मोहला की संरक्षण को दर्शाता है। भू राजस्व संहिता की धारा 165,7 (ख) का खुला उल्लंघन भी है।

नियमों को दरकिनार करने के आरोप

स्थानीय लोगों और सूत्रों का आरोप है कि आवासीय कॉलोनी विकसित करने के लिए आवश्यक भूमि उपयोग परिवर्तन, कलेक्टर की अनुमति, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की स्वीकृति तथा कॉलोनाइजर पंजीयन जैसी अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। इसके बावजूद कथित रूप से भूखंडों की बिक्री और रजिस्ट्री जारी है।

3 से 3.5 लाख रुपये प्रति डिसमिल तक बिक रहे प्लॉट!

सूत्रों के मुताबिक, संबंधित भूमि के भूखंड 3 से 3.5 लाख रुपये प्रति डिसमिल तक में बेचे जा रहे हैं। खरीदारों को विकसित कॉलोनी का सपना दिखाया जा रहा है, जबकि भविष्य में भूमि की वैधता और बुनियादी सुविधाओं को लेकर विवाद खड़ा होने की आशंका जताई जा रही है।

राजस्व अधिकारियों पर भी उठे सवाल

सूत्रों का दावा है कि राजस्व विभाग के कुछ बड़े अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। आरोप है कि बिना आवश्यक अनुमति और वैधानिक प्रक्रिया पूरी हुए प्लॉटों की खरीद-फरोख्त में रुचि दिखाई जा रही है, जिससे अवैध प्लॉटिंग को संरक्षण मिलने की आशंका व्यक्त की जा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

पहले रुका था नामांतरण, अब फिर शुरू हुई रजिस्ट्री

जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 में संबंधित भूमि के एक प्रकरण में नामांतरण शासकीय भूमि से जुड़े विवाद के कारण रोका गया था। इसके बावजूद अब खसरा नंबर 61/16 में प्लॉटिंग और रजिस्ट्री होने का मामला सामने आया है, जिससे पूरे प्रकरण पर सवाल और गहरा गए हैं।

कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश

जिला कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने कहा कि अवैध प्लाटिंग मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जांच उपरांत नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अब सबसे बड़ा सवाल

यदि संबंधित भूमि पर आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी, तो रजिस्ट्री कैसे हुई? क्या जिम्मेदार विभागों की अनदेखी से कृषि भूमि पर अवैध प्लॉटिंग का कारोबार चल रहा है, या फिर जांच में कोई अलग तस्वीर सामने आएगी? इन सवालों का जवाब अब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ