ग्राम भोजटोला और वासडी के बीच लगभग 8.42 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नई पुलिया के एप्रोच रोड में पहली ही बारिश के दौरान दरारें आने का मामला अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। मीडिया में इस खबर के प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद स्थानीय विधायक इंद्रशाह मंडावी ने मामले का संज्ञान लेते हुए विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री अरुण साव को आवेदन सौंपकर उच्च स्तरीय तकनीकी जांच की मांग की है।
विधायक ने अपने आवेदन में कहा है कि ग्राम भोजटोला एवं वासडी के मध्य हाल ही में निर्मित पुलिया और उसके एप्रोच रोड में पहली ही बारिश के दौरान दरारें पड़ना निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन उपलब्ध कराना था, लेकिन निर्माण के तुरंत बाद सामने आई खामियां भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती हैं।
विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग
विधायक ने मुख्यमंत्री और पीडब्ल्यूडी मंत्री से पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराने तथा विशेषज्ञों की समिति गठित कर गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में घटिया निर्माण सामग्री, तकनीकी लापरवाही या किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार, निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।
दोषियों से हो आर्थिक नुकसान की वसूली
आवेदन में विधायक ने क्षतिग्रस्त एप्रोच रोड का गुणवत्तापूर्ण मरम्मत अथवा आवश्यक होने पर पुनर्निर्माण कराने की भी मांग की है। साथ ही जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और यदि निर्माण में गड़बड़ी सिद्ध होती है तो शासन को हुई आर्थिक क्षति की भरपाई दोषियों से कराने की मांग भी की गई है।
जनहित से जुड़ा मामला, त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा
विधायक इंद्रशाह मंडावी ने कहा कि यह मामला केवल एक सड़क या पुलिया तक सीमित नहीं है, बल्कि जनसुरक्षा और सार्वजनिक धन के संरक्षण से जुड़ा विषय है। ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई आवश्यक है ताकि भविष्य में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर कोई समझौता न हो।
कलेक्टर का पक्ष
इस संबंध में जिला कलेक्टर ने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य स्तर पर अधीक्षक अभियंता, सेतु निर्माण विभाग को पत्र लिखकर तकनीकी निरीक्षण कराने का अनुरोध किया जाएगा। निरीक्षण रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मीडिया में मामला सामने आने के बाद इस मुद्दे पर शासन स्तर पर हलचल तेज हो गई है और अब क्षेत्रवासियों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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