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लाखों रुपये खर्च, फिर भी सूख गए पौधे; मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना पर उठे सवाल

NBP NEWS/ मोहला, 05 जून 2026
मोहला-मानपुर जिले में पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण के नाम पर एक चिंताजनक मामला सामने आया है। जिले के अंबागढ़ चौकी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पिपरखार में मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना के तहत वर्ष 2022 में बड़े पैमाने पर लगभग बारह सौ पौधारोपण किया गया था, लेकिन तीन वर्ष बाद यह महत्वाकांक्षी परियोजना बदहाली की तस्वीर पेश कर रही है।

जानकारी के अनुसार, इस परियोजना पर लगभग 8.75 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई थी। योजना के अंतर्गत बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए थे तथा उनकी सुरक्षा के लिए सुरक्षा घेरा, सिंचाई व्यवस्था और अन्य आवश्यक निर्माण कार्य भी किए गए थे। उद्देश्य था कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र हरियाली से आच्छादित होकर पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण बने, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।

पौधे बनने से पहले ही खत्म हो गई हरियाली

स्थल का निरीक्षण करने पर पता चलता है कि लगाए गए अधिकांश पौधे सूख चुके हैं। सिंचाई की व्यवस्था पूरी तरह से ठप है और जिस क्षेत्र को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाना था, वह आज उजाड़ नजर आ रहा है। यदि पौधों की उचित देखभाल और संरक्षण किया गया होता तो तीन वर्षों में ये पौधे बड़े वृक्षों का रूप ले चुके होते और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे होते।

ग्राम पंचायत रही कार्य एजेंसी

इस परियोजना की कार्य एजेंसी स्थानीय ग्राम पंचायत पिपरखार थी। वर्तमान स्थिति को लेकर ग्राम पंचायत के सचिव लिमेश नायक ने भी परियोजना की विफलता स्वीकार की। उन्होंने स्पष्ट रूप से माना कि पौधारोपण का यह कार्य अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका और इसे एक तरह से असफल परियोजना कहा जा सकता है। चुकी दूसरी परियोजना इंटेकुवेल जिसके तहत अन्य जिले को पानी सप्लाई किया जाना है उसका भी उक्त भूमि पर एंक्रोचमेंट हुआ, जानवरों के लिए चारागाह के लिए जमीन कम हुई।

लाखों की राशि खर्च, जवाबदेही पर सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब योजना पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे तो पौधों के संरक्षण और नियमित देखरेख की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए थी। पौधों के सूख जाने और परिसर के उजड़ जाने से न केवल सरकारी धन का उपयोग सवालों के घेरे में है बल्कि पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य को भी गंभीर क्षति पहुंची है।

वन विभाग ने किया बचाव

मामले को लेकर जब वन विभाग के अधिकारियों से सवाल किए गए तो उन्होंने सीधे तौर पर परिसर की दुर्दशा पर जवाब देने के बजाय विभाग की विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों का उल्लेख किया। क्षेत्र के एसडीओ वन विभाग मनेंद्र सिदार ने विभाग द्वारा संचालित अन्य वृक्षारोपण और संरक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी, लेकिन पिपरखार स्थित इस परियोजना की वर्तमान स्थिति पर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

जांच और जवाबदेही की मांग

मुख्यमंत्री के नाम से संचालित योजना की इस स्थिति ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद पौधों का संरक्षण क्यों नहीं हो पाया।

पर्यावरण संरक्षण के नाम पर शुरू की गई यह योजना आज स्वयं संरक्षण की मोहताज दिखाई दे रही है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि सरकारी योजनाओं की नियमित निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाएगी, तो हरियाली बढ़ाने के दावे आखिर कितने प्रभावी साबित होंगे?

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