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आदिवासी समाज ने 15 सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा संयुक्त ज्ञापन, संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की उठाई आवाज

NBP NEWS/मोहला, 27 जून 2026
जिले के सर्व आदिवासी समाज सहित विभिन्न आदिवासी सामाजिक, सांस्कृतिक, युवा एवं जनसंगठनों ने आदिवासी समुदाय के संवैधानिक, सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय मोहला में राज्यपाल के नाम संयुक्त ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आदिवासी समाज से जुड़े 15 प्रमुख मुद्दों पर आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई।

ज्ञापन में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ का लगभग 61 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र पांचवीं अनुसूची में आता है तथा राज्य की बड़ी आबादी आदिवासी समुदाय से जुड़ी है। संविधान की पांचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम, वन अधिकार अधिनियम सहित अन्य संवैधानिक प्रावधानों के बावजूद आदिवासी समाज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए समाज ने विस्तृत मांगपत्र प्रस्तुत किया है।

प्रमुख मांगें
ज्ञापन में जनगणना में आदिवासी धर्म के लिए अलग कोड लागू करने, परिसीमन में आदिवासी प्रतिनिधित्व सुरक्षित रखने, अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने, आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा तथा रिक्त पदों पर विशेष भर्ती अभियान चलाने की मांग की गई है।

इसके अलावा अनुसूचित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, खनिज, वन एवं सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण पर रोक लगाने, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित करने, आदिवासी भूमि की अवैध खरीद-फरोख्त रोकने तथा भूमि हस्तांतरण के मामलों में ग्राम सभा की अनिवार्य सहमति लागू करने की मांग भी शामिल है।

ज्ञापन में अवैध भूमि कब्जों की जांच, विशेष भू-माफिया नियंत्रण कानून बनाने, पेसा कानून एवं वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) का प्रभावी क्रियान्वयन, सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों का शीघ्र निराकरण तथा आदिवासी आस्था केंद्रों और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण की मांग भी उठाई गई है।

शिक्षा और स्वशासन पर जोर

आदिवासी समाज ने मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा, छात्रावास एवं छात्रवृत्ति सुविधाओं का विस्तार, स्थानीय इतिहास एवं संस्कृति को पाठ्यक्रम में शामिल करने तथा पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने की भी मांग की है। साथ ही जनजातीय सलाहकार परिषद (टीएसी) को अधिक प्रभावी बनाने और अनुसूचित क्षेत्रों में स्वशासन की संवैधानिक व्यवस्था लागू करने पर बल दिया गया है।

नक्सल मामलों की समीक्षा की मांग

ज्ञापन में वर्षों से नक्सल मामलों में जेलों में बंद निर्दोष आदिवासी युवाओं एवं ग्रामीणों के मामलों की उच्चस्तरीय समीक्षा कर उन्हें रिहा करने, फर्जी मामलों की निष्पक्ष जांच तथा पीड़ितों को न्याय और मुआवजा दिलाने की भी मांग की गई है।

आदिवासी समाज ने कहा कि यह संयुक्त प्रस्ताव विभिन्न आदिवासी संगठनों की सर्वसम्मति से तैयार किया गया है। समाज ने शासन से मांगों पर संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप शीघ्र कार्रवाई कर आदिवासी समाज के अधिकारों, अस्मिता और स्वशासन की रक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।अन्यथा आगे आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

ज्ञापन देने हेतु गोविंद शाह वालको, नोहरु राम कुमेटी, योगेंद्र कुमेटी सहित अन्य सामाजिक पदाधिकारी मौजूद थे।

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