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तेंदूपत्ता सीजन में बड़ा खतरा! जंगल में बाघ की मौजूदगी

NBP NEWS/ औंधी, 15 मई 2026
वनांचल के औंधी क्षेत्र में एक बार फिर बाघ की मौजूदगी से दहशत का माहौल बन गया है। तेंदूपत्ता संग्रहण के बीच बाघ द्वारा मवेशी का शिकार किए जाने की घटना ने ग्रामीणों और संग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है। 12 मई की रात निडेली गांव से करीब दो किलोमीटर दूर बाघ ने एक मवेशी को अपना शिकार बनाया। अगले दिन गांव से लगभग तीन किलोमीटर दूर जंगल के तालाब किनारे वयस्क बाघ के पदचिह्न भी पाए गए, जिससे क्षेत्र में बाघ की सक्रियता की पुष्टि हुई है।

वन विभाग के अनुसार यह बाघ पिछले चार महीनों से औंधी के जंगलों में लगातार सक्रिय है। तेंदूपत्ता सीजन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण जंगलों में संग्रहण कार्य में लगे हुए हैं, ऐसे में वन विभाग ने विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।

वनमंडलाधिकारी दिनेश पटेल ने बताया कि बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। घटनास्थल के समीप तालाब में मिले पगमार्क से संभावना जताई जा रही है कि बाघ पानी पीने वहां पहुंचा था। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों और तेंदूपत्ता संग्राहकों को अकेले जंगल में न जाने, समूह में कार्य करने तथा रात के समय घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी गई है। गांवों में मुनादी कर लोगों को सतर्क किया जा रहा है।

बाघ की गतिविधियों को कैमरे में कैद करने के लिए वन विभाग ने 13 मई को कई स्थानों पर ट्रैप कैमरे लगाए थे, हालांकि अब तक बाघ कैमरे में नजर नहीं आया है। इसके बाद विभाग ने कैमरों का स्थान बदल दिया है ताकि उसकी मूवमेंट का सटीक पता लगाया जा सके। वन विभाग का अनुमान है कि यह बाघ महाराष्ट्र के Tadoba-Andhari Tiger Reserve क्षेत्र से भटककर औंधी के जंगलों तक पहुंचा है और लगातार आबादी वाले इलाकों के करीब देखा जा रहा है।

इससे पहले भी औंधी क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी कई बार सामने आ चुकी है। सात मार्च को ग्राम मरकाटोला में एक ग्रामीण पर बाघ ने हमला करने की कोशिश की थी, लेकिन ग्रामीण ने पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचा ली थी। वहीं दो दिसंबर 2025 को नवागढ़ के जंगल में बाघ ट्रैप कैमरे में कैद हुआ था। लगातार सामने आ रही घटनाओं के कारण ग्रामीणों में भय का माहौल है।

वन विभाग के मुताबिक पिछले एक वर्ष में औंधी क्षेत्र में दो अलग-अलग बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई है। अब तक छह बार इनके देखे जाने की पुष्टि हुई है। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि दोनों बाघ अभी भी क्षेत्र में सक्रिय हैं या फिर एक ही बाघ बार-बार अलग-अलग स्थानों पर दिखाई दे रहा है। इसके अलावा जिले में पिछले दो वर्षों में 12 से 13 बार अलग-अलग क्षेत्रों में तेंदुओं की मौजूदगी भी दर्ज की जा चुकी है।

इधर, राजनांदगांव और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य तेजी से जारी है। 51 लघु वनोपज समितियों के अंतर्गत अब तक लगभग 70 प्रतिशत संग्रहण कार्य पूरा हो चुका है। समितियों द्वारा 57,314 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया जा चुका है। विभाग ने अगले 10 दिनों के भीतर संग्रहण कार्य पूरा होने की संभावना जताई है। इसके लिए कुल 639 फड़ बनाए गए हैं और इस वर्ष 80,800 मानक बोरा संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है।

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