NBP NEWS/ मोहला, 17 मार्च 2026।
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों को एक और बड़ी सफलता मिली है। सोमवार दोपहर थाना औंधी क्षेत्र के कोहकाटोला-नैनगुढ़ा पहाड़ी जंगलों में हुई मुठभेड़ के दौरान जवानों ने नक्सलियों द्वारा लूटा गया इंसास राइफल, गोला-बारूद और अहम दस्तावेज बरामद किए हैं। इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने क्षेत्र में सक्रिय बचे हुए नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए अंतिम आह्वान किया है।
पुलिस अधीक्षक वाईपी सिंह ने मंगलवार दोपहर करीब 1:30 बजे प्रेस वार्ता में घटना का खुलासा करते हुए बताया कि आरकेबी डिवीजन कमेटी के शेष नक्सलियों को हथियार सहित समर्पण करने का यह अंतिम मौका है।
मुठभेड़ में नक्सली भागे, भारी मात्रा में सामान बरामद
पुलिस के अनुसार, औंधी थाना क्षेत्र के कोहकाटोला जंगल में 4-5 नक्सलियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर औंधी थाना स्टाफ, सीएएफ, आईटीबीपी, डीआरजी और कांकेर पुलिस की संयुक्त टीम को सर्चिंग के लिए रवाना किया गया।
सर्चिंग के दौरान संदिग्ध गतिविधियां नजर आने पर पुलिस ने इलाके की घेराबंदी की। खुद को घिरता देख नक्सली घने जंगल और पहाड़ी क्षेत्र का फायदा उठाकर फरार हो गए। पुलिस ने उनका पीछा किया, लेकिन कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण वे बच निकले।
मौके से 1 नग इंसास राइफल, मैगजीन में 15 जिंदा कारतूस, पावर बैंक, दवाइयां, बैग, खाद्य सामग्री और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं बरामद की गई हैं।
2010 में लूटा गया था हथियार
बरामद इंसास राइफल वर्ष 2010 में कांकेर जिले के दुर्गकोंडल थाना क्षेत्र के भुस्की गांव से नक्सलियों द्वारा लूटी गई थी। इस मामले में शामिल नक्सलियों—राजे, मंगेश, हिडमे समेत अन्य के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम और आर्म्स एक्ट के तहत औंधी थाने में मामला दर्ज किया गया है।
औंधी से शुरू हुआ नक्सलवाद, अब यहीं खत्म करने की तैयारी
जानकारी के मुताबिक, वर्ष 1985 के आसपास आंध्र प्रदेश से नक्सलियों का प्रवेश बस्तर होते हुए मानपुर क्षेत्र में हुआ था। औंधी थाना क्षेत्र नक्सलियों का शुरुआती ठिकाना बना, जहां से उन्होंने धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत की।
घने जंगलों और सीमावर्ती क्षेत्रों—कांकेर, बस्तर और महाराष्ट्र के गढ़चिरौली से लगे इलाकों में नक्सलियों ने वर्षों तक आतंक का नेटवर्क खड़ा किया। हालांकि अब सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के चलते यह नेटवर्क पूरी तरह कमजोर पड़ चुका है और केवल गिने-चुने नक्सली ही क्षेत्र में सक्रिय बचे हैं।
31 मार्च तक आत्मसमर्पण का मौका
पुलिस अधीक्षक वाईपी सिंह ने बताया कि जिले में अब केवल 6 नक्सली सक्रिय बचे हैं। उन्होंने उन्हें 31 मार्च तक आत्मसमर्पण करने का अंतिम अवसर दिया है।
उन्होंने कहा कि नक्सली स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पटेल-कोटवार या पत्रकारों के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं। आत्मसमर्पण करने वालों को पूरी सुरक्षा और सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ दिया जाएगा।
पुलिस का स्पष्ट संदेश है कि नक्सलियों के पास अब दो ही विकल्प बचे हैं—आत्मसमर्पण या मुठभेड़।
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