छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 2026 को लेकर इंद्रशाह मंडावी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह बजट प्रदेश के युवाओं, किसानों, मजदूरों और मध्यम वर्ग की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में पूरी तरह असफल साबित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि तथाकथित "ट्रिपल इंजन सरकार" से प्रदेशवासियों को जो उम्मीद थी, उसके विपरीत बजट में जमीनी मुद्दों की अनदेखी की गई है।
युवाओं और किसानों में निराशा
विधायक मंडावी ने कहा कि बजट में किसानों की धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी और लाभकारी बनाने, बढ़ती महंगाई से राहत देने, बिजली दरों में नियंत्रण और युवाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने जैसे मूलभूत मुद्दों पर कोई ठोस और स्पष्ट रोडमैप नहीं दिया गया है। प्रदेश में बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है, छोटे व्यापारी और मध्यम वर्ग आर्थिक दबाव में हैं तथा किसान लागत और लाभ के अंतर से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में राहत की उम्मीद थी, लेकिन बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज बनकर रह गया है।
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की उपेक्षा का आरोप
इंद्रशाह मंडावी ने विशेष रूप से मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले की उपेक्षा पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह आदिवासी बाहुल्य जिला कृषि एवं वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर है, फिर भी यहां सिंचाई विस्तार, ग्रामीण सड़कों के सुदृढ़ीकरण, स्वास्थ्य सुविधाओं के उन्नयन और स्थानीय उद्योगों के प्रोत्साहन के लिए कोई ठोस प्रावधान बजट में स्पष्ट नहीं दिखता।
उन्होंने बताया कि मोहला-मानपुर क्षेत्र में मक्का प्रोसेसिंग यूनिट की घोषणा की गई थी, लेकिन बजट में उसका कोई उल्लेख नहीं है। इसी प्रकार खड़गांव में पॉलिटेक्निक महाविद्यालय की मांग भी लंबे समय से लंबित है, जिसे इस बजट में प्राथमिकता नहीं दी गई।
मुख्यमंत्री की घोषणाएं भी अधूरी
विधायक मंडावी ने कहा कि स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा सीतागांव में मक्का प्रोसेसिंग यूनिट और मानपुर में अंतर्राज्यीय बस स्थानक की घोषणा की गई थी, लेकिन बजट में इन परियोजनाओं के लिए कोई राशि प्रावधानित नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी ही घोषणाओं को अमलीजामा पहनाने में असहाय साबित हो रही है।
शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर सवाल
विधायक ने 35 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा का उल्लेख करते हुए कहा कि अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। बीएड अभ्यर्थी और संविदा कर्मचारी लंबे समय से हड़ताल पर हैं, लेकिन बजट में उनकी समस्याओं के समाधान का कोई संकेत नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान 500 रुपये में गैस सिलेंडर देने का वादा किया गया था, परंतु इस बजट में उसका जिक्र तक नहीं किया गया। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए भी कोई स्पष्ट रणनीति सामने नहीं आई है।
रसोइयों की हड़ताल से प्रभावित बच्चे
मोहला-मानपुर क्षेत्र में स्कूलों के रसोइया लंबे समय से हड़ताल पर हैं, जिसके कारण बच्चों को मध्यान्ह भोजन के स्थान पर सूखा अनाज परोसा जा रहा है। विधायक मंडावी ने कहा कि सरकार ने इस गंभीर विषय पर भी कोई ध्यान नहीं दिया है।
“गांव, गरीब, किसान और युवा की प्राथमिकताएं नजरअंदाज”
अंत में विधायक मंडावी ने कहा कि यह बजट गांव, गरीब, किसान, मजदूर और युवा की प्राथमिकताओं को केंद्र में रखने में विफल रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि क्षेत्रीय संतुलन और जनहित को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों के लिए विशेष पैकेज और ठोस प्रावधान सुनिश्चित किए जाएं, ताकि आदिवासी अंचलों को भी समान अवसर मिल सके।
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