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RTI के नाम पर 4 लाख की उगाही! छात्रावास अधीक्षकों ने मोहला थाना में की शिकायत

NBPNEWS/16 दिसंबर 2025
मोहला–मानपुर–अंबागढ़ चौकी जिले में सूचना के अधिकार (RTI) के नाम पर अवैध वसूली का गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस संबंध में जिले के छात्रावास अधीक्षकों ने मोहला थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें एक महिला पर RTI की आड़ में डराकर पैसों की वसूली करने का आरोप लगाया गया है।
शिकायत के अनुसार, विजयलक्ष्मी, निवासी दाऊ चौरा, वार्ड क्रमांक–17, खैरागढ़ द्वारा जिले के समस्त छात्रावासों से 29 अगस्त 2025 एवं 10 अक्टूबर 2025 को सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी गई थी। इसके पश्चात सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास कार्यालय, मोहला–मानपुर–अंबागढ़ चौकी द्वारा 24 सितंबर 2025 एवं 11 नवंबर 2025 को पत्र जारी कर छात्रावास अधीक्षकों को आवश्यक दस्तावेजों सहित कार्यालय में अवलोकन हेतु उपस्थित होने के निर्देश दिए गए।

अधीक्षकों का आरोप है कि अवलोकन के दौरान संबंधित महिला द्वारा जानबूझकर त्रुटियां निकाली गईं और उन्हें प्रशासकीय कार्रवाई, कलेक्टर व उच्च अधिकारियों से शिकायत करने की धमकी दी गई। शिकायत में कहा गया है कि धमकी से भयभीत होकर जब अधीक्षकों ने मामले को शांतिपूर्वक समाप्त करने का अनुरोध किया, तो कथित रूप से उनसे पैसों की मांग की गई।
आरोप है कि पैसे नहीं देने की स्थिति में गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई, जिससे दबाव में आकर अधीक्षकों ने नगद एवं ऑनलाइन माध्यम से राशि का भुगतान किया। शिकायत के मुताबिक, कुल मिलाकर लगभग 4 लाख रुपये की अवैध वसूली की गई। इसमें से 30 हजार रुपये फोन-पे के माध्यम से मोबाइल नंबर 9893164188 पर भेजे गए, जबकि शेष राशि यूपीआई के जरिए मोबाइल नंबर 741153973 पर ट्रांसफर की गई, जिसमें कन्हैया लाल करवड़े का नाम प्रदर्शित हुआ।
पीड़ित अधीक्षकों का कहना है कि वे पूरी निष्ठा से छात्र-छात्राओं के भरण-पोषण, सुरक्षा और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी निभाते हैं। RTI जैसे संवैधानिक अधिकार के नाम पर इस तरह की कथित अवैध वसूली से वे मानसिक रूप से प्रताड़ित हुए हैं और उनकी छवि को भी नुकसान पहुंचा है।
अधीक्षकों ने मोहला पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। 

थाना प्रभारी कपिल देव चंद्रा ने आवेदन की पुष्टि करते हुए बताया कि प्राप्त आवेदन के अनुसार जांच उपरांत वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

दूसरी ओर शिकायत करने में अधीक्षकों को महीने भर की देरी क्यों हुई होगी? क्या हॉस्टल अधीक्षकों ने कोई त्रुटि की होगी ? अगर कोई त्रुटि नहीं हुई थी तो घबरा कर पैसे क्यों दिए होंगे ? क्या पूरे जिले भर के हॉस्टल में कोई गड़बड़ी चल रही होगी जिसपर आंख मूंदने के लिए लेन देन हुआ होगा? क्या जिला प्रशासन उक्त छात्रावास के रिकॉर्ड का जांच - ऑडिट नहीं करना चाहिए ?  बरहाल आरोप एक जांच का विषय है। अवैध वसूली के जांच के साथ साथ क्या अधीक्षकों की कार्यप्रणाली और छात्रावासी रिकॉर्ड पर भी जांच नहीं होनी चाहिए?

यह मामला न केवल RTI जैसे पारदर्शी कानून के दुरुपयोग पर सवाल खड़े करता है, बल्कि प्रशासनिक तंत्र और आम कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता उत्पन्न करता है। अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।


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