मोहला-मानपुर अं चौकी जिले में प्रदेश के उच्च शिक्षा एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंक राम वर्मा की मौजूदगी में बुधवार को आयोजित सेवा ज्योति यात्रा अपने आयोजन से ज्यादा उसमें नजर आए राजनीतिक रंग को लेकर चर्चा में है। कार्यक्रम की तैयारियों में प्रशासनिक अमला दो दिनों तक जुटा रहा, सरकारी विभागों के स्टॉल लगाए गए, हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का लाभ प्रदान किया गया और विभागीय अधिकारी मंच पर मौजूद रहे। लेकिन कार्यक्रम के बाद सामने आई तस्वीरों ने आयोजन के स्वरूप को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा रैली में शामिल स्कूली एवं महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं, एनसीसी कैडेट और स्वच्छता दीदियों के हाथों में नजर आए भारतीय जनता पार्टी के झंडों को लेकर है। तस्वीरों में भाजपा के झंडे प्रमुखता से दिखाई दिए, जबकि राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की मौजूदगी अपेक्षाकृत कम नजर आई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि यह प्रशासनिक आयोजन था, तो इसमें राजनीतिक दल के झंडे प्रतिभागियों के हाथों में कैसे पहुंचे और विशेष रूप से विद्यार्थियों तथा एनसीसी कैडेट की भागीदारी किस व्यवस्था के तहत हुई? साथ ही जिला प्रशासन कार्यक्रम का आयोजक था तो पोस्टर में आयोजक के नाम पर कालिख क्यों पोती गई।
मंत्री की मौजूदगी में निकली मशाल यात्रा
जिला मुख्यालय मोहला में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के उच्च शिक्षा एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंक राम वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम स्थल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लाइव संबोधन प्रोजेक्टर के माध्यम से उपस्थित लोगों को सुनाया गया।
इसके बाद सभा स्थल से हाथों में मशाल लेकर जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, छात्र-छात्राओं, एनसीसी कैडेट और स्वच्छता दीदियों की मौजूदगी में सेवा ज्योति मशाल यात्रा निकाली गई। यात्रा कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची, जहां महात्मा गांधी और छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और अन्य प्रतिभागियों की मौजूदगी रही। हालांकि, बाद में सामने आई तस्वीरों में भाजपा के झंडे नजर आने के बाद कार्यक्रम के स्वरूप को लेकर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई।
प्रशासनिक तैयारियों के बाद कार्यक्रम को लेकर बदला सवाल
कार्यक्रम से पहले जिला प्रशासन का अमला तैयारियों में जुटा हुआ था। मंत्री के दौरे को लेकर प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्थाएं की गईं। कार्यक्रम स्थल की तैयारी, विभागीय गतिविधियां और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़े स्टॉल लगाए गए।
लेकिन कार्यक्रम के दौरान जिले की कलेक्टर की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी। कार्यक्रम के बाद विभागीय स्तर से यह जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है कि आयोजन भारतीय जनता पार्टी से संबंधित था।
यहीं से पूरा मामला एक बड़े सवाल में बदल गया—यदि कार्यक्रम पार्टी का था तो प्रशासनिक अमला और सरकारी विभाग इस आयोजन का हिस्सा किस रूप में थे? और यदि कार्यक्रम प्रशासन का था तो उसमें राजनीतिक दल के झंडों की मौजूदगी क्यों रही?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्टर पड़ी रही जमीन पर
कार्यक्रम के बाद अलग अलग योजनाओं को लेकर बनाए गए पोस्टर जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की फोटो शामिल थी कई घंटों जमीन पर पड़ी रही जिसमें राहगीर पोस्टर के ऊपर पैर रखकर चलने को लेकर नकारा नहीं जा सकता है।
विद्यार्थियों की भागीदारी ने बढ़ाई चर्चा
पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल स्कूली विद्यार्थियों और एनसीसी कैडेट की भागीदारी को लेकर उठ रहा है। सवाल यह है कि क्या विद्यार्थियों को किसी राजनीतिक दल से जुड़े कार्यक्रम में शामिल किया जाना उचित है? और यदि उन्हें किसी प्रशासनिक या सामाजिक कार्यक्रम के नाम पर बुलाया गया था, तो उनके हाथों में भाजपा के झंडे कैसे पहुंचे?
मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जिले में पूर्व में जिला शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों के प्राचार्यों और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को राजनीतिक धरना-प्रदर्शन एवं रैलियों में विद्यार्थियों या शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी को लेकर निर्देश जारी किए जाने की बात सामने आई थी।
बताया गया कि 23 जुलाई 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी पत्र में स्कूलों के प्राचार्यों और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को धरना-प्रदर्शन एवं रैलियों में शामिल नहीं होने संबंधी निर्देश दिए गए थे।
ऐसे में अब सवाल उठाया जा रहा है कि यदि विद्यार्थियों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखने के निर्देश दिए गए थे, तो सेवा ज्योति यात्रा में उनकी मौजूदगी और विशेषकर उनके हाथों में राजनीतिक दल के झंडे नजर आने की स्थिति को प्रशासन किस नजरिए से देखता है?
सरकारी स्टॉल और हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ
मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू कार्यक्रम में लगाए गए सरकारी विभागों के स्टॉल और शासन की योजनाओं के तहत हितग्राहियों को लाभ वितरण से जुड़ा है।
कार्यक्रम के मंच पर विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी उज्ज्वल पोरवाल व जनप्रतिनिधि सहित अन्य विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में हितग्राहियों को आवास की चाबी, राशन कार्ड और अन्य सामग्री वितरित की गई।
यदि आयोजन पूरी तरह राजनीतिक दल का कार्यक्रम था, तो उसमें सरकारी विभागों के स्टॉल, अधिकारियों की सक्रिय भूमिका और शासन की योजनाओं से जुड़े हितग्राही कार्यक्रम का हिस्सा किस आधार पर बने—यह सवाल अब चर्चा का विषय है।
वहीं दूसरी ओर, यदि यह प्रशासनिक कार्यक्रम था और इसमें सरकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार तथा हितग्राहियों को लाभ वितरण किया जाना कार्यक्रम का हिस्सा था, तो राजनीतिक दल के झंडों की मौजूदगी को लेकर भी प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
90 फुट की विशाल रंगोली भी बनी आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम के लिए तैयारियों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आईटीआई और महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने मंगलवार से करीब 90 फुट रेडियस की विशाल रंगोली तैयार की।
बताया जा रहा है कि रंगोली में लगभग एक क्विंटल चावल, धान, चना, मक्का और अन्य अनाजों का इस्तेमाल किया गया। सूत्रों के अनुसार अलग-अलग विभागों की ओर से अनाज और रंगोली से संबंधित सामग्री उपलब्ध कराई गई थी।
यदि इन दावों की पुष्टि होती है तो यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि एक राजनीतिक कार्यक्रम में सरकारी विभागों द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री और विद्यार्थियों की श्रम भागीदारी किस प्रशासनिक आदेश या व्यवस्था के तहत हुई?
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
पूरे मामले में अब प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कार्यक्रम की तैयारियों में प्रशासनिक मशीनरी की सक्रियता, सरकारी विभागों की भागीदारी, अधिकारियों की मंच पर मौजूदगी और सरकारी योजनाओं से जुड़े कार्यक्रमों के साथ-साथ राजनीतिक दल के झंडों की मौजूदगी ने आयोजन की प्रकृति को लेकर असमंजस पैदा कर दिया है।
एक तरफ प्रशासन द्वारा विद्यार्थियों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखने की बात कही जाती रही है, वहीं दूसरी तरफ इसी जिले में आयोजित एक कार्यक्रम में विद्यार्थियों और एनसीसी कैडेट के हाथों में राजनीतिक दल के झंडे दिखाई देना चर्चा का कारण बन गया है।
यह स्थिति प्रशासन के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी संस्थानों और विद्यार्थियों की भागीदारी वाले किसी भी कार्यक्रम में राजनीतिक निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
आखिर प्रशासन का कार्यक्रम या भाजपा का?
अब पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि सेवा ज्योति यात्रा आखिर प्रशासन का कार्यक्रम था या भारतीय जनता पार्टी का?
यदि यह प्रशासनिक कार्यक्रम था, तो उसमें भाजपा के झंडे क्यों दिखाई दिए? विद्यार्थियों और एनसीसी कैडेट के हाथों में राजनीतिक दल के झंडे किसके निर्देश पर पहुंचे? सरकारी विभागों के स्टॉल और अधिकारियों की भागीदारी किस आदेश के तहत हुई?
और यदि यह भारतीय जनता पार्टी का पार्टीगत कार्यक्रम था, तो फिर प्रशासनिक अमले की तैयारियों, सरकारी विभागों की मौजूदगी, सरकारी स्टॉल, अधिकारियों की मंच पर भूमिका और शासन की योजनाओं के तहत हितग्राहियों को सामग्री वितरण का औचित्य क्या था?
इसके अलावा विद्यार्थियों को इस तरह के आयोजन में शामिल करने और उनके हाथों में राजनीतिक दल के झंडे दिखाई देने के मामले में प्रशाशन की क्या भूमिका रही, यह भी स्पष्ट होना बाकी है।
फिलहाल सेवा ज्योति यात्रा को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चाओं का दौर जारी है। हालांकि, कार्यक्रम के स्वरूप, विद्यार्थियों की भागीदारी, भाजपा के झंडों की मौजूदगी और सरकारी तंत्र की भूमिका को लेकर जिला प्रशासन या आयोजन से जुड़े जिम्मेदार पक्ष की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
शाम होते होते स्थिति स्पष्ट हुई जब विभागीय अधिकारी ने बताया कार्यक्रम भाजपा का था प्रशासन सहयोगी भूमिका में थी।
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