आदिवासी बाहुल्य जिले में जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह के विरोध में सदस्यों ने जहां मोर्चा खोला है। वहां सर्व आदिवासी समाज ने अपना पक्ष बताकर जिले में सनसनी फैला दी है। समाज के हस्ताक्षेप से बागी सदस्यों को मजबूती मिलने के आसार बढ़ गए हैं। जिला स्तरीय सर्व आदिवासी समाज की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह के जाति प्रमाण पत्र को लेकर पिछले दो से तीन वर्षों से स्थानीय प्रशासन के समक्ष जांच की मांग की जाती रही है। समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार, इस संबंध में जिला स्तरीय छानबीन समिति और राज्य स्तरीय छानबीन समिति के समक्ष भी आवेदन प्रस्तुत किए गए हैं।
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया गया है कि जाति प्रमाण पत्र से जुड़े मामले को लेकर सर्व आदिवासी समाज ने न्याय की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस मुद्दे पर उनका विरोध जारी है और वे आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों एवं हितों की रक्षा की मांग कर रहे हैं।
समाज ने स्पष्ट किया है कि जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ निर्वाचित सदस्यों द्वारा लाए जा रहे अविश्वास प्रस्ताव को उनका समर्थन प्राप्त है। उनके अनुसार, यह विषय केवल राजनीतिक दलों के बीच सत्ता या राजनीतिक लाभ-हानि का मामला नहीं, बल्कि आरक्षित समाज के अधिकारों से जुड़ा हुआ है।
राजनीतिक द्वेष नहीं, संवैधानिक अधिकारों का विषय : सर्व आदिवासी समाज
सर्व आदिवासी समाज ने इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव के रूप में देखे जाने पर आपत्ति जताई है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों और हक से जुड़े विषय को राजनीतिक नफा-नुकसान से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
समाज की ओर से कहा गया है कि जो भी राजनीतिक दल इस विषय को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करेगा, उसका सर्व आदिवासी समाज विरोध करेगा। साथ ही, समाज ने अविश्वास प्रस्ताव की मांग को लेकर आगे आए निर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों के साथ एकजुट होकर सहयोग करने की बात कही है।
इस समर्थन के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह के खिलाफ चल रही अविश्वास प्रस्ताव की कवायद को लेकर जिले में राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
सात सदस्यों के एकजुट होने का दावा, फैसले से पीछे हटने को तैयार नहीं
जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले सदस्यों ने दावा किया है कि वे अपने फैसले पर अडिग हैं। जिला पंचायत सदस्य लखन कलामे, नरसिंह भंडारी, सविता तिलक सोरी, भोजेश शाह, रेखा कोठारी, शांति त्रिपुरे और शेश्वरी धुर्वे सहित विरोध कर रहे सदस्यों का कहना है कि सात सदस्य एकजुट हैं और अध्यक्ष के खिलाफ अपनी मांग से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
सदस्यों ने अध्यक्ष की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा है कि उनकी मांग स्पष्ट है। या तो अध्यक्ष स्वयं इस्तीफा दें या फिर सक्षम स्तर पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत अविश्वास प्रस्ताव पर जल्द मतदान कराया जाए।
विरोध कर रहे सदस्यों ने जिला पंचायत उपाध्यक्ष भोजेश शाह के भी उनके साथ होने का दावा किया है। सदस्यों के अनुसार, कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन पर उपाध्यक्ष ने भी हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया में आगे की स्थिति संबंधित प्रशासनिक और कानूनी औपचारिकताओं पर निर्भर करेगी।
जाति प्रमाण पत्र का विवाद और अविश्वास प्रस्ताव, दो अलग-अलग प्रक्रियाएं
नम्रता सिंह के जाति प्रमाण पत्र को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुका है। पूर्व में उच्च स्तरीय छानबीन समिति द्वारा उन्हें क्लीन चिट दिए जाने की बात सामने आई थी। वहीं, सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने इस निर्णय पर असंतोष जताते हुए न्यायालय में न्याय की मांग करने की बात कही है।
ऐसे में जाति प्रमाण पत्र से जुड़े मामले में समाज की आपत्तियां और जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की मांग, दोनों ही जिले में चर्चा का विषय बने हुए हैं। हालांकि, जाति प्रमाण पत्र की वैधता का निर्धारण संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होगा, जबकि अविश्वास प्रस्ताव पर निर्णय निर्धारित पंचायत नियमों के अनुसार लिया जाएगा।
भाजपा संगठन में भी बढ़ी हलचल, दोनों पक्षों ने रखा अपना पक्ष
इस पूरे विवाद के बीच भाजपा संगठन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। असंतुष्ट जिला पंचायत सदस्यों के अनुसार, उन्होंने छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव से मुलाकात कर अपनी बात रखी है। वहीं, जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह ने भी प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात कर अपना पक्ष प्रस्तुत किया है।
सदस्यों के मुताबिक, दोनों पक्षों की बात अलग-अलग सुनी गई है। इसके अलावा असंतुष्ट सदस्यों की जिले के प्रभारी मंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा से मुलाकात की चर्चा भी सामने आई है।
दूसरी ओर, भाजपा के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला अध्यक्ष दिलीप वर्मा ने पार्टी में सब कुछ ठीक होने की बात कही है। उनका कहना है कि नाराज सदस्यों को मनाने का प्रयास किया जा रहा है और एक-दो दिनों में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।
अब आगे क्या होगा, निगाहें प्रशासनिक प्रक्रिया पर
जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की मांग को लेकर जहां असंतुष्ट सदस्य अपने फैसले पर अडिग रहने की बात कह रहे हैं, वहीं सर्व आदिवासी समाज ने भी उनके समर्थन में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। दूसरी तरफ भाजपा संगठन इस विवाद को बातचीत के माध्यम से सुलझाने की कोशिश में जुटा होने की बात कह रहा है।
इस घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा संगठन अपने असंतुष्ट सदस्यों को मनाने में सफल होगा या फिर अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी? क्या जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह अपने पद पर बनी रहेंगी या जिला पंचायत में नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति बनेगी?
फिलहाल, किसी नए अध्यक्ष के नाम को लेकर अटकलें जरूर लगाई जा रही हैं, लेकिन अभी तक नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला पंचायत का यह घटनाक्रम अब केवल संगठन के भीतर असंतोष तक सीमित नहीं रह गया है। अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में सर्व आदिवासी समाज की बयान सामने आने के बाद आने वाले दिनों में प्रशासनिक प्रक्रिया, भाजपा संगठन की पहल और संबंधित कानूनी मामलों पर सभी की निगाहें रहेंगी।
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