आदिवासी क्षेत्र मोहला मानपुर अं चौकी में ऊंचे ब्याज में कर्ज देकर आदिवासियों को फसाने का काम जोर शोर से चल रहा है। जहां भोले भाले आदिवासियों को इस चंगुल से दूर रखने सरकार ने पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में साहूकार नीति पूर्णतः प्रतिबंध कर रखा है। वहां कानून को तांक में रखकर साहूकार आदिवासियों और अन्य लोगों को गिद्ध की तरह नोच खाने में लगे हैं।
मोहला में कथित निजी साहूकारी और ऊंची ब्याज दर को लेकर सामने आई शिकायतों के बाद अब इसी मामले में एक और आवेदन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय मोहला में दिए जाने की बात सामने आई है। इस बार शिकायतकर्ता आसिन बाई मंडावी ने अपनी बेटी की चांदी की पायल गिरवी रखने, ब्याज की राशि देने और रकम चुकाने के बावजूद पायल वापस नहीं मिलने का आरोप लगाया है।
शिकायत में बताया गया है कि उनकी बेटी ने करीब एक वर्ष पूर्व अत्यावश्यक जरूरत के चलते कल्पना गुप्ता, निवासी मोहला से 15 हजार रुपये उधार लिए थे। आवेदन के अनुसार इसके बदले चांदी की दो जोड़ी पायल गिरवी रखी गई थीं। शिकायतकर्ता ने एक पायल का वजन करीब 22 तोला और दूसरी का करीब 10 तोला बताया है।
प्रति सप्ताह 1500 रुपये ब्याज देने का आरोप
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि 15 हजार रुपये के बदले प्रति सप्ताह 1500 रुपये ब्याज दिया जा रहा था। शिकायतकर्ता ने इसे करीब 40 प्रतिशत मासिक ब्याज बताया है। साथ ही आवेदन में 200 रुपये अतिरिक्त फीस लिए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
शिकायत के मुताबिक कुछ सप्ताह ब्याज नहीं दिया जा सका। इसके बाद जब गिरवी रखी गई पायल वापस मांगी गई तो कथित तौर पर 24 हजार रुपये देने की बात कही गई।
16,200 रुपये देने का दावा, फिर भी पायल वापस नहीं मिलने का आरोप
शिकायतकर्ता का कहना है कि अब तक कुल 16,200 रुपये दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद पायल वापस नहीं मिलने पर उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आवेदन में बताया गया है कि कल्पना गुप्ता ने पायल छुड़ाने के लिए कुल 24 हजार रुपये की मांग की थी। उसके बाद 24 हजार देकर पायल वापस मांगने के लिए फोन और एसएमएस किए गए, लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार कोई जवाब नहीं मिला।
आवेदन में दोनों पायल की वर्तमान कीमत भी अलग-अलग बताई गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार एक पायल की कीमत लगभग 51 से 52 हजार रुपये, जबकि दूसरी पायल की कीमत करीब 14 हजार रुपये है।
पहली शिकायत के बाद अब नया आवेदन, जांच पर टिकी नजर
गौरतलब है कि सितंबर में भी मोहला में कथित निजी साहूकारी और ऊंची ब्याज दरों को लेकर शिकायतें सामने आई थीं, जिनमें कल्पना गुप्ता का नाम सामने आया था। उस समय प्रशासन की ओर से शिकायतों की जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की बात कही गई थी।
पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में मोहला मानपुर में साहूकार नीति पूर्णतः प्रतिबंध है। ऐसे में ग्राम सभा के माध्यम से ब्याज में पैसे देने का कार्य किया जा सकता है। वही ग्राम पंचायत सचिव का कहना है, ब्याज में पैसे देना अवैध है। पेशा क्षेत्र ने पंचायत से कोई भी लाइसेंस जारी नहीं होती है।
सामान्य क्षेत्र राजनांदगांव जैसे जिलों में लाइसेंस के तहत साहूकारी (ब्याज) में पैसे लगभग दो प्रतिशत में दिया जाता है।
अब सामने आए इस नए आवेदन ने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। यह स्पष्ट होना बाकी है कि लेन-देन की वास्तविक शर्तें क्या थीं, कितनी राशि ब्याज के रूप में दी गई और गिरवी रखी गई पायल वर्तमान में किसके पास है।
लेकिन जिले में चल रही ब्याज के इस अवैध गोरखधंधे में कई साहूकार शामिल हैं। व्यापारियों के साथ साथ सरकारी कर्मचारी भी इसमें लिप्त हैं।
सूत्रों की माने तो सरकारी कर्मचारी भी ऊंचे ब्याज दरों में भोले भाले किसानों, आदिवासियों को अपने कर्ज के मायाजाल में फंसा कर मोटा पैसा कमा रहे हैं।
अब सवाल यह है कि प्रशासन की जांच में इस नए आवेदन के तथ्यों की क्या स्थिति सामने आती है और शिकायतकर्ता को उसकी गिरवी रखी संपत्ति वापस मिल पाती है या नहीं।
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