ग्रेड पे बढ़ाने और वेतन विसंगति दूर करने की मांग; सरकार से जल्द निर्णय की अपील, मांगें नहीं मानी गईं तो दीपावली के बाद अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
NBP NEWS/ मोहला / 8 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ में नर्सिंग संवर्ग की वर्षों से लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन की आहट तेज हो गई है। ग्रेड पे में वृद्धि और वेतन विसंगति दूर करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश नर्सेस एसोसिएशन ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को प्रदेशव्यापी ज्ञापन अभियान चलाया। प्रदेश के विभिन्न जिलों और ब्लॉक मुख्यालयों में नर्सिंग कर्मचारियों ने भोजन अवकाश के दौरान प्रदर्शन कर शासन के नाम ज्ञापन सौंपे।
एसोसिएशन के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल सहित विभिन्न शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत नियमित स्टाफ नर्स एवं नर्सिंग संवर्ग के कर्मचारी इस अभियान में शामिल हुए। कर्मचारियों ने अपनी संस्थाओं के बाहर एकत्र होकर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन संस्था प्रमुख, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन, जिला कलेक्टर, खंड चिकित्सा अधिकारी तथा एसडीएम को सौंपा।
भोजन अवकाश में प्रदर्शन, शासन तक
पहुंचाई मांग
नर्सिंग कर्मचारियों ने भोजन अवकाश के दौरान प्रदर्शन कर सरकार का ध्यान लंबे समय से लंबित वेतन संबंधी मांगों की ओर आकर्षित किया। एसोसिएशन का कहना है कि नर्सिंग संवर्ग प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है, बावजूद इसके कर्मचारियों की वेतन विसंगति और ग्रेड पे से जुड़ी मांगों का वर्षों से समाधान नहीं हो पाया है। संगठन ने इसी क्रम में विभागीय मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य विभाग के सचिव तथा संचालक संजीव झा को भी ज्ञापन देकर नर्सिंग संवर्ग के ग्रेड पे में वृद्धि की मांग दोहराई है।
2018 की कमेटी की सिफारिशें अब तक लागू नहीं होने का दावा
छत्तीसगढ़ प्रदेश नर्सेस एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष सुमन शर्मा ने कहा कि नर्सिंग स्टाफ के ग्रेड पे में वृद्धि सहित विभिन्न मांगों को लेकर वर्ष 2018 में आंदोलन किया गया था। संगठन का दावा है कि उस आंदोलन के दौरान कई नर्सिंग कर्मचारियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और उन्हें कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
आंदोलन के बाद शासन स्तर पर नर्सिंग संवर्ग की मांगों के निराकरण के लिए एक कमेटी गठित की गई थी। एसोसिएशन का दावा है कि कमेटी ने ग्रेड पे बढ़ाने से संबंधित अनुशंसाएं भी की थीं, लेकिन करीब आठ वर्ष बीत जाने के बावजूद इन सिफारिशों को लागू नहीं किया गया। संगठन के मुताबिक इस अवधि में कई बार मंत्रियों और विभागीय अधिकारियों के समक्ष लिखित एवं मौखिक रूप से मांगें रखी गईं, लेकिन अब तक अपेक्षित समाधान नहीं हो सका है।
छत्तीसगढ़ में स्टाफ नर्सों का वेतन कम होने का आरोप
एसोसिएशन ने अपने मांगपत्र में कहा है कि केंद्र सरकार और अन्य निकटवर्ती राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ के स्टाफ नर्सों का वेतन अपेक्षाकृत कम है। संगठन ने वर्ष 2018 में गठित कमेटी की अनुशंसाओं के अनुरूप ग्रेड पे में वृद्धि कर वेतन विसंगति दूर करने की मांग की है। नर्सिंग कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से मांग उठाए जाने के बावजूद समाधान नहीं होने के कारण संवर्ग में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
2023 के आंदोलन का भी दिया हवाला
नर्सेस एसोसिएशन ने वर्ष 2023 में छत्तीसगढ़ हेल्थ फेडरेशन के बैनर तले हुए बड़े आंदोलन का भी हवाला दिया है। संगठन का दावा है कि उस आंदोलन के बाद भी उनकी मांगों का स्थायी समाधान नहीं हुआ और इसके बजाय 2500 से अधिक कर्मचारियों को निलंबन एवं बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
एसोसिएशन का कहना है कि लगातार आंदोलनों और मांगों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं होने से नर्सिंग संवर्ग में नाराजगी और गहरी हुई है।
30 अक्टूबर को राजधानी में महारैली की तैयारी
7 अक्टूबर के ज्ञापन अभियान के बाद अब एसोसिएशन ने आंदोलन का अगला चरण भी घोषित कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष सुमन शर्मा के अनुसार यदि सरकार ने मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो 30 अक्टूबर 2026 को राजधानी में प्रदेशव्यापी विशाल महारैली एवं धरना आयोजित किया जाएगा। संगठन ने स्पष्ट किया है कि 7 अक्टूबर का ज्ञापन अभियान सरकार को मांगों के प्रति एक बार फिर गंभीरता से अवगत कराने का प्रयास है। यदि इसके बाद भी मांगों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और तेज किया जाएगा।
दीपावली तक समाधान नहीं तो अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि दीपावली तक ग्रेड पे में वृद्धि और अन्य लंबित मांगों का निराकरण नहीं किया गया, तो इसके बाद नर्सिंग कर्मचारी अनिश्चितकालीन आंदोलन की राह पर जा सकते हैं।
संगठन ने शासन को दिए सूचना पत्र में कहा है कि लगातार मांगों की अनदेखी के कारण प्रदेशभर के नर्सिंग कर्मचारी निराश और आक्रोशित हैं। यदि आंदोलन अनिश्चितकालीन रूप लेता है तो इसका असर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है। एसोसिएशन ने कहा है कि स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावित होने की स्थिति में आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। संगठन ने ऐसी किसी भी स्थिति के लिए शासन-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने की बात कही है।
अब सरकार के रुख पर टिकी नजर
7 अक्टूबर को प्रदेशभर में हुए ज्ञापन अभियान के बाद अब नर्सिंग संवर्ग की नजर सरकार के अगले कदम पर है। वर्षों पुरानी वेतन विसंगति, ग्रेड पे में वृद्धि और 2018 की कमेटी की अनुशंसाओं को लागू करने की मांग को लेकर सरकार क्या रुख अपनाती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
फिलहाल नर्सिंग एसोसिएशन ने 30 अक्टूबर की महारैली का ऐलान कर सरकार को संकेत दे दिया है कि यदि मांगों पर जल्द ठोस निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। इसके बाद दीपावली तक समाधान नहीं होने की स्थिति में अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकार, दोनों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

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