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नक्सल का साया छंटा, फिर भी शिक्षा का ‘वनवास’ कायम: 100 किमी सफर तय कर परीक्षा देने मजबूर औंधी के छात्र

NBP NEWS/ औंधी, 07 अक्टूबर 
कभी नक्सल गतिविधियों के लिए संवेदनशील माने जाने वाला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला अब शांति और सुरक्षा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। लेकिन जिले के वनांचल क्षेत्र औंधी के कॉलेज विद्यार्थियों की एक पुरानी समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है। औंधी के शासकीय नवीन महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं को परीक्षा देने के लिए करीब 40 से 50 किलोमीटर दूर मानपुर जाना पड़ता है। आने-जाने में यह दूरी करीब 100 किलोमीटर तक पहुंच जाती है।

इसी बीच प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा के जिले के दो दिवसीय दौरे से औंधी के विद्यार्थियों की उम्मीदें फिर बढ़ गई हैं। मंत्री 6 अक्टूबर को मोहला पहुंचे थे और आज 7 अक्टूबर को मोहला के ऐतिहासिक दशहरा मैदान में आयोजित जिला स्तरीय ‘सेवा ज्योति यात्रा’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या मंत्री औंधी कॉलेज के विद्यार्थियों की वर्षों पुरानी परीक्षा केंद्र की मांग पर कोई ठोस निर्णय लेंगे?

परीक्षा के लिए 100 किमी का सफर, छात्राओं को सबसे ज्यादा परेशानी

औंधी स्वयं एक पूर्ण तहसील मुख्यालय है। यहां थाना, तहसील कार्यालय और राजस्व विभाग सहित प्रशासनिक व्यवस्थाएं मौजूद हैं। इसके बावजूद कॉलेज विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए मानपुर जाना पड़ता है।

विशेषकर परीक्षा की पहली पाली में शामिल होने वाले दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों और छात्राओं को सुबह भोर में ही घर से निकलना पड़ता है। लंबी दूरी का सफर न केवल समय और आर्थिक बोझ बढ़ाता है, बल्कि छात्र-छात्राओं के लिए शारीरिक और मानसिक परेशानी का कारण भी बनता है।

बाघ का आतंक एक बड़ी समस्या
औंधी क्षेत्र में बाघ का आतंक फैल हुआ है ग्रामीण दहशत में रहते हैं, ऐसे में कॉलेज के विद्यार्थियों को भोर सवेर अपने घर से जंगल रास्ते मानपुर के लिए निकलना कही न कही अपनी मौत को दावत देना है।

सुरक्षा का तर्क, लेकिन बोर्ड परीक्षा और नवोदय के लिए औंधी में व्यवस्था

औंधी में परीक्षा केंद्र नहीं बनाए जाने के पीछे अक्सर सुरक्षा और प्रश्नपत्रों की गोपनीयता से जुड़ी दलीलें सामने आती रही हैं। हालांकि विद्यार्थियों का कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था परीक्षा आयोजित करने के लिए पर्याप्त नहीं है, तो फिर औंधी में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं किस तरह सफलतापूर्वक आयोजित होती रही हैं?

बताया जाता है कि बोर्ड परीक्षाओं के प्रश्नपत्र औंधी थाने में सुरक्षित रखे जाते हैं और तहसील प्रशासन की निगरानी में परीक्षा प्रक्रिया पूरी होती है। इसके अलावा नवोदय प्रवेश परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाएं भी औंधी में आयोजित होती रही हैं।

ऐसे में विद्यार्थियों का सवाल है कि जब बोर्ड और अन्य महत्वपूर्ण परीक्षाओं के लिए स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा किया जा सकता है, तो कॉलेज परीक्षा के लिए यही व्यवस्था क्यों नहीं अपनाई जा सकती?

कॉलेज भवन निर्माणाधीन, लेकिन पढ़ाई औंधी में ही जारी

परीक्षा केंद्र को लेकर एक अन्य तर्क कॉलेज भवन के निर्माणाधीन होने का दिया जाता है। लेकिन विद्यार्थियों का कहना है कि भवन निर्माणाधीन होने के बावजूद वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कॉलेज की नियमित कक्षाएं औंधी में ही संचालित हो रही हैं।

वर्तमान में कॉलेज में दो नियमित प्रोफेसर और एक बाबू के पदस्थ होने की जानकारी भी सामने आई है। जब पूरे शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थी औंधी में पढ़ाई कर सकते हैं और शिक्षक वहीं अध्यापन करा सकते हैं, तो परीक्षा के लिए कुछ दिनों की वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकती—यह सवाल लगातार उठ रहा है।

भवन की देरी का खामियाजा छात्र क्यों भुगतें?

विद्यार्थियों का तर्क है कि यदि कॉलेज भवन के निर्माण में देरी हुई है, तो इसके लिए विद्यार्थियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। परीक्षा केंद्र की व्यवस्था नहीं होने का सीधा असर उन ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों पर पड़ रहा है, जिन्हें हर परीक्षा के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

छात्रों का कहना है कि औंधी में उपलब्ध शासकीय भवनों में प्रशासनिक समन्वय के साथ अस्थायी परीक्षा केंद्र बनाया जा सकता है। इससे विद्यार्थियों को राहत मिलने के साथ परीक्षा व्यवस्था भी स्थानीय स्तर पर संचालित हो सकती है।

मंत्री के दौरे से बढ़ी उम्मीदें

उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा के मोहला दौरे के बीच अब औंधी के विद्यार्थियों की नजरें 7 अक्टूबर के कार्यक्रम पर टिकी हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से स्थानीय परीक्षा केंद्र की मांग को लेकर ज्ञापन और अन्य माध्यमों से अपनी बात शासन-प्रशासन तक पहुंचाते रहे हैं।

अब जब स्वयं उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री जिले में मौजूद हैं, तो विद्यार्थियों को उम्मीद है कि उनकी समस्या पर मौके पर ही संज्ञान लिया जा सकता है।

सवाल अब यही है—क्या उच्च शिक्षा मंत्री औंधी के विद्यार्थियों की वर्षों पुरानी मांग को सुनेंगे? क्या औंधी में स्थानीय स्तर पर परीक्षा केंद्र की वैकल्पिक व्यवस्था का रास्ता खुलेगा? या फिर वनांचल के इन युवाओं को परीक्षा देने के लिए 100 किलोमीटर का सफर आगे भी तय करना पड़ेगा? क्या बाघ के खौफ के बीच गांव से निकलने को मजबूर विद्यार्थियों के परीक्षा केंद्र पर जाने में विराम लगेगा?

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