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पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में निजी साहूकारी पर सवाल! SDM हेमेंद्र भूआर्य ने कहा नोटिस देकर करेंगे जांच!

NBP NEWS/ मोहला, 11 सितंबर 2026
पांचवीं अनुसूची क्षेत्र मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में कथित ऊंची ब्याज दर पर निजी तौर पर कर्ज देने का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। जिले में जोंक रूपी साहूकार जो क्षेत्र के ग्रामीणों का खून चूसकर मोटे हो रहे हैं।

अनुविभागीय दंडाधिकारी अधिकारी (राजस्व) मोहला के समक्ष दिए गए दो अलग-अलग आवेदनों में कर्जदारों ने एक महिला साहूकार के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन से जांच और राहत की मांग की है।

शिकायतों में मोहला निवासी कल्पना गुप्ता, पति प्रतीक गुप्ता का नाम (गुप्ता दुकान) फव्वारा चौक सामने आया है। आवेदकों का आरोप है कि जरूरतमंद लोगों को निजी तौर पर रकम देकर उनसे अत्यधिक ब्याज वसूला जा रहा है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक ब्याज की दर इतनी अधिक है कि मूलधन चुकाने के बाद भी कर्ज का बोझ समाप्त नहीं हो रहा है।

20 हजार रुपये के कर्ज पर हर सप्ताह 1 हजार रुपये ब्याज का आरोप

पहले आवेदन में मोहला निवासी महिला ने बताया है कि वह कपड़े का व्यवसाय करती हैं। आवेदन के मुताबिक करीब एक वर्ष पहले दुकान के लिए सामान खरीदने के उद्देश्य से उन्होंने 20 हजार रुपये उधार लिए थे।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस रकम पर हर सप्ताह 1 हजार रुपये ब्याज तय किया गया था। आवेदिका का दावा है कि लगातार ब्याज चुकाने के बावजूद रकम का हिसाब खत्म नहीं हुआ और अब उस पर मूलधन एवं ब्याज के नाम पर बड़ी रकम की मांग की जा रही है। ब्याज के नाम पर लगभग 50 हजार रुपए की मांग कि जा रही है। जबकि मूलधन से दोगुना ब्याज दे चुकी है।

आरोप है कि कल्पना गुप्ता पैसे देने से पहले एक कोरे स्टाम्प में पेपर में हस्ताक्षर और कोरे चेक में दस्तखत करवा लेते हैं। पैसा मजबूरी और दबावपूर्वक होने की वजह से स्टाम्प पेपर और चेक को कोरा ले लेती है। ताकि भविष्य में कोई ऊंचे ब्याज दर में पैसे न चुका पाए तो मुंहमांगा रकम डालकर उसका चेक बाउंस करवा कर एफ आई आर दर्ज करवा सके साथ ही स्टांप पेपर में भी अपने मनमर्जी से कुछ भी लिख सके।

आवेदन में कर्जदाता की ओर से दबाव बनाए जाने तथा भुगतान के लिए दस्तावेजों/चेक का इस्तेमाल किए जाने की आशंका भी जताई गई है। शिकायतकर्ता ने अपनी आर्थिक स्थिति खराब होने का हवाला देते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।

दूसरे आवेदन में 10 हजार रुपये पर 500 रुपये साप्ताहिक ब्याज का दावा

दूसरे आवेदन में भी इसी तरह की शिकायत सामने आई है। इसमें आवेदक ने बताया है कि आवश्यकता के समय 10 हजार रुपये उधार लिए गए थे। शिकायत के अनुसार इस रकम पर हर सप्ताह 500 रुपये ब्याज लिया जा रहा था।

आवेदक का आरोप है कि लगातार ब्याज देने के बावजूद कर्ज खत्म नहीं हुआ और अब भी रकम की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि स्कूटी की आर सी कार्ड को बतौर गिरवी रखा गया है।शिकायतकर्ता ने प्रशासन से पूरे लेनदेन की जांच कराने और राहत दिलाने की मांग की है।

20 प्रतिशत मासिक ब्याज का आरोप, सालाना दर 240 प्रतिशत तक पहुंचने का दावा

शिकायतों को लेकर अब सबसे गंभीर सवाल कथित ब्याज दर को लेकर उठ रहा है। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि कल्पना गुप्ता द्वारा करीब 20 प्रतिशत मासिक ब्याज की दर से रकम दी जाती है, जो साधारण वार्षिक गणना के आधार पर 240 प्रतिशत प्रति वर्ष बैठती है।

जोंक की तरह आदिवासियों का खून चूस रहे हैं साहूकार, मजबूरियों का फायदा उठा कर भोले भाले आदिवासियों को अपने कर्ज के दलदल में फंसा कर मोटा पैसा कमा रहे हैं।

जानकारों की माने तो चिलमटोला निवासी ने कर्ज अदा करने के लिए जमीन तक बेंच दी है। कल्पना के पास अनेकों कर्जदार है, जो अपना कर्ज अदा करने के लिए अलग अलग तरीकों से कर्ज के जाल और मानसिक प्रताड़ना के शिकार होते जा रहे हैं। कइयों ने अपनी जमीन तक गवां दी इन जोंक रूपी साहूकारों के सामने।

समय समय पर चेक बाउंस करवाने का धमकी देना साहूकारों की मुख्य चाल होती है। साथ गुंडे बुलवाकर बवाल और धमकी देने की कहानी तक सुनाते फिरते हैं।

यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो यह अत्यंत गंभीर मामला हो सकता है। 

पेसा क्षेत्र में साहूकारी को लेकर कानून क्या कहता है?

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी क्षेत्र के संदर्भ में यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि क्षेत्र के मोहला, मानपुर और चौकी के आदिवासी विकासखंड अनुसूचित क्षेत्र में शामिल रहे हैं। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय की सूची में चौकी, मानपुर और मोहला को अनुसू00चित क्षेत्र के रूप में दर्ज किया गया है। 

छत्तीसगढ़ सरकार के दस्तावेज में भी स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि छत्तीसगढ़ साहूकारी अधिनियम, 1934 के तहत पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में मनी लेंडिंग पर पूर्ण प्रतिबंध है। 

2010 के संशोधन के बाद अधिनियम में यह व्यवस्था की गई कि कानून का विस्तार छत्तीसगढ़ में निर्दिष्ट अनुसूचित क्षेत्रों को छोड़कर होगा। इसी कानूनी व्यवस्था के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में मनी-लेंडिंग के लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने पर रोक है। 

इसके अलावा अधिनियम की धारा 11-F के अनुसार वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र के बिना मनी-लेंडिंग का व्यवसाय करना दंडनीय है और अनुसूचित क्षेत्र में इसके उल्लंघन पर दो वर्ष तक की सजा या 10 हजार रुपये तक जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है। 

अब प्रशासन के सामने बड़ा सवाल

दोनों आवेदनों में लगाए गए आरोपों के बाद अब सवाल यह है कि क्या संबंधित व्यक्ति के पास वैध रूप से ऐसा लेनदेन करने की कोई कानूनी अनुमति है? क्या शिकायतों में बताई गई ब्याज दर वास्तव में वसूली जा रही थी? कितने लोगों को इस तरह रकम दी गई? कितनी रकम मूलधन के रूप में दी गई और अब तक कितनी राशि ब्याज के रूप में वसूली जा चुकी है?

इन तमाम सवालों का जवाब लेनदेन के दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, चेक, रसीद, हिसाब-किताब और संबंधित पक्षों के बयान से सामने आ सकता है।

अनुविभागीय दंडाधिकारी मोहला हेमेंद्र भूआर्य ने उकताशय की पुष्टि कर बताया कि आवेदन प्राप्त हुए हैं, संबंधित देनदार को नोटिस तमिल कर मामले की जांच की जाएगी और अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में ये मामला गंभीर है।

ग्रामसभा और प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण

पेसा व्यवस्था में अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा की भूमिका महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार के अनुसार PESA का उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा को महत्वपूर्ण भूमिका देकर स्थानीय स्वशासन को मजबूत करना है। 

छत्तीसगढ़ से संबंधित दस्तावेजों में अनुसूचित क्षेत्रों में मनी लेंडिंग और मनी लेंडर्स पर ग्रामसभा/पंचायत स्तर पर नियंत्रण से संबंधित प्रावधानों और प्रस्तावित व्यवस्थाओं का उल्लेख भी मिलता है।

साहूकार अधिनियम 1934 को छत्तीसगढ़ सरकार ने 2010 में अनुसूचित क्षेत्रों के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। ग्राम सभा को साहूकार अधिनियम 1934 के तहत अनुसूचित जनजातियों को धन उधार देने पर नियंत्रण रखने की शक्ति देता है। पेसा अधिनियम में कहा है कि केवल भारतीय रिजर्व बैंक और SEBI में पंजीकृत संस्थाएं ही अनुसूचित क्षेत्र में कर्ज का लेन देन करेगी।

अधिनियम ये भी कहती है कि ग्राम सभा के बिना जानकारी के कोई व्यक्ति या संस्था भी ब्याज पर लेन देन करता है तो वह लेन देन अवैध माना जाएगा एवं ऋण देने वाले व्यक्ति को कर्जदार से बलपूर्वक वसूली करने का कोई अधिकार नहीं होगा।

अधिनियम के तहत ये भी कहा गया है कि किसी भी कर्ज के बारे में ब्याज के रूप में कोई देनदारी किसी भी हालत में मूलधन से अधिक नहीं होगी। साथ ही अनुसूचित क्षेत्रों में निजी मनी लैंडिंग एजेंसी को कोई मनी लैंडिंग लाइसेंस नहीं दिया जाएगा।

ग्राम पंचायत मोहला सचिव कुबेर राम चोरिया ने बताया कि पांचवीं अनुसूची (पेसा) क्षेत्र ग्राम पंचायत मोहला में साहूकार प्रथा पूर्णतः प्रतिबंधित है। ग्राम सभा से न ही किसी ने अनुमति ली है और न ही कोई जानकारी है। अगर ब्याज में पैसे दे रहा है तो वो अवैध है। ग्राम सभा से किसी को कोई लाइसेंस नहीं दिया जाएगा। 


ऐसे में मोहला में सामने आए इन दोनों मामलों ने सिर्फ कथित ऊंची ब्याज दर का मुद्दा ही नहीं उठाया है, बल्कि पांचवीं अनुसूची, पेसा और अनुसूचित क्षेत्रों में साहूकारी पर लागू कानूनी व्यवस्था के प्रभावी पालन को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही जिले भर और कितने जोंक रूपी साहूकार सक्रिय हैं?

अब देखना होगा कि प्रशासन इन शिकायतों की जांच किस स्तर पर कराता है और क्या कार्रवाई सामने आती है।

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