Ticker

6/recent/ticker-posts

Ad Code

शिक्षक दिवस पर लाल श्याम शाह कॉलेज में गुरुजनों को नमन, क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति और पूर्वजों के योगदान को किया याद

NBP NEWS/ मोहला, 07 सितंबर 
लाल श्याम शाह महाविद्यालय, मोहला में शिक्षक दिवस का कार्यक्रम उत्साह, सम्मान और गरिमापूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों के सम्मान में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, भाषण एवं गीत प्रस्तुत किए। इस अवसर पर अतिथियों एवं प्राध्यापकों ने विद्यार्थियों को शिक्षा, संस्कार और सामाजिक एकजुटता का महत्व बताया।

कार्यक्रम के दौरान लाल लक्ष्मेंद्र शाह ने भारत के महान शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नमन करते हुए उनके विचारों और शिक्षाओं को याद किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल शिक्षा देने का कार्य नहीं करते, बल्कि वे समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने जीवन में गुरुजनों के बताए मार्ग और आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया।

पूर्वजों के योगदान को गुरुओं के समान बताया

श्री शाह ने अपने संबोधन में मोहला-मानपुर क्षेत्र के पूर्वजों के योगदान और उनकी दी गई नसीहतों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की पहचान केवल इसके भौगोलिक स्वरूप से नहीं, बल्कि यहां की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकजुटता से भी है।

उन्होंने क्षेत्र के पूर्वजों के योगदान को गुरुओं के तुल्य बताते हुए कहा कि उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए संस्कृति और परंपराओं को संजोकर रखा। उनके प्रयासों और सीख को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाना भी हमारी जिम्मेदारी है।

संस्कृति और परंपराओं को भू-राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने की पहल

अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही संस्कृति और परंपराओं को अब भू-राजस्व अभिलेखों में दर्ज किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। उन्होंने इसे राज्य में एक महत्वपूर्ण नवाचार के रूप में बताया।

उन्होंने कहा कि किसी क्षेत्र की संस्कृति और परंपरा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह वहां के लोगों के जीवन और सामाजिक व्यवहार में दिखाई देती है। मोहला-मानपुर क्षेत्र की विशिष्ट परंपराओं को दस्तावेज के रूप में संरक्षित करने की पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

शीतला दाई की परंपरा में दिखती है सामाजिक एकजुटता

श्री शाह ने क्षेत्र की सामाजिक एकजुटता का उदाहरण देते हुए साढ़े बारह जात की अदभुत परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यहां शीतला दाई के समक्ष सभी समाजों द्वारा तेल और हल्दी चढ़ाने की परंपरा रही है। उनके अनुसार यह परंपरा क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही सर्वसमाज की एकता और आपसी भाईचारे को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि मोहला-मानपुर क्षेत्र की संस्कृति में सभी समाजों की सहभागिता रही है और यही इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र की सामाजिक संरचना में आपसी सद्भाव और एकजुटता की परंपरा मजबूत रही है।

राष्ट्रपति के संभावित आगमन की जताई उम्मीद

श्री शाह ने कहा कि मोहला-मानपुर क्षेत्र की उच्च कोटि की संस्कृति और परंपराओं को देश के सामने रखने की आवश्यकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में महामहिम राष्ट्रपति का आगमन मोहला-मानपुर क्षेत्र में हो सकता है, जिससे यहां की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को करीब से देखने और समझने का अवसर मिलेगा।

विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए सांस्कृतिक कार्यक्रम

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने शिक्षकों के सम्मान में गीत, भाषण एवं विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। छात्र-शिक्षक संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके मार्गदर्शन और व्यक्तित्व निर्माण में योगदान को याद किया।

कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य व जनभागीदारी समिति अध्यक्ष नर्सिंग भंडारी, पुलकित खांडलवाल सहित अन्य अतिथिगण मौजूद रहे। महाविद्यालय के जी.पी. चन्द्रवंशी (सहायक प्राध्यापक), सुखदास साहू, डॉ. रीना कोमरे,  प्रमोद जुरेशिया,  भानुप्रताप वर्मा, डॉ. आकृति देवांगन, डॉ. अमित कुमार गुप्ता, मनोज कुमार, अनामिका साहू एवं  अमीषा रामटेककर सहित प्राध्यापकगण की उपस्थिति रही।

शिक्षक दिवस का यह आयोजन जहां गुरुजनों के सम्मान और उनके योगदान को समर्पित रहा, वहीं मोहला-मानपुर की संस्कृति, परंपरा, पूर्वजों की विरासत और सर्वसमाज की एकजुटता पर भी महत्वपूर्ण संदेश दिया गया। कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों और शिक्षकों की उत्साहपूर्ण सहभागिता के साथ हुआ।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ