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छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ की आवाज बुलंद! 7 सूत्रीय मांगों को लेकर जिला प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

NBP NEWS/मोहला / प्रवेश कुमार, 02 सितंबर
जनजातीय समाज के संवैधानिक अधिकारों, शिक्षा, प्रतिनिधित्व और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में आवाज बुलंद हुई है। छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ, जिला इकाई मोहला-मानपुर-अं.चौकी ने जनजातीय समाज की विभिन्न आवश्यकताओं और अधिकारों को लेकर जिला प्रशासन को 7 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा है। 

संघ ने स्पष्ट रूप से मांग रखी है कि जनजातीय समाज से जुड़े विषयों को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखा जाए, बल्कि संवैधानिक प्रावधानों और समाज की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप ठोस एवं समयबद्ध कार्रवाई की जाए।

आरक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग

संघ ने सबसे प्रमुख मांगों में जिला स्तरीय आरक्षण रोस्टर तैयार करने की मांग उठाई है। संगठन का कहना है कि आरक्षण से संबंधित व्यवस्था को स्पष्ट और व्यवस्थित करने के लिए जिला स्तर पर रोस्टर का निर्माण कर उसे शासन के समक्ष प्रस्ताव के रूप में भेजा जाना जरूरी है। 

अत्याचार निवारण कानून की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचे

जनजातीय समाज के कानूनी अधिकारों और सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण मांग रखी गई है। संघ ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के संबंध में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है, ताकि समाज के लोगों को कानून में मिले अधिकारों और संरक्षण की जानकारी मिल सके। 

ट्राइबल सब-प्लान बजट में समाज की भागीदारी

ज्ञापन में अनुसूचित जनजाति बजट को लेकर भी गंभीर मुद्दा उठाया गया है। संघ ने जिला योजना एवं कार्यान्वयन समिति की निरंतर बैठकें आयोजित करने, जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों से चर्चा करने और जिले के ट्राइबल सब-प्लान बजट का प्रस्ताव शासन को भेजने की मांग की है। 

यह मांग सीधे तौर पर जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए निर्धारित योजनाओं और बजट के प्रभावी उपयोग एवं समाज की जरूरतों के अनुरूप प्राथमिकता तय करने से जुड़ी है।

हर विभाग में संपर्क अधिकारी नियुक्त करने की मांग

संघ ने जिले के सभी विभागों में छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 के तहत संपर्क अधिकारी नियुक्त करने की मांग की है। इससे आरक्षण से संबंधित विषयों के लिए विभागीय स्तर पर जिम्मेदारी और समन्वय सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है। 

शिक्षा को लेकर बड़ा मुद्दा—छात्रावासों की मांग

जनजातीय विद्यार्थियों की शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण को लेकर भी संघ ने अहम मांगें रखी हैं।

ज्ञापन में हायर सेकेंडरी स्कूल वाले गांवों और महाविद्यालय वाले गांवों में पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों के निर्माण के प्रस्ताव शीघ्र भेजने की मांग की गई है।

साथ ही ब्लॉक मुख्यालयों में संचालित पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों में सीटों की संख्या बढ़ाने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए ई-लाइब्रेरी की सुविधा विकसित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। 

अनुच्छेद 275(1) के तहत समाज की जरूरतों को मिले प्राथमिकता

संघ ने संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत शासन को प्रस्ताव भेजने से पहले जनजातीय समाज के प्रमुखों के साथ बैठक करने और समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रस्ताव तैयार करने की मांग की है। 

सात मांगें, एक बड़ा सवाल—जनजातीय समाज के अधिकारों का प्रभावी क्रियान्वयन कब?

संगठन द्वारा सौंपा गया यह ज्ञापन महज सात मांगों की सूची नहीं, बल्कि शिक्षा, आरक्षण, बजट, कानूनी जागरूकता और प्रशासनिक भागीदारी से जुड़े जनजातीय समाज के मुद्दों को संस्थागत रूप से आगे बढ़ाने की मांग के रूप में सामने आया है।

अब निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर हैं कि इन मांगों पर कितनी तेजी से पहल होती है और जनजातीय समाज से जुड़े मुद्दों को शासन-प्रशासन की प्राथमिकताओं में किस स्तर पर स्थान मिलता है।

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