शिक्षक दिवस के अवसर पर दिए जाने वाले राज्यपाल पुरस्कार को लेकर मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। एनिशपुरी गोस्वामी ने राज्यपाल छत्तीसगढ़ के नाम एक शिकायत पत्र भेजकर जिले से राज्यपाल पुरस्कार के लिए नामांकित दो शिक्षकों की पात्रता, शैक्षणिक योगदान और चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
यह शिकायत 4 अगस्त 2026 को राज्यपाल भवन, छत्तीसगढ़ के लिए भेजी गई है। पत्र में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी के माध्यम से राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप करते हुए निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
दो शिक्षकों के नामांकन पर जताई आपत्ति
शिकायत पत्र के अनुसार, अंबागढ़ चौकी विकासखंड के टोलागांव में पदस्थ प्रधान पाठक भजन लाल साहू तथा अंबागढ़ चौकी विकासखंड के सिरलगढ़ प्राथमिक शाला के प्रधान पाठक योगेंद्र देवांगन को राज्यपाल पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है।
शिकायतकर्ता ने दोनों शिक्षकों के नामांकन की पात्रता एवं चयन प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए कहा है कि निर्धारित मापदंडों के अनुरूप उनके वास्तविक शैक्षणिक योगदान, विद्यालय में उपस्थिति, विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास तथा अन्य निर्धारित मानकों का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है।
भजन लाल साहू को लेकर लगाए गए ये आरोप
पत्र में दावा किया गया है कि टोलागांव में पदस्थ प्रधान पाठक भजन लाल साहू विद्यालयीन दायित्वों के अतिरिक्त एक विशेष संगठन एवं शिक्षक फेडरेशन की गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वे फेडरेशन के माध्यम से सरकार का विरोध भी करते रहे हैं।
शिकायत पत्र में यह भी कहा गया है कि पदस्थापना स्थल पर रहने के बजाय शिक्षक दंपती दूसरे जिले से विद्यालय संबंधी दायित्वों के लिए आवागमन करते हैं। पत्र में यह उल्लेख भी किया गया है कि उनकी पत्नी उसी विद्यालय में सहायक शिक्षक के पद पर पदस्थ हैं।
शिकायतकर्ता ने यह भी सवाल उठाया है कि भजन लाल साहू को वर्ष 2024-25 में जिला स्तरीय उत्कृष्ट शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इसके बावजूद अब उन्हें राज्यपाल पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है।
विद्यालय निरीक्षण का हवाला, विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर पर चिंता
शिकायत पत्र में विद्यालय के निरीक्षण का हवाला देते हुए विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। पत्र के अनुसार, अध्ययनरत कुछ छात्र-छात्राओं को सही अक्षर ज्ञान, महापुरुषों के नाम तथा देश के राष्ट्रपति, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से संबंधित सामान्य जानकारी तक नहीं होने का दावा किया गया है।
शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि किसी विद्यालय के अनेक विद्यार्थी अपेक्षित शैक्षणिक स्तर प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं और प्रतिभागी परीक्षा में विद्यालय के विद्यार्थियों की उपलब्धियां संतोषजनक नहीं हैं, तो पुरस्कार के लिए नामित शिक्षक के वास्तविक शैक्षणिक योगदान और विद्यार्थियों की उपलब्धियों का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
हालांकि, ये सभी बातें शिकायत पत्र में लगाए गए आरोप एवं दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि जांच के माध्यम से होना बाकी है।
योगेंद्र देवांगन के नामांकन पर भी सवाल
शिकायत पत्र में सिरलगढ़ प्राथमिक शाला के प्रधान पाठक योगेंद्र देवांगन के नामांकन पर भी सवाल उठाए गए हैं।
पत्र के अनुसार, उनकी पदस्थापना उक्त विद्यालय में लगभग दो वर्ष से है। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि इसी विद्यालय के सहायक शिक्षक नीलकंठ कोमरे को वर्ष 2024-25 में राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। ऐसे में एक ही विद्यालय के दो शिक्षकों को कम अवधि के अंतराल में राज्यपाल पुरस्कार के लिए चयनित किए जाने का आधार क्या है, इस पर निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
शिकायत में पूछा गया है कि क्या दोनों नामांकित शिक्षकों के चयन में निर्धारित मापदंडों और प्रक्रिया का पूर्ण रूप से पालन किया गया है।
दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों की अनदेखी का आरोप
शिकायत पत्र में यह भी कहा गया है कि प्रदेश के दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों में अनेक शिक्षक कठिन परिस्थितियों के बावजूद पूरी निष्ठा, समर्पण और कर्तव्यपरायणता के साथ विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं सर्वांगीण विकास के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि ऐसे योग्य और समर्पित शिक्षकों की उपेक्षा कर पुरस्कार चयन प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लगता है, तो इससे न केवल संबंधित शिक्षकों का मनोबल प्रभावित होता है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में कार्यरत ईमानदार एवं कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारियों के बीच भी निराशा पैदा हो सकती है।
राज्यपाल से निष्पक्ष और त्वरित जांच की मांग
पत्र में राज्यपाल से अनुरोध किया गया है कि दोनों शिक्षकों की पुरस्कार हेतु पात्रता, शैक्षणिक योगदान, विद्यार्थियों के शैक्षणिक परिणाम तथा चयन प्रक्रिया में अपनाए गए मापदंडों की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कराई जाए।
साथ ही कहा गया है कि यदि जांच के दौरान नामांकन निर्धारित मापदंडों के अनुरूप नहीं पाया जाता है, तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए तथा वास्तव में योग्य शिक्षकों को पुरस्कार का अवसर प्रदान किया जाए।
अब देखना होगा कि शिकायत में उठाए गए आरोपों पर शिक्षा विभाग और संबंधित प्रशासन क्या रुख अपनाता है तथा क्या नामांकित शिक्षकों की पात्रता और चयन प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराई जाती है।
महत्वपूर्ण: इस मामले में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत पत्र पर आधारित हैं। आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण संबंधित विभागीय जांच अथवा सक्षम प्राधिकारी की रिपोर्ट के बाद ही किया जा सकेगा।
0 टिप्पणियाँ