गांव के नौनिहालों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया नया आंगनबाड़ी भवन तैयार होकर खड़ा है, लेकिन इसके बावजूद बच्चों को अब भी पंचायत भवन में संचालित पुराने आंगनबाड़ी केंद्र में बैठना पड़ रहा है। ऐसे में ग्रामीणों के बीच सवाल उठ रहा है कि जब भवन बनकर तैयार है तो आखिर उसका संचालन शुरू कराने में अड़चन कहां है?
मामला सिर्फ नए भवन के उपयोग तक सीमित नहीं है। पंचायत भवन के सामने पानी टंकी के नीचे बड़े-बड़े खुले गड्ढे भी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। इसी परिसर में बच्चों और ग्रामीणों की आवाजाही रहती है। ऐसे में किसी अनहोनी से पहले इन गड्ढों को सुरक्षित कराने की जरूरत है।
चुकी गड्ढे लगभग पांच फीट का है बारिश में गंदे पानी का भरना और उसमें खेलते नौनिहाल बच्चों के गिर जाने को इन्कार नहीं किया जा सकता है।
भवन तैयार, लेकिन बच्चों को अब भी पुराने परिसर में बैठना पड़ रहा
तिरपेमेटा में नवनिर्मित आंगनबाड़ी भवन तैयार होने के बावजूद उसका संचालन शुरू नहीं होना ग्रामीणों को खटक रहा है। ग्रामीणों का सवाल है कि क्या भवन का हैंडओवर बाकी है? क्या कोई प्रशासनिक प्रक्रिया लंबित है? या फिर संबंधित विभाग की ओर से संचालन शुरू कराने में लापरवाही बरती जा रही है?
ग्रामीणों का कहना है कि जिस उद्देश्य से भवन का निर्माण किया गया है, उसका लाभ बच्चों को समय पर मिलना चाहिए। भवन तैयार होने के बाद भी यदि बच्चे पंचायत परिसर में बैठ रहे हैं तो निर्माण पर खर्च की गई राशि का वास्तविक लाभ आखिर कब मिलेगा?
महिला एवं बाल विकास विभाग की निगरानी पर भी सवाल
आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था और संचालन की निगरानी महिला एवं बाल विकास विभाग के जिम्मे है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि नवनिर्मित भवन तैयार होने के बावजूद केंद्र का संचालन पुराने परिसर में क्यों जारी है?
क्या विभाग के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया है?
क्या भवन संचालन के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है?
अगर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो केंद्र नए भवन में क्यों नहीं शिफ्ट हुआ?
और यदि प्रक्रिया अधूरी है तो उसे पूरा कराने की जिम्मेदारी किसकी है?
इन सवालों का जवाब अब ग्रामीण संबंधित विभाग से चाहते हैं।
खुले गड्ढे बने बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा
पंचायत भवन परिसर में पानी टंकी के नीचे खुले पड़े गड्ढे इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू हैं। छोटे बच्चों की नियमित आवाजाही वाले स्थान पर इस तरह के गड्ढों का खुला रहना किसी संभावित हादसे को न्योता दे सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि हादसा होने के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि खतरे को पहले ही खत्म किया जाए। प्रशासन और पंचायत को तत्काल गड्ढों को भरने या उनकी सुरक्षित घेराबंदी कराने की जरूरत है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी ने लिया संज्ञान
मामले को लेकर जिला कार्यक्रम अधिकारी समीर सौरभ ने बताया कि न्यूज के माध्यम से उन्हें मामले की जानकारी और संज्ञान मिला है। उन्होंने कहा कि जल्द ही गड्ढे को ढकने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि नई आंगनबाड़ी बिल्डिंग बन चुकी है जानकारी मिली है, किन कारणों से रुका हुआ है जानकारी लेकर बिल्डिंग का हैंडओवर जल्द करवाया जाएगा। बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी तरह का खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए मीटिंग के माध्यम से सभी जिम्मेदार कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश दिए जा रहे हैं।
अब ग्रामीणों को कार्रवाई का इंतजार
तिरपेमेटा में अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि नया आंगनबाड़ी भवन कब खुलेगा, बल्कि सवाल बच्चों की सुरक्षा का भी है। एक ओर तैयार भवन उपयोग का इंतजार कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पंचायत परिसर में खुले गड्ढे खतरा बने हुए हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि नवनिर्मित भवन का हैंडओवर और संचालन जल्द शुरू कराया जाए तथा खुले गड्ढों को तत्काल सुरक्षित किया जाए।
अब देखना होगा कि विभागीय अधिकारियों के संज्ञान लेने के बाद मौके पर कार्रवाई कितनी जल्दी होती है।
भवन तैयार है, बच्चे तैयार हैं—अब सवाल है कि जिम्मेदार तंत्र कब तैयार होगा?
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