मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के मानपुर स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। शुक्रवार रात सड़क दुर्घटना में घायल एक युवक को बेहतर उपचार के लिए रेफर किया गया, लेकिन इसी दौरान मरीज को ले जाने वाली 108 एंबुलेंस के चालक के नशे की हालत में होने की बात सामने आई।
बताया जा रहा है कि दुर्घटना में घायल युवक को मानपुर स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद उसकी स्थिति को देखते हुए बेहतर उपचार के लिए रेफर किया गया। मरीज को आगे ले जाने के लिए 108 एंबुलेंस की व्यवस्था की गई, लेकिन मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार एंबुलेंस चालक अत्यधिक नशे की हालत में पाया गया।
डीजल नहीं होने की भी सामने आई बात
मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। बताया गया कि 108 एंबुलेंस में डीजल नहीं था। इसके चलते मरीज के परिजनों को कथित तौर पर अपने खर्च से एंबुलेंस में डीजल भरवाना पड़ा।
एक तरफ घायल मरीज को समय पर बेहतर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने की जरूरत थी, वहीं दूसरी ओर एंबुलेंस चालक के नशे में होने और वाहन में डीजल नहीं होने की बात सामने आने से 108 एम्बुलेंस सेवा प्रबंधन (ठेकेदार) और स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं।
मरीज की जान से खिलवाड़ का आरोप
108 एंबुलेंस आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है। दुर्घटना जैसे मामलों में मरीज को जल्द से जल्द सुरक्षित अस्पताल पहुंचाना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में यदि ड्यूटी पर तैनात चालक नशे की हालत में मिले और एंबुलेंस में ईंधन की व्यवस्था भी नहीं हो, तो यह व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का मामला बन सकता है। प्रबंधन नशे के आदी एम्बुलेंस ड्राइवरों की नियुक्ति आखिर क्यों करता है?
सूत्रों की माने तो शुक्रवार को दोपहर दो बजे से 108 एम्बुलेंस में डीजल नहीं है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल 108 प्रबंधन की जवाब देगी कौन तय करेगा ? अगर शिकायतें दोपहर से मिल रही है कि डीजल एम्बुलेंस में नहीं तो उसे भरवाएगा कौन ? जिम्मेदार ठेकेदार कब जिम्मेदारी निभाएंगे अपनी। जानकारों की माने तो कई दफा डीजल की समस्या उत्पन्न हो चुकी है, एम्बुलेंस जैसे जीवन रक्षक सेवा जिसे हमेशा तत्पर तैयार रहना पड़ता है, उसमें डीजल की समस्या पैदा होना प्रबंधन की गैर जिम्मेदारी को दिखाता है।
खंड चिकित्सा अधिकारी गिरीश खोबरागड़े मानपुर ने मामले की पुष्टि कर बताया कि 108 एम्बुलेंस चालक नशे की हालत में था, गाड़ी में डीजल नहीं था, इसलिए जीवन दीप समिति के एम्बुलेंस में परिजनों ने डीजल डलवाकर मरीज को राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज ले गए हैं। अगर गाड़ी में डीजल होता तो अन्य ड्राइवर की सहायता से मरीज को रेफर किया जाता उन्होंने ये भी बताया कि 108 एम्बुलेंस डिस्ट्रिक्ट प्रबंधक ने ड्राइवर को जॉब से हटाने की बात कही है।
खोबरागड़े के बयानों से पुष्टि हो रही है कि एम्बुलेंस में डीजल नहीं रहती है। ऐसे में गाड़ी ड्राइवर के साथ साथ 108 प्रबंधन पर भी कार्यवाही सुनिश्चित होना जरूरी है।
डीजल की समस्या को देखते हुए जीवन दीप समिति के एम्बुलेंस का सहारा लिया जा रहा है। समिति के अनुसार एम्बुलेंस में डीजल परिजनों को डलवाना पड़ता है।
स्थानीय लोगों और मरीज के परिजनों ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
ऐसे गंभीर मामलों में कब जिम्मेदार जनप्रतिनिधि ध्यान देंगे। बार बार डीजल समस्या उत्पन्न हो रहे एम्बुलेंस और स्वास्थय केंद्रों में हो रहे अव्यवस्थाओं पर सुध लेंगे। क्या एम्बुलेंस चालक और प्रबंधन के खिलाफ आवाज उठाकर नतीजे तक पहुंचेंगे?
ये भी देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
मानपुर स्वास्थ्य केंद्र से सामने आए इस मामले ने जिले की 108 एंबुलेंस सेवा और स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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