मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के सुदूर वनांचल ग्राम परेवाडीह में पेयजल संकट को लेकर प्रकाशित खबर का असर दिखाई देने लगा है।NBP NEWS में खबर प्रकाशित होने के बाद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग ने तत्काल संज्ञान लेते हुए गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।
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गौरतलब है कि ग्राम पंचायत मडियांनवाड़वी के आश्रित ग्राम परेवाडीह के ग्रामीण वर्षों से झरिया का पानी पीने को मजबूर थे। गांव में मौजूद एकमात्र हैंडपंप से लाल रंग का पानी निकलने की शिकायत ग्रामीणों ने की थी, जिसके कारण पीने और भोजन बनाने के लिए ग्रामीण तालाब के भीतर बने झरिया पर निर्भर थे। इस समस्या को लेकर ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई थी।
खबर सामने आने के बाद पीएचई विभाग की टीम दुर्गम रास्तों को पार करते हुए गांव पहुंची। बताया जा रहा है कि परेवाडीह जैसे सुदूर वनांचल गांव में पहुंचने वाला पीएचई विभाग पहला प्रशासनिक विभाग बना, जिसने मौके पर जाकर ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से सुना और समाधान की दिशा में कार्रवाई की।
विभाग द्वारा सबसे पहले गांव में पहले से स्थापित हैंडपंप के पानी की जांच करवाई गई। जांच रिपोर्ट में पानी की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाए जाने के बाद विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नए बोर के खनन का कार्य प्रारंभ कराया। नए बोर से पर्याप्त एवं गुणवत्तापूर्ण जल मिलने की संभावना जताई जा रही है।
पीएचई विभाग के अधिकारी ए पी शर्मा ने बताया कि ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से नए हैंडपंप के लिए बोर खनन कराया गया है। पानी की जांच पूर्ण होने के बाद हैंडपंप स्थापित किया जाएगा। आगामी दिनों में हैंडपंप स्थापना की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
ग्रामीणों ने विभाग की त्वरित कार्रवाई पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों बाद उनकी समस्या पर गंभीरता से ध्यान दिया गया है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि नए हैंडपंप के शुरू होने से उन्हें झरिया के पानी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और स्वच्छ पेयजल की उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हो सकेगा।
परेवाडीह जैसे दूरस्थ गांव में प्रशासनिक पहुंच और त्वरित कार्रवाई यह दर्शाती है कि समस्याओं को उजागर करने वाली NBP NEWS की पत्रकारिता और जिम्मेदार प्रशासनिक पहल मिलकर जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
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