आदिवासी बाहुल्य मोहला-मानपुर अं चौकी जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में केंद्र सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत कार्यरत "चिरायु" टीम नौनिहालों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रही है। यह टीम न केवल गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों की पहचान कर रही है, बल्कि उन्हें बेहतर उपचार उपलब्ध कराकर नई जिंदगी भी दे रही है।
मानपुर विकासखंड में बीते दो वर्षों (सत्र 2024-25 एवं 2025-26) के दौरान गंभीर जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित 18 बच्चों का राजधानी रायपुर स्थित एमएमआई नारायणा अस्पताल में सफल ऑपरेशन कराया गया है। इन बच्चों को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत पूरी तरह निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।
यदि योजना के प्रारंभ वर्ष 2014 से अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो केवल मानपुर विकासखंड में ही 40 बच्चों के हृदय रोग का सफल ऑपरेशन "चिरायु" टीम के प्रयासों से संभव हो पाया है। इनमें कई बच्चे ऐसे थे जिनके दिल में छेद था, जबकि कुछ अन्य गंभीर हृदय रोगों से पीड़ित थे। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए लाखों रुपये खर्च कर उपचार कराना संभव नहीं था। ऐसे में यह योजना उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई।
परिजनों का कहना है कि अपने बच्चों को गंभीर बीमारी से जूझते देख वे निराश हो चुके थे। हृदय रोग के ऑपरेशन में लगभग तीन लाख रुपये या उससे अधिक का खर्च आने के कारण उपचार कराना उनके लिए असंभव था। लेकिन राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और चिरायु टीम की मदद से बच्चों का निःशुल्क ऑपरेशन हुआ और आज वे स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।
गांव-गांव पहुंच रही चिरायु टीम
मानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत "चिरायु" टीम लगातार गांव-गांव जाकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर रही है। स्थानीय बीएमओ डॉ. गिरीश खोबरागड़े के निर्देशन तथा चिरायु टीम प्रभारी डॉ. सुनील गायकवाड़ के नेतृत्व में महिला चिकित्सक डॉ. पायल साहू, फार्मासिस्ट विद्या देहारी, लैब टेक्नीशियन जयराम वर्मा एवं लोकेश्वरी सोरी तथा एएनएम भाग्यलक्ष्मी की टीम स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंचकर बच्चों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रही है।
स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान जब भी गंभीर हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की पहचान हुई, टीम ने संवेदनशीलता और तत्परता के साथ उनके उपचार की जिम्मेदारी उठाई। आवश्यक जांच और प्रक्रिया पूरी कर बच्चों को रायपुर स्थित एमएमआई नारायणा अस्पताल भेजा गया, जहां उनका सफल एवं निःशुल्क ऑपरेशन कराया गया।
अभी भी जारी है मिशन
चिरायु टीम के प्रभारी डॉ. सुनील गायकवाड़ के अनुसार अब तक तीन दर्जन से अधिक बच्चों को हृदय रोग से मुक्ति दिलाई जा चुकी है। वहीं करीब एक दर्जन बच्चे वर्तमान में टीम की निगरानी और ऑब्जर्वेशन में हैं, जिन्हें आगे बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है।
सरकारी योजना ने लौटाई मुस्कान
दूरस्थ आदिवासी अंचल में रहने वाले परिवारों के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और चिरायु टीम का कार्य किसी जीवनदायिनी पहल से कम नहीं है। गंभीर हृदय रोग जैसी जटिल बीमारी से जूझ रहे बच्चों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराकर यह टीम न केवल उनके जीवन को बचा रही है, बल्कि उनके परिवारों की खो चुकी खुशियां भी वापस लौटा रही है। ऐसे में चिरायु टीम वास्तव में क्षेत्र के नौनिहालों के लिए वरदान बनकर उभरी है।
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