जिले में आयोजित सुशासन तिहार का उद्देश्य जहां आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करना है, वहीं जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। प्रशासन द्वारा इस अभियान को महज औपचारिकता बनाकर निपटाने की तस्वीरें सामने आई हैं।
इसकी बानगी जिले के दूरस्थ महाराष्ट्र सीमावर्ती ग्राम साल्हेभट्टी में देखने को मिली, जहां कलेक्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में शिविर आयोजित किया गया। लेकिन भारी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी के बावजूद व्यवस्थाएं बेहद कमजोर रहीं।
भीषण गर्मी में छोटा शिविर, बड़ी भीड़
शिविर के लिए एक विशाल मैदान उपलब्ध होने के बावजूद, केवल छोटे से हिस्से में मंच और व्यवस्था की गई। करीब 15 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों को एक ही स्थान पर बुलाया गया, जिससे भीड़ बढ़ गई और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
चिलचिलाती गर्मी के बीच महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग पसीने से तरबतर नजर आए। कई ग्रामीण भीड़ और गर्मी से बचने के लिए शिविर स्थल से दूर पेड़ों की छांव में बैठने को मजबूर दिखे।
पेड़ों के नीचे निपटे प्रशासनिक काम
स्थिति इतनी अव्यवस्थित रही कि शिविर से जुड़े कई प्रशासनिक कार्य भी मुख्य स्थल के बजाय पेड़ों के नीचे किए जाते नजर आए। दूर-दराज से पहुंचे कई ग्रामीण व्यवस्था से परेशान होकर बिना लाभ लिए ही वापस लौट गए।
ग्रामीणों में नाराजगी
अव्यवस्था को लेकर क्षेत्रवासियों में स्पष्ट नाराजगी देखने को मिली। शिविर स्थल पर ही लोग खुले तौर पर प्रशासन की आलोचना करते नजर आए।
यहां तक कि सत्ता पक्ष के एक नेता ने भी अपने संबोधन में शिविर के छोटे दायरे और अव्यवस्था को स्वीकार किया।
विभाग ने जताई संतुष्टि
वहीं, कृषि आधारित थीम पर आयोजित इस शिविर में शामिल कृषि विभाग के अधिकारी व्यवस्थाओं को संतोषजनक बताते हुए अपनी ही पीठ थपथपाते नजर आए, जो जमीनी हालात से बिल्कुल अलग दिखा।
हरि मिश्रा, क्षेत्रवासी:
“इतनी गर्मी में इतनी भीड़ बुला ली गई, लेकिन बैठने और व्यवस्था की कोई ठीक सुविधा नहीं थी। हम लोग पेड़ों के नीचे बैठने को मजबूर थे।”
जी.पी. धुर्वे, कृषि विस्तार अधिकारी:
“शिविर में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं और विभाग द्वारा बेहतर तरीके से कार्यक्रम का संचालन किया गया।”
0 टिप्पणियाँ