NBP NEWS/ मोहला, 14 फरवरी 2026 मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में शुक्रवार को अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी एक दिवसीय दौरे पर रहे। इस दौरान वे गोंड समाज के वार्षिक उत्सव एवं सम्मेलन में भाग लेने मुरेटीटोला–अंबागढ़ चौकी पहुंचे।
कार्यक्रम स्थल पर गाड़ा-बाजा की थाप और बच्चों के पारंपरिक नृत्य के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया। स्वागत जुलूस के साथ उन्हें मंच तक लाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत देवी-देवताओं एवं रानी दुर्गावती की पूजा-अर्चना से की गई। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति हुई, जिसमें छोटे-छोटे बच्चों ने नृत्य और गायन से सभी का मन मोह लिया।
समारोह में समाज के मेधावी विद्यार्थियों को मोमेंटो एवं प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं, पुलिस भर्ती में चयनित समाज के युवाओं को भी मंच के माध्यम से सम्मानित किया गया, जिससे युवाओं में उत्साह का माहौल देखा गया।
अपने संबोधन में अध्यक्ष मंडावी ने गोंड आदिवासी समाज की गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत को याद करते हुए कहा कि भारतवर्ष के विभिन्न क्षेत्रों में आदिवासी सम्राटों का शासन रहा है। उन्होंने कहा कि राज-पाठ समाप्त होने और सामाजिक एकता में कमी आने के कारण आज आदिवासी समाज का राजनीतिक उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे अवसरों पर आदिवासी समाज को केवल पारंपरिक वेशभूषा पहनाकर प्रदर्शन तक सीमित कर दिया जाता है, जबकि राजनीति में उनका उपयोग फायदे के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने समाज से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि जब समाज संगठित रहेगा, तभी शासन-प्रशासन उसे गंभीरता से लेगा और उसका महत्व बढ़ेगा। “राजनीति हमारा उपयोग न करे, बल्कि हम राजनीति का उपयोग करें, तभी हमें ताकत मिलेगी। सरकार की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं,” उन्होंने कहा।
अध्यक्ष मंडावी ने कहा कि उन्हें आदिवासी समाज के हक और अधिकारों के संरक्षण की जिम्मेदारी मिली है और वे इसकी रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आदिवासी समाज को आपस में बांटने का प्रयास किया जाता है—कोई भाजपा में, कोई कांग्रेस में, तो कोई अन्य राजनीतिक दलों में चला जाता है। एकता की कमी के कारण समाज की स्थिति कमजोर हुई है।
उन्होंने कहा कि जनजातियों की पहचान उनके खान-पान, पहनावे, बोली-भाषा और रीति-नीति से होती है, जिसे संरक्षित रखना आवश्यक है। “यदि हमने अपनी परंपराओं को नहीं बचाया, तो आदिवासी पहचान खतरे में पड़ जाएगी,” उन्होंने कहा। साथ ही बच्चों को उच्च शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक संस्कार और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने पर भी बल दिया।
अपने संबोधन में उन्होंने आदिवासी समाज की सामूहिक परंपराओं का उदाहरण देते हुए कहा कि शादी जैसे बड़े कार्यक्रमों में पूरा समाज एकजुट होकर जिम्मेदारियां बांट लेता है—कोई निमंत्रण पत्र बांटता है, कोई चावल लाता है, कोई सब्जी और तेल की व्यवस्था करता है, भंडारी नियुक्त किए जाते हैं, लकड़ी, पानी, भोजन और बारात स्वागत की जिम्मेदारियां अलग-अलग लोगों को दी जाती हैं। इसी सामाजिक एकता के कारण बड़े से बड़ा कार्यक्रम सहजता से संपन्न हो जाता है।
कार्यक्रम के दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने सामाजिक भवन निर्माण की मांग भी रखी। इस पर अध्यक्ष मंडावी ने आश्वासन दिया कि सामाजिक भवन का कार्य इस वर्ष के अंत तक पूर्ण कराने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम में सर्कल अध्यक्ष मुरेटी टोला चिंता राम सलामे, जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह, जिला पंचायत सदस्य सविता तिलक सोरी, भाजपा जिला अध्यक्ष दिलीप वर्मा, जनपद सदस्य पवन तुलावी सहित बड़ी संख्या में समाजजन और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे और पूरे आयोजन में उत्साह एवं एकजुटता का संदेश देखने को मिला।
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