NBP NEWS/मोहला, 11 फरवरी 2026। गर्मी के मौसम में जंगलों में बढ़ती आग की घटनाओं और वन्य प्राणियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मोहला वनमंडल द्वारा मानपुर काष्ठागार डिपो में एक व्यापक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वनमंडलाधिकारी दिनेश पटेल, नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी के सूरज, उप वनमंडलाधिकारी मोहला, सभी परिक्षेत्र अधिकारी, फील्ड स्टाफ, संयुक्त वन प्रबंधन समिति एवं लघु वनोपज समिति के अध्यक्ष, फायर वाचर तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वन्य प्राणी संरक्षण, अवैध शिकार की रोकथाम तथा आगामी अग्नि सीजन 2026 को लेकर समन्वित रणनीति तैयार करना रहा। श्री सूरज ने “एंटी स्नायर वॉक” के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वन क्षेत्रों में नियमित गश्त और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी से अवैध शिकार की घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि जैव विविधता और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के लिए स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।
वन विभाग ने बताया कि अग्नि सीजन फरवरी 2026 से 15 जून 2026 तक घोषित किया गया है। इस दौरान विशेष सतर्कता बरती जाएगी। पिछले दो वर्षों में हुई वनाग्नि घटनाओं की समीक्षा कर प्रभावित क्षेत्रों का विश्लेषण किया गया और एक ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अधिकांश आग की घटनाएं मानवीय लापरवाही के कारण होती हैं, जैसे महुआ संग्रहण के दौरान पत्तों को जलाना, खेतों में पराली जलाना और असावधानीपूर्वक आग का उपयोग। ग्रामीणों से इन गतिविधियों से बचने और जागरूकता फैलाने की अपील की गई।
कार्यशाला में वनाग्नि से होने वाले नुकसान पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बताया गया कि आग से वन संपदा, वन्यजीवों का आवास, मिट्टी की उर्वरता और जल स्रोत प्रभावित होते हैं, जिससे पर्यावरणीय संतुलन और ग्रामीणों की आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
वन विभाग की तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया गया कि अग्नि नियंत्रण कक्ष स्थापित कर सतत निगरानी की जा रही है। स्ट्राइक फोर्स वाहनों के माध्यम से विशेष दल तैनात किए गए हैं तथा संवेदनशील क्षेत्रों में फायर वाचरों की नियमित नियुक्ति सुनिश्चित की गई है। महुआ संग्रहण से जुड़ी संभावित आग की घटनाओं को रोकने के लिए वन क्षेत्रों में स्थित महुआ वृक्षों की ग्रामवार गणना कर सूची तैयार की जा रही है, ताकि संबंधित गांवों में विशेष सतर्कता बरती जा सके।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को फील्ड में ले जाकर फायर ब्लोअर सहित अन्य उपकरणों के उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। आग लगने की स्थिति में त्वरित और सुरक्षित कार्रवाई की प्रक्रिया समझाई गई। कार्यशाला के माध्यम से वन विभाग ने संदेश दिया कि वन संरक्षण केवल विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। सभी के सहयोग से ही वन और वन्यजीवों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
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