अंबागढ़ चौकी। जिले में बदहाल सड़कों, जर्जर स्कूल भवनों और जिला खनिज न्यास (DMF) की राशि के उपयोग को लेकर कांग्रेस विधायक इंद्रशाह मंडावी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। विधायक ने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकताएं जमीनी जरूरतों से हटकर ऐसे कार्यों पर केंद्रित हो गई हैं, जबकि जिले की जनता आज भी सड़क, शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है।
विधायक ने कहा कि मानपुर क्षेत्र से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-930 की स्थिति कई स्थानों पर खराब है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे और दरारें दिखाई दे रही हैं। वहीं जिला मुख्यालय मोहला की कई नगर सड़कें भी बदहाल स्थिति में हैं। राजनांदगांव से मानपुर तक निर्माणाधीन स्टेट हाईवे की धीमी गति और सड़क की स्थिति को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में क्षेत्र को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने के लिए कई स्तरों पर कार्य किए गए थे, लेकिन वर्तमान सरकार उन सड़कों के रखरखाव और सुधार पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है।
50 से अधिक स्कूल जर्जर, शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
विधायक मंडावी ने जिले की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि जिले में 50 से अधिक स्कूल भवन जर्जर अवस्था में हैं। कई स्थानों पर बच्चे किराए के मकानों, पेड़ों की छांव, रंगमंच या सीमित भवनों में पढ़ने को मजबूर हैं। वनांचल क्षेत्र मानपुर में स्कूल भवनों की स्थिति और शिक्षकों की कमी को लेकर उन्होंने विशेष चिंता व्यक्त की।
विधायक ने DMF की राशि के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में पहली प्राथमिकता जर्जर स्कूल भवनों के निर्माण, मरम्मत, शिक्षकों की उपलब्धता और जरूरी शैक्षणिक संसाधनों पर होनी चाहिए। इसके बजाय स्कूल परिसरों में ओपन जिम और वर्चुअल क्लास जैसी सुविधाओं पर राशि खर्च किए जाने से प्राथमिकताओं को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
वर्चुअल क्लास पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च का दावा
विधायक के अनुसार कौड़िकसा, गोटाटोला, दनगढ़ और भरीटोला के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में वर्चुअल कक्षाएं स्थापित की गई हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रत्येक स्कूल में करीब 25 लाख रुपये की लागत से वर्चुअल क्लास स्थापित की गई, यानी कुल लगभग एक करोड़ रुपये खर्च हुए।
विधायक का आरोप है कि इन स्कूलों में विषय विशेषज्ञों और पर्याप्त तकनीकी सहायता की व्यवस्था नहीं होने के कारण वर्चुअल क्लास की उपयोगिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि महंगे उपकरण लगाने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि उनका नियमित और प्रभावी उपयोग हो।
सात स्कूलों में ओपन जिम पर करीब 79 लाख रुपये खर्च का दावा
विधायक ने बताया कि शेरपार, हथरा, ईरागांव, कोसमी, भावसा, कुम्हारी और खड़गांव के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में ओपन जिम स्थापित करने के लिए ग्रामसभाओं से प्रस्ताव लिए गए थे। उनके मुताबिक प्रत्येक स्कूल में लगभग 11.30 लाख रुपये की लागत से ओपन जिम स्थापित किए गए, जिनकी कुल लागत करीब 79.10 लाख रुपये है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब कई स्कूलों में भवन, शिक्षक और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी है, तब DMF जैसी महत्वपूर्ण राशि से ओपन जिम और अन्य सुविधाओं को प्राथमिकता देना कितना उचित है।
विधायक ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि विकास कार्यों में जनहित की वास्तविक जरूरतों के बजाय अन्य प्राथमिकताओं को महत्व दिया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों पर प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से कोई पक्ष सामने नहीं आया है।
एक लाख 20 हजार दीये जलाने की तैयारी पर भी सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर सेवा संकल्प पखवाड़े के तहत जिले में करीब एक लाख 20 हजार दीये जलाने की तैयारियों को लेकर भी विधायक ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पंचायतों पर पहले से आर्थिक दबाव है और ऐसे समय में दीयों एवं तेल पर खर्च करने के बजाय गांवों की मूलभूत समस्याओं के समाधान पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
विधायक के अनुमान के मुताबिक यदि प्रत्येक दीपक में 20 मिलीलीटर तेल की खपत होती है तो करीब 2,400 लीटर तेल की आवश्यकता होगी। उन्होंने लगभग 1.20 लाख दीयों की लागत करीब 2.40 लाख रुपये और तेल की अनुमानित लागत करीब 3.84 लाख रुपये बताते हुए सवाल किया कि क्या इस राशि का उपयोग सड़क, नाली, स्कूल, पेयजल और अन्य जरूरी विकास कार्यों में नहीं किया जा सकता था।
जनता को दीया नहीं, सड़क और सुरक्षित स्कूल चाहिए: मंडावी
विधायक मंडावी ने कहा कि सरकार को जमीनी हकीकत के आधार पर विकास की प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां सड़कें खराब हैं, स्कूल भवन जर्जर हैं, शिक्षकों की कमी है और बच्चे मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पढ़ने को मजबूर हैं, वहां सबसे पहले इन समस्याओं का समाधान होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिले की जनता को प्रचार और दिखावे की राजनीति नहीं, बल्कि बेहतर सड़कें, सुरक्षित स्कूल भवन, पर्याप्त शिक्षक और मूलभूत सुविधाएं चाहिए। सरकार को सरकारी राशि के उपयोग में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
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