जल संकट से निपटने और ग्रामीण आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान को नई धार दी जा रही है। 10 अप्रैल को जिला पंचायत सभागार में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) भारती चंद्राकर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा जाए।
वर्षा पूर्व कार्यों को पूर्ण करने का लक्ष्य
बैठक के दौरान सीईओ ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मानसून के आगमन से पहले जल संवर्धन के सभी ढांचे तैयार हो जाने चाहिए। उन्होंने ‘नव तरिया आय का जरिया’ अभियान पर विशेष बल देते हुए कहा कि नवीन तालाब निर्माण, डबरी, कंटूर ट्रेंच और वाटर संग्रहण ट्रेंच जैसे कार्यों को समय-सीमा के भीतर पूर्ण करें। इन संरचनाओं का उद्देश्य न केवल पानी रोकना है, बल्कि ग्रामीणों के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा करना भी है।
ग्रामीण विकास और मनरेगा पर जोर
समीक्षा बैठक में मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति की भी जांच की गई। सीईओ चंद्राकर ने निम्नलिखित बिंदुओं पर कड़े निर्देश दिए:
रोजगार की उपलब्धता: सभी पात्र श्रमिकों को मांग के अनुरूप काम दिया जाए और ग्राम पंचायतों में मजदूरों की संख्या बढ़ाई जाए।
तकनीकी पारदर्शिता: निर्माण कार्यों की जियो टैगिंग और लंबित प्रस्तावों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित हो।
सख्त मॉनिटरिंग: कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
आत्मनिर्भरता का मार्ग है जल संरक्षण
सीईओ भारती चंद्राकर ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा: "मोर गांव-मोर पानी अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की एक महत्वपूर्ण पहल है। जब जल संरचनाएं पुनर्जीवित होंगी, तो इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव कृषि, पशुपालन और स्थानीय आजीविका पर पड़ेगा।"
भविष्य की कार्ययोजना
प्रशासन का लक्ष्य हर ग्राम पंचायत में स्थानीय आवश्यकता के अनुसार टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण करना है। इसमें सोखपिट, खेत तालाब, नाला उपचार और जलस्रोतों का संवर्धन शामिल है। जिले की सभी जनपद पंचायतों को निर्देशित किया गया है कि वे अभियान के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए नियमित रूप से जमीनी स्तर पर समीक्षा करें।
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