शिक्षा के क्षेत्र में वनांचल क्षेत्रों से लगातार प्रतिभाएं उभरकर सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में मोहला विकासखंड के मुकादाह संकुल के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक शाला डुमरटोला के छात्र रुस्तम ने अपनी मेहनत और लगन से नवोदय विद्यालय डोंगरगढ़ की प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल कर विद्यालय और क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
माता-पिता ने गुरुजनों को दिया श्रेय
छात्र रुस्तम के पिता धनसिंह नूरेटी और माता रामबती नूरेटी ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर अपनी खुशी व्यक्त की। उन्होंने बेटे की इस सफलता का पूरा श्रेय शाला के प्रधान पाठक गोकुल सिंह करबगिया और संकुल स्तरीय 'शिखर कोचिंग' के उत्कृष्ट मार्गदर्शन को दिया है।
'शिखर कोचिंग' के माध्यम से संवर रहा भविष्य
संकुल समन्वयक उमाशंकर दिल्लीवार ने जानकारी देते हुए बताया कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी राजेंद्र कुमार देवांगन के कुशल मार्गदर्शन में संकुल स्तर पर एक विशेष पहल की जा रही है।
इस पहल के तहत संकुल के शिक्षकों के सहयोग से सप्ताह में एक दिन विशेष कक्षाएं आयोजित की जाती हैं। इसका मुख्य लक्ष्य कक्षा 5वीं और 8वीं के छात्रों को नवोदय, एकलव्य, जवाहर उत्कर्ष और प्रयास जैसी प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षाओं के लिए तैयार करना है। इसी सामूहिक प्रयास का नतीजा है कि विगत वर्षों में इस संकुल से कई छात्र-छात्राओं का चयन बड़े आवासीय विद्यालयों में हुआ है।
डुमरटोला स्कूल बना सफलता का केंद्र
विशेष रूप से प्राथमिक शाला डुमरटोला ने शिक्षा की गुणवत्ता में एक मिसाल पेश की है। पिछले कुछ वर्षों में यहाँ के विद्यार्थियों ने निरंतर नवोदय विद्यालय और एकलव्य आवासीय विद्यालयों में अपनी जगह बनाई है, जो शिक्षकों के समर्पण और छात्रों की कड़ी मेहनत को दर्शाता है।
"ग्रामीण परिवेश के बच्चों में अपार प्रतिभा होती है, बस उन्हें सही मार्गदर्शन की आवश्यकता है। शिखर कोचिंग के माध्यम से हम यही प्रयास कर रहे हैं।"— संकुल प्रबंधन
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