जिले में पिछले लगभग दो वर्षों से गोंड समाज दो अलग-अलग विचारधाराओं में बंटा हुआ है, जिसके कारण एक ही समाज दो भागों में विभाजित नजर आ रहा है। इस विभाजन का असर अब सामाजिक एकता, 7/14 परंपराओं और आपसी रिश्तों पर साफ दिखाई देने लगा है। लगातार बढ़ते मतभेदों के कारण समाज के भीतर तनाव की स्थिति बनी हुई है।
जानकारों के मुताबिक,इस खींचतान का सीधा असर सामाजिक कार्यक्रमों पर पड़ रहा है। शादी-विवाह, छठ्ठी, मरनी जैसे पारंपरिक आयोजनों में समन्वय की कमी देखी जा रही है। कई जगहों पर आपसी सहयोग के बजाय दूरी और विवाद की स्थिति बन रही है, जिससे समाज का ताना-बाना कमजोर होता जा रहा है। इसका नकारात्मक प्रभाव नई पीढ़ी पर भी पड़ रहा है, जहां आपसी भाईचारे की जगह अलगाव की भावना बढ़ती दिखाई दे रही है। प्रशासन भी क्षेत्र की सबसे बड़ी समाज की इस स्थिति पर नजर बनाए हुई है।
इसी बढ़ती दूरी को कम करने और समाज को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से समन्वय की पहल की गई है। युवाओं की एक टोली ने आगे आकर गोंड समाज समन्वय समिति का गठन किया है, जो दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कर मतभेदों को दूर करने का प्रयास कर रही है।
इसी कड़ी में संभाग स्तरीय गोंड समाज समन्वय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक 29 मार्च 2026 रविवार को आयोजित की जा रही है। इस बैठक में संभाग स्तरीय गोंड समाज पंजीयन क्रमांक 1439/93 तथा गोंड समाज मोहला, दोनों पक्षों के सियानों (वरिष्ठों) और पदाधिकारियों को आमंत्रित किया गया है। बैठक का मुख्य उद्देश्य आपसी विवादों का समाधान निकालना और समाज में समन्वय स्थापित करना है।
गोंडवाना युवा प्रभाग द्वारा जारी सूचना में सभी संबंधित सदस्यों की उपस्थिति को अनिवार्य बताया गया है। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि बिना उचित कारण "अनुपस्थित रहने वाले व्यक्तियों को सामाजिक उन्माद फैलाने वाले की सूची में डाला जाएगा" उनके खिलाफ सामाजिक स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है और जरूरत पड़ने पर ऐसे लोगों के खिलाफ थाना स्तर पर शिकायत दर्ज कराने और उन्हें सामाजिक गतिविधियों से प्रतिबंधित करने की बात भी कही गई है।
अब पूरे समाज की नजर इस बैठक पर टिकी हुई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों विचारधाराओं के लोग आपसी मतभेद भुलाकर एकजुटता की दिशा में कदम बढ़ाते हैं या फिर विरोध की स्थिति बनी रहती है और आने वाले पीढ़ी बस अंधेरे में रहेगी । फिलहाल, समाज के जागरूक वर्ग इस पहल को सकारात्मक मानते हुए उम्मीद जता रहे हैं कि संवाद और सहयोग के माध्यम से गोंड समाज फिर से एकजुट होकर अपनी सामाजिक मजबूती को हासिल करेगा।
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