जल-जंगल-जमीन और आदिवासी अधिकारों को लेकर ग्रामीणों ने रखी स्पष्ट बात, छात्रों के जाति-निवास प्रमाण-पत्र समय पर जारी करने की भी उठी मांग
NBP NEWS / मोहला | 02 अक्टूबर 2026
महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी के विकासखंड मोहला अंतर्गत ग्राम पंचायत मड़ियानवाडवी के सभी आश्रित ग्रामों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया। ग्राम सभा में गांव के समग्र विकास के साथ सामुदायिक वन अधिकार (CFR), समान नागरिक संहिता (UCC), आगामी परिसीमन, विद्यार्थियों के जाति एवं निवास प्रमाण-पत्र सहित आदिवासी क्षेत्रों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। चर्चा के बाद विभिन्न मुद्दों को लेकर महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित कर संबंधित विभागों एवं अधिकारियों तक आवश्यक कार्रवाई के लिए पहुंचाने का निर्णय लिया गया।
CFR को लेकर ग्राम सभा में जोरदार चर्चा
विशेष ग्राम सभा में सामुदायिक वन अधिकार (CFR) को प्रमुखता से उठाया गया। ग्रामीणों ने कहा कि CFR केवल वनभूमि से जुड़ा अधिकार नहीं है, बल्कि यह ग्राम सभा की सामुदायिक व्यवस्था, आजीविका, संस्कृति तथा जल-जंगल-जमीन के संरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण कानूनी अधिकार है।
ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन एवं सतत उपयोग के लिए वन प्रबंधन समिति को सक्रिय और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया गया। साथ ही वन उपज, जल, जंगल एवं भूमि से जुड़े निर्णय ग्राम सभा की सहमति तथा स्थानीय पारंपरिक व्यवस्थाओं के अनुरूप लिए जाने की बात कही गई।
UCC पर ग्राम सभा ने पारित किया संकल्प
ग्राम सभा में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर भी विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। ग्राम सभा के संकल्प में छत्तीसगढ़ में UCC लागू नहीं किए जाने की मांग रखी गई।
संकल्प में अनुसूचित जनजातियों की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, Customary Law, संस्कृति एवं सामुदायिक संस्थाओं का उल्लेख करते हुए संविधान के अनुच्छेद 244, पाँचवीं अनुसूची और PESA की भावना के अनुरूप आदिवासी समाज की विशिष्ट व्यवस्था को संरक्षण देने की मांग की गई।
ग्राम सभा ने यह भी प्रस्ताव रखा कि यदि भविष्य में UCC लागू किया जाता है तो अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से स्पष्ट रूप से बाहर रखने का प्रावधान किया जाए। साथ ही आदिवासी समाज से संबंधित किसी भी कानून या प्रावधान में बदलाव से पहले ग्राम सभाओं एवं संबंधित आदिवासी समुदायों से सार्थक परामर्श किए जाने की मांग की गई।
परिसीमन में सिर्फ आबादी नहीं, भौगोलिक परिस्थितियां भी हों आधार
आगामी परिसीमन को लेकर भी ग्राम सभा में गंभीर चर्चा हुई। ग्रामीणों ने प्रस्ताव के माध्यम से कहा कि परिसीमन में केवल जनसंख्या को आधार न बनाया जाए, बल्कि भौगोलिक क्षेत्रफल, वन क्षेत्र, जनसंख्या घनत्व, दुर्गमता और आवागमन की कठिनाइयों को भी उचित महत्व दिया जाए।
ग्राम सभा ने विशेष रूप से आदिवासी एवं अनुसूचित क्षेत्रों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्यायसंगत एवं संतुलित परिसीमन की मांग की। ग्रामीणों का कहना रहा कि बड़े भौगोलिक क्षेत्र और दुर्गम परिस्थितियों वाले आदिवासी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व केवल जनसंख्या के आधार पर कमजोर नहीं होना चाहिए तथा अनुसूचित जनजातियों के संवैधानिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व एवं आरक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
विद्यार्थियों के जाति-निवास प्रमाण-पत्र में देरी का मुद्दा भी उठा
विशेष ग्राम सभा में शिक्षा से जुड़ी समस्या को भी गंभीरता से उठाया गया। ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालयों में अध्ययनरत कई विद्यार्थियों के जाति, निवास एवं अन्य आवश्यक प्रमाण-पत्र समय पर तैयार नहीं हो पाने के कारण उन्हें आगे की पढ़ाई, प्रवेश और विभिन्न शैक्षणिक प्रक्रियाओं में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ग्राम सभा ने प्रस्ताव पारित कर संबंधित विभागों से विद्यार्थियों के आवश्यक प्रमाण-पत्र समय पर तैयार कराने के लिए विशेष पहल करने की मांग की, ताकि दस्तावेजों की कमी के कारण किसी भी विद्यार्थी की शिक्षा प्रभावित न हो।
कॉम. योगेंद्र कुमोटी ने बताया CFR का महत्व
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता कॉम. योगेंद्र कुमोटी ने सामुदायिक वन अधिकार के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि पेसा क्षेत्र में CFR अधिकार ग्राम सभा को जंगल और उससे जुड़े सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण कानूनी आधार प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि सामुदायिक वन अधिकार से ग्राम सभा की भूमिका मजबूत होती है और जल-जंगल-जमीन के संरक्षण में समुदाय की भागीदारी बढ़ती है। साथ ही महुआ, तेंदूपत्ता, चार, हर्रा, बहेरा सहित विभिन्न लघु वनोपज से जुड़ी आजीविका एवं पारंपरिक अधिकारों को कानूनी आधार मिलने की दिशा में भी CFR महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि “सामुदायिक वन पट्टा केवल जमीन का कागज नहीं, बल्कि ग्राम सभा के सामुदायिक अधिकार, आजीविका, संस्कृति और जल-जंगल-जमीन की रक्षा का कानूनी आधार है।” उन्होंने पात्र पेसा ग्राम सभाओं से सामुदायिक वन अधिकार के दावों एवं अधिकारों की प्रक्रिया को गंभीरता से आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
ग्रामीणों ने स्थानीय समस्याओं को प्रस्ताव के जरिए उठाया
विशेष ग्राम सभा में ग्राम सभा अध्यक्ष, सचिव, ग्राम पंचायत सरपंच, पंचायत सचिव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने स्थानीय विकास, सामुदायिक अधिकार, शिक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था तथा आदिवासी क्षेत्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी।
ग्राम सभा में पारित प्रस्तावों के माध्यम से संबंधित विभागों एवं अधिकारियों तक समस्याएं और मांगें पहुंचाने तथा आवश्यक कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया गया। गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित यह विशेष ग्राम सभा ग्रामीणों की भागीदारी और स्थानीय मुद्दों पर सामूहिक निर्णय की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण मंच बनी।

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