NBP NEWS/ मोहला, 20 अगस्त 2026 मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला पंचायत अध्यक्ष एवं भाजपा की कद्दावर नेत्री नम्रता सिंह के जाति प्रमाण पत्र को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों और शिकायतों पर मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अब उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति के आदेश के बाद महत्वपूर्ण स्थिति सामने आई है। कहा जा रहा है कि समिति ने उपलब्ध दस्तावेजों, शासकीय अभिलेखों, प्रस्तुत साक्ष्यों और मामले की जांच के आधार पर नम्रता सिंह को छत्तीसगढ़ राज्य में गोंड, अनुसूचित जनजाति (ST) के जाति प्रमाण पत्र की पात्रता माना है।
19 अगस्त को जारी हुआ समिति का आदेश
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति द्वारा 19 अगस्त 2026 को जारी आदेश में मामले से संबंधित दस्तावेजों एवं अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद अपना निष्कर्ष दर्ज किया गया है। समिति ने उपलब्ध साक्ष्यों और मामले के गुण-दोष पर विचार करते हुए नम्रता सिंह के जाति प्रमाण पत्र की पात्रता को स्वीकार किया है।
शिकायत के बाद विजिलेंस सेल को सौंपी गई थी जांच
नम्रता सिंह के जाति प्रमाण पत्र को लेकर शिकायत सामने आने के बाद मामले की जांच विजिलेंस सेल को सौंपी गई थी। रिपोर्ट्स की माने तो जांच के दौरान संबंधित दस्तावेजों, शासकीय अभिलेखों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। इसके अलावा मामले से जुड़े विभिन्न तथ्यों और लागू शासकीय प्रावधानों पर भी समिति ने विचार किया।
समिति के आदेश में विभिन्न शासकीय परिपत्रों, अभिलेखों और न्यायालयीन निर्णयों का उल्लेख करते हुए उनके प्रभाव पर भी विचार किया गया है। विशेष रूप से वर्ष 1998 के मध्यप्रदेश शासन के परिपत्र और वर्ष 2002 के छत्तीसगढ़ शासन के परिपत्र का उल्लेख आदेश में किया गया है।
उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जाति प्रमाण पत्र को माना पात्र
मीडिया के अनुसार समिति के आदेश का प्रमुख निष्कर्ष यह है कि संबंधित परिपत्रों, दस्तावेजों एवं अभिलेखों, उपलब्ध साक्ष्यों तथा मामले के गुण-दोष के आधार पर नम्रता सिंह को छत्तीसगढ़ राज्य में गोंड, अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाण पत्र की पात्रता आती है।
इस निष्कर्ष के बाद नम्रता सिंह के जाति प्रमाण पत्र को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद को जांच समिति के आधिकारिक आदेश से एक महत्वपूर्ण आधार मिला है।
क्या है मामला
आवेदक विवेक सिंह ने नम्रता सिंह के जाति प्रमाण असंवैधानिक तरीके से बनने के आरोप के साथ आवेदन प्रस्तुत किए थे। उनके अनुसार नम्रता सिंह के पूर्वज उड़ीसा निवासी है ऐसे में ग्राम सभा मोहला के आधार पर जाति प्रमाण पत्र बनना व 2013 में सामाजिक परिस्थिति पर कानून का हवाला देते हुए आपत्ति दर्ज करवाई थी।
जिसके बाद 27 सितंबर 2026 को लिखित आदेश में तहसीलदार मोहला को उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने मुनादी कर 7 अगस्त को सुनवाई में नम्रता सिंह के सामाजिक परिस्थिति के जानकारी में पक्ष या विपक्ष में नोटरीकृत आवेदन प्रस्तुत करने को कहा था।
7 अगस्त को रायपुर पहुंच कर उच्च स्तरीय छानबिन समिति के समक्ष दोनों पक्षों ने अपनी अपनी दस्तावेज और बयान दर्ज करवाई थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उच्च स्तरीय छानबीन समिति का निर्णय नम्रता सिंह के पक्ष में आया है। जिससे लंबे समय से चुप्पी साध रखे नम्रता सिंह और उनके खेमे में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है।
क्या कहा जिम्मेदार अधिकारी ने
ट्राइबल रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट डायरेक्टर हीना नेताम ने नम्रता सिंह के जाति प्रमाण पत्र मामले में फोन पर प्रतिक्रिया और पुष्टि करने से साफ मना किया है।
क्या हाइ कोर्ट जाएंगे आवेदक
मुख्य आवेदक और सर्व आदिवासी समाज
सात अगस्त को ही आवेदक विवेक सिंह और सर्व आदिवासी समाज ने स्पष्ट किया था कि अगर नम्रता सिंह के पक्ष में आदेश आएगी तो हाइ कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर भी रहा था मामला चर्चा में
बरहाल नम्रता सिंह का जाति प्रमाण पत्र लंबे समय से राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का विषय रहा था। उनके जाति प्रमाण पत्र को लेकर समय-समय पर सवाल और शिकायतें सामने आती रही थीं। अब उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति द्वारा दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद जारी आदेश के कारण इस मामले में महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट हुई है।
आधिकारिक जांच के बाद आया निष्कर्ष
मीडिया में चले खबर की माने तो इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण बात यह है कि निष्कर्ष किसी राजनीतिक बयान, आरोप या सोशल मीडिया दावे के आधार पर नहीं, बल्कि उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति द्वारा की गई जांच और उपलब्ध शासकीय रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद सामने आया है।
समिति के आदेश में उपलब्ध दस्तावेजों, अभिलेखों, साक्ष्यों तथा संबंधित शासकीय प्रावधानों पर विचार करने के बाद नम्रता सिंह की गोंड अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाण पत्र की पात्रता को स्वीकार किया गया है।
माना जा रहा है कि उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति के 19 अगस्त 2026 के आदेश के बाद नम्रता सिंह के जाति प्रमाण पत्र को लेकर चल रहा विवाद एक महत्वपूर्ण आधिकारिक पड़ाव पर पहुंच गया है। समिति ने उपलब्ध रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य में गोंड, अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाण पत्र की पात्रता वाला माना है।
दूसरी ओर आवेदक और सर्व आदिवासी समाज का भी मीडिया रिपोर्ट्स, ऑर्डरशीट पर क्या प्रतिक्रिया है वो भी जल्द ही बताएंगे।
NBP NEWS खबर की पुष्टि नहीं करता है चुकी डायरेक्टर ने पुष्टि से इनकार किया है ऐसे में आगे ऑर्डरशीट मिलने के उपरांत ही पुष्टि और अन्य तथ्यों पर लेख प्रकाशित किया जाएगा।
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